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शिवराज सिंह सरकार के एक वर्ष पर विशेष: मध्यप्रदेश बिजली के क्षेत्र में स्थापित कर रहा है नित नये आयाम

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  • शिवराज सरकार-भरोसा बरकरार

प्रद्युम्न सिंह तोमर

मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान के दूरदर्शी और संकल्पवान नेतृत्व में मध्यप्रदेश बिजली के क्षेत्र में नित नये आयाम स्थापित कर रहा है। प्रदेश में विद्युत क्षेत्र के विकास और विस्तार के लिए सभी आवश्यक और सुविचारित कदमों का उठाया जाना इन आयामों को छूने के पीछे है। परिणाम भी सामने है और वह यह कि 31 दिसंबर, 2020 की स्थिति में प्रदेश की उपलब्ध विद्युत क्षमता 21 हजार 361 मेगावॉट हो जाना। इसी दिन प्रदेश के इतिहास में सर्वाधिक 15 हजार 425 मेगावॉट शीर्ष मांग की पूर्ति भी सफलतापूर्वक की गई है। वित्तीय वर्ष 2021-22 में उपलब्ध विद्युत क्षमता में 1 हजार 426 मेगावाट वृद्धि का लक्ष्य है। प्रदेश में पारेषण हानियां भी अब मात्र 2.59 प्रतिशत रह गई हैं, जो पूरे देश में न्यूनतम हानियों में से एक है। वित्तीय वर्ष 2020-21 में 6006 करोड़ यूनिट विद्युत प्रदाय किया गया, जो पिछले वर्ष से 9 प्रतिशत अधिक है। प्रदेश में विद्युत व्यवस्था प्रणाली की मजबूती के लिए वित्तीय वर्ष 2020-21 में कई उल्लेखनीय कार्य किए गए। इनमें उपलब्ध विद्युत क्षमता में 394 मेगावाट की वृद्धि, 14 नये अति उच्च दाब उप केन्द्रों की स्थापना, एक हजार 72 सर्किट किलोमीटर अति उच्च दाब और एक हजार 645 किलोमीटर उच्च दाब लाइनों का निर्माण, 11 नये 33/11 किलोवाट उप केन्द्रों की स्थापना एवं 2005 वितरण ट्रांसफार्मरों की स्थापना के कार्य प्रमुख हैं। इससे इस अवधि में उपभोक्ताओं की संख्या में एक लाख 90 हजार की वृद्धि हुई है। आत्म-निर्भर मध्यप्रदेश रोडमैप में भविष्य की विद्युत मांग की सुचारू आपूर्ति के लिए पारेषण प्रणाली के विस्तार कार्यक्रम में 4000 करोड़ रुपये की लागत के ग्रीन एनर्जी कॉरीडोर एवं टैरिफ आधारित प्रतिस्पर्धात्मक निविदाओं के जरिए अति उच्च दाब उप केन्द्रों एवं उससे संबंधित लाइनों का निर्माण शामिल किये गये हैं। ग्रीन एनर्जी कॉरीडोर में 90 प्रतिशत काम पूरा हो गया है। जून 2021 तक अधिकांश काम पूरा कर लिया जाएगा। टैरिफ आधारित 2000 करोड़ रुपये के अनुमानित निवेश के जरिए पहली परियोजना का कार्य प्रगतिरत है, जिसे वर्ष 2023 तक पूरा कर लिया जाएगा।

लॉकडाउन में उपभोक्ताओं को विद्युत देयकों में राहत

मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने लॉकडाउन अवधि में बिजली उपभोक्ताओं की तकलीफ को महसूस कर उनके हित में अनेक निर्णय लिये। इन निर्णयों से उपभोक्ताओं को 1000 करोड़ से अधिक की राहत मिली।ऐसे सभी घरेलू उपभोक्ता, जो संबल योजना के हितग्राही हैं एवं जिनके माह अप्रैल, 2020 में देयक की राशि 100 रूपये तक थी, से मई, जून एवं जुलाई इन तीन माहों में सिर्फ 50 रूपये प्रतिमाह की राशि का ही भुगतान लिया गया।

प्रदेश के ऐसे सभी घरेलू उपभोक्ता, जिनके माह अप्रैल, 2020 में देयक की राशि 100 रूपये तक थी, उनके मई, जून एवं जुलाई, 2020 में देयक राशि 100 रूपये से 400 रूपये तक आने पर उनसे इन तीन माहों में मात्र 100 रूपये प्रतिमाह की राशि का भुगतान लिया गया। प्रदेश के ऐसे घरेलू उपभोक्ता, जिनकी माह अप्रैल, 2020 में देयक राशि रूपये 100 से अधिक परन्तु रूपये 400 या उससे कम थी, उनके मई, जून एवं जुलाई, 2020 में देयक राशि 400 रूपये से अधिक आने पर उनसे इन तीन माहों में देयक की आधी राशि का ही भुगतान लिया गया। शेष आधी राशि का भुगतान आस्थगित किया गया है।

प्रदेश के निम्न दाब गैर घरेलू एवं निम्न दाब औद्योगिक उपभोक्ताओं तथा उच्च दाब टैरिफ एचव्ही-3 उपभोक्ताओं से माह अप्रैल, मई एवं जून 2020 के विद्युत देयकों में स्थायी प्रभार की वसूली को आस्थगित कर यह राशि माह अक्टूबर, 2020 से मार्च, 2021 के विद्युत देयकों के नियमित भुगतान के साथ, छ: समान किश्तों में बिना ब्याज के ली जाने की सुविधा दी गई है।

प्रदेश के उच्च दाब सहित सभी उपभोक्ताओं द्वारा लॉकडाउन के चलते अप्रैल एवं मई माह में देय विद्युत बिलों का भुगतान सामान्य नियत तिथि तक करने पर एक प्रतिशत की अतिरिक्त प्रोत्साहन राशि दी गई। इसमें निम्न दाब उपभोक्ताओं के लिए प्रोत्साहन राशि अधिकतम रूपये दस हजार मात्र तथा उच्च दाब उपभोक्ताओं के लिए अधिकतम रूपये एक लाख मात्र निर्धारित की गई। उपभोक्ताओं को अपनी संविदा मांग में कमी करने की सुविधा भी दी गई। इसका लाभ लेने पर उनके नियत प्रभार और न्यूनतम प्रभार में कमी आई।

उपभोक्ता हितैषी अन्य निर्णय

मुख्यमंत्री चौहान के इस एक साला कार्यकाल में विद्युत उपभोक्ताओं को राहत देने का सिलसिला यहीं नहीं रुका। एक किलोवाट तक के भार वाले घरेलू उपभोक्ताओं को राहत देने के लिए अगस्त, 2020 तक की बकाया राशि को आस्थगित कर सिर्फ चालू माह के देयक ही जारी किए जा रहे हैं। सभी पात्र घरेलू उपभोक्ताओं से भी उनकी पहली 100 यूनिट तक की मासिक खपत पर मात्र 100 रुपये लिए जा रहे हैं। अनुसूचित जाति/जनजाति के गरीबी रेखा से नीचे जीवन-यापन करने वाले घरेलू उपभोक्ताओं को 30 यूनिट तक की मासिक खपत पर सिर्फ 25 रूपये ही देने होते हैं। अंतर राशि का भार राज्य शासन वहन कर रहा है। इससे प्रति माह लगभग एक करोड़ घरेलू उपभोक्ता लाभांवित हो रहे हैं। वर्तमान रबी सीजन में कृषि उपभोक्ताओं को दिन के समय अधिक बिजली देने के लिए फ्लेक्सी प्लान लागू किया गया है। कृषि कार्य के लिए लगभग 22 लाख कृषि उपभोक्ता को फ्लैट दरों पर बिजली दी जा रही है। एक हेक्टेयर तक की भूमि एवं गरीबी रेखा से नीचे जीवन-यापन करने वाले अनुसूचित जाति/जनजाति के 8 लाख कृषि उपभोक्ता को मुफ्त बिजली दी जा रही है।

उपभोक्ताओं से हर स्तर पर सीधे संवाद

विद्युत शिकायतों के निराकरण की प्रक्रिया में जन-भागीदारी सुनिश्चित की गयी है। उपभोक्ताओं से हर स्तर पर सीधे संवाद की व्यवस्था की गई है। विद्युत प्रदाय की शिकायतों के जल्द हल के लिए केन्द्रीयकृत कॉल सेंटरों को सुदृढ़ किया गया है। वर्ष 2020-21 में प्राप्त सभी साढ़े 21 लाख से ज्यादा शिकायतों को हल किया गया है। करीब 3 लाख 80 हजार उपभोक्ताओं से शिकायतों के हल का संपर्क में औसत संतुष्टि प्रतिशत 98.39 पाया गया है। गलत देयकों से संबंधित 33 हजार से अधिक शिकायतों को शिविर लगाकर मौके पर ही दूर किया गया है।

ऊर्जा क्षेत्र की योजनाएं

किसानों को शीघ्र स्थाई सिंचाई पंप कनेक्शन दिये जाने के लिये लागू स्वयं का ट्रांसफार्मर योजना में किसान अपने खर्च से, निर्धारित मापदंड अनुसार 73 हजार 257 ट्रांसफार्मर स्थापित कर चुके हैं। शहरी क्षेत्र में मीटरीकरण, वितरण प्रणाली सुदृढ़ीकरण तथा आई.टी. कार्यों की 50 परियोजनाओं के सभी कार्य पूर्ण हो गये हैं। दीनदयाल उपाध्याय ग्राम ज्योति योजना में भी फीडर विभक्तिकरण, मीटरीकरण, वितरण प्रणाली सुदृढ़ीकरण तथा ग्रामीण विद्युतीकरण कार्यों की सभी 50 परियोजनाओं के कार्य पूरे हो गये हैं।

विद्युत सेवाओं में सूचना प्रौद्योगिकी का उपयोग

पूर्व क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी के क्षेत्र में दक्षता मोबाइल एप से प्रतिमाह 41 लाख 34 हजार उपभोक्ताओं की फोटो मीटर रीडिंग की जा रही है। कम्पनी ने एनजीबी नाम से नया बिलिंग सिस्टम तैयार किया है, जिसकी प्रोसेसिंग स्पीड काफी तेज है तथा जिसे ऑपरेट करना भी आसान है। मध्य क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी द्वारा निम्न दाब उपभोक्ताओं द्वारा स्वयं की गई मीटर रीडिंग के आधार पर बिलिंग की कार्यवाही की गई है। सभी उपभोक्ता सुविधाओं को एक ही प्लेटफार्म से उपलब्ध कराने के लिए व्हाट्सएप चैटबोट का विकास किया गया है। कंपनी कार्यक्षेत्र में बिजली चोरी एवं बिजली के अनाधिकृत उपयोग को पकडऩे एवं रोकने के लिए मोबाइल ऐप उपयोग किया जा रहा है। संकल्प एप्लीकेशन में मौजूदा एलटी उपभोक्ताओं के लिए नये सर्विस कनेक्शन के साथ भार परिवर्तन, नाम एवं टैरिफ श्रेणी में परिवर्तन जैसी नई सुविधाएं जोड़ी गई हैं।

पश्चिम क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी द्वारा उपभोक्ता के घर पहुंच कर बिल भुगतान की सुविधा जा रही है। फोटो मीटर रीडिंग सॉफ्टवेयर से एलटी उपभोक्ताओं की मीटर रीडिंग ली जा रही है।सॉफ्टवेयर तैयार कर सब-स्टेशन/डीटीआर एवं एलटी लाइन के परीक्षण एवं संधारण की गतिविधियों की मॉनिटरिंग की जा रही है।

प्रस्तावित ताप विद्युत परियोजनाएं

अमरकंटक ताप विद्युत गृह, चचाई में प्रस्तावित 18660 मेगावाट सुपरक्रिटिकल इकाई की अनुमानित लागत 4665 करोड़ 87 लाख है। इसे वित्तीय वर्ष 2026-27 में प्रारम्भ किया जाना प्रस्तावित है। सतपुड़ा ताप विद्युत गृह, सारनी में प्रस्तावित 1&660 मेगावाट सुपरक्रिटिकल इकाई की अनुमानित लागत 4616 करोड़ 36 लाख है। इसे वित्तीय वर्ष 2027-28 में प्रारम्भ किया जाना प्रस्तावित है।

पॉवर ट्रांसमिशन कंपनी की प्रमुख उपलब्धियाँ

इस वित्त वर्ष में दिसंबर, 2020 तक 1428 स्किट कि.मी. पारेषण लाइनों का निर्माण तथा अति उच्च दाब उप केंद्रों में 3272 एम.व्ही.ए. की क्षमता वृद्धि की गई है। इससे अब प्रदेश में पारेषण लाइन 38 हजार 678 सर्किट कि.मी. तथा अति उच्च दाब उप केंद्रों की क्षमता 68 हजार 443 एम. व्ही. ए. हो गई है।

स्काडा सिस्टम

प्रदेश की पारेषण प्रणाली के संचालन एवं संघारण में उत्पन्न चुनौतियों का सामना करने के लिए पृथक स्व-चालित नियंत्रण प्रणाली जबलपुर, भोपाल एवं इंदौर में स्थापित कर सभी उच्च दाब उपकेन्द्रों से संबद्ध किया जा चुका है।

इंसुलेटेड एलीवेटेड वर्क प्लेटफार्म सिस्टम

प्रदेश में इंसुलेटेड वर्क प्लेटफार्म एवं स्काफोल्डिंग सिस्टम द्वारा अति उच्च दाब लाइनों का संधारण किया जा रहा है। इमरजेंसी रिस्टोरेशन सिस्टम में पारेषण लाइनों के टावरों के आंधी/तूफान अथवा किसी अन्य कारण से धराशाई/क्षतिग्रस्त होने की स्थिति में कंपनी द्वारा क्षतिग्रस्त टावर के स्थान पर नये टावर लगाने का कार्य किया जाता है।

गैस इन्सुलेटेड सब स्टेशन

प्रदेश की बढ़ती हुई विद्युत मांग को पूरा करने के लिये नवीन उपकेन्द्रों की स्थापना में शहरी क्षेत्र में उचित भूमि की उपलब्धता की समस्या के निराकरण के लिए गैस इंसुलेटेड सब स्टेशन एक सशक्त विकल्प के रूप में स्थापित हो रहे हैं।

मल्टी सर्किट मल्टी वोल्टेज मोनोपोल स्ट्रक्चर

सघन आबादी वाले क्षेत्रों में पारेषण क्षेत्र में अधिकाधिक मार्गाधिकार सुनिश्चित करने हेतु टावर के आधार क्षेत्र को कम करने के लिए ठोस सँकरे आधार वाले मल्टी सर्किट मल्टी वोल्टेज मोनोपोल स्ट्रक्चर का उपयोग किया जा रहा है।

(लेखक प्रदेश के ऊर्जा मंत्री हैं।)

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