Home » मोदी युग: एक राष्ट्र का फलना-फूलना

मोदी युग: एक राष्ट्र का फलना-फूलना

  • जग्गी वासुदेव
    हम आज एक नए भारत की दहलीज पर खड़े हैं, जो दुनिया पर अपनी छाप फिर से स्थापित करने के लिए शानदार ढंग से तैयार है। भारत वर्तमान में दुनिया भर में जो सम्मान हासिल कर रहा है, वह एक ऐसी दृष्टि से उपजा है, जो व्यापक है, न केवल राष्ट्र के लिए विकास और उन्नति पर केंद्रित है, बल्कि भारत के मूल, हमारे आध्यात्मिक लोकाचार को पुनर्स्थापित करने और पुनर्जीवित करने पर भी समान रूप से केंद्रित है। मैं इन महत्वपूर्ण पहलुओं पर भारत को आगे बढ़ाने में उनके समर्पित प्रयास और नेतृत्व के लिए देश के नेताओं और माननीय प्रधानमंत्री की सराहना करता हूं।
    योग की विरासत: भारत समृद्ध आध्यात्मिक विरासत समेटे हुए है – एक ऐसी परंपरा जो धर्म, विश्वास, संप्रदाय या समुदायों की सीमाओं तक सीमित नहीं है। यह एक ऐसी संस्कृति है जिसने अनगिनत संतों, मुनियों और मनीषियों को जन्म दिया है जिन्होंने मानव चेतना की गहराई का पता लगाया है और योग के विज्ञान के माध्यम से प्रत्येक व्यक्ति को अपनी उच्चतम क्षमता खोजने के तरीके और उपाय बताए हैं। योग के महत्व और प्रभाव को विश्व स्तर पर उस हद तक समझा जा रहा है,जितना पहले कभी नहीं समझा गया, भारत को इसके स्रोत के रूप में स्वीकार किया जा रहा है।
    प्रधानमंत्री श्री मोदी द्वारा 2014 में किए गए प्रस्ताव के अनुसार, संयुक्त राष्ट्र द्वारा अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस की घोषणा होना और 177 सदस्य देशों द्वारा स्वीकार किया जाना, इस संबंध में एक बहुत ही महत्वपूर्ण कदम था। हर साल, यह दिन योग के लाभों को उजागर करने, इसके अभ्यास को प्रोत्साहित करने और व्यक्तियों और समुदायों के बीच स्वास्थ्य, सद्भाव और शांति को बढ़ावा देने के अवसर के रूप में कार्य करता है।
    आध्यात्मिक पुनर्जागरण: अंतर्राष्ट्रीय पटल पर योग की स्थापना के अलावा, हमारी समृद्ध विरासत और संस्कृति के गौरवशाली केंद्रों के पुनरुद्धार की अगुआई में प्रधानमंत्री श्री मोदी के बारे में जानना विशेष रूप से हृदयस्पर्शी रहा है। काशी विश्वनाथ कॉरिडोर की स्थापना के साथ काशी का परिवर्तन, मेगा चार धाम परियोजना जिसमें केदारनाथ और बद्रीनाथ मंदिरों का विकास शामिल है, गुजरात में प्रसिद्ध सोमनाथ मंदिर और उज्जैन में महाकाल मंदिर का जीर्णोद्धार ऐसे प्रयास हैं, जिनसे देश के नागरिक लाभान्वित होंगे और वैश्विक मंच पर आध्यात्मिक शिक्षा और विकास के लिए भारत एक जीवंत केंद्र के रूप में सुदृढ़ होगा।
    प्रकृति के साथ तालमेल: भारतीय आध्यात्मिक परंपरा व्यक्ति और ब्रह्मांड के बीच संबंधों पर एक अनूठा दृष्टिकोण प्रस्तुत करती है। इन्हें अलग-अलग संस्थाओं के रूप में देखने के बजाय, परंपरा ने हमेशा सभी चीजों की परस्पर संबद्धता और अस्तित्व की मौलिक एकता पर बल दिया है। इसके परिणामस्वरूप सभी जीवन के लिए सम्मान होता है, जो सतत विकास और पर्यावरण संरक्षण का आधार बन जाता है। श्री मोदी के कार्यकाल के दौरान कई पर्यावरणीय पहल फली-फूली हैं। 13 नदियों के कायाकल्प के लिए 19,000 करोड़ रुपये का आवंटन, कावेरी पुकारे आंदोलन का प्रभाव, भारत की आबादी के लिए जल सुरक्षा के लिए आवश्यक है। प्रदूषण को कम करने पर जोर देने के साथ गंगा को साफ करने व संरक्षित करने की प्रतिबद्धता है। हम सभी को खड़े होना चाहिए और पर्यावरण को संरक्षित करने और भारत के लिए हरित भविष्य को बढ़ावा देने के लिए अपनी भूमिका निभाने के लिए प्रतिबद्ध होना चाहिए।

Swadesh Bhopal group of newspapers has its editions from Bhopal, Raipur, Bilaspur, Jabalpur and Sagar in madhya pradesh (India). Swadesh.in is news portal and web TV.

@2023 – All Right Reserved. Designed and Developed by Sortd