Home लेख अमेरिका के ताजा हालातों से सबक लेना होगा

अमेरिका के ताजा हालातों से सबक लेना होगा

59
0
  • दरअसल हमें ही नहीं बल्कि दुनिया के देशों को

देश में कोरोना की दूसरी लहर के हालातों ने जितनी जनहानि की है वह त्रासद स्थिति भुलाए नहीं भूली जा सकती। ऑक्सीजन के लिए तड़पते संक्रमितों और उनके परिजनों को एक अस्पताल से दूसरे अस्पताल जाते, बेड नहीं मिलने के कारण अस्पताल के बाहर ही दम तोड़़ते लोगों के जो हालात सामने रहे हैं वह हालातों को स्वयं बयां करने को काफी हैं।

  • अशोक भाटिया

दरअसल हमें ही नहीं बल्कि दुनिया के देशों को अमेरिका के ताजा हालातों से सबक लेना होगा। भारत व कई देशों में कोरोना संक्रमण के कारण लगी पाबंदियों को हटाने की वकालत करने वालों को अमेरिका के ताजा हालातों से सबक लेना होगा। एक छोटी-सी लापरवाही अमेरिका सहित दुनिया के देशों पर भारी पडऩे लगी है। दरअसल अमेरिका में कोरोना संक्रमण का ग्राफ एक बार फिर बढऩे लगा है और इसका प्रमुख कारण सरकार द्वारा मास्क हटाने के जल्दबाजी के निर्णय को माना जा रहा है।

हालात की गंभीरता को इसी से समझा जा सकता है कि अमेरिका में वैक्सीनेशन की दोनों डोज लगा चुके नागरिकों को भी अब बंद स्थानों पर भी मास्क लगाए रहने के निर्देश दिए गए हैं। दरअसल मास्क हटाने की लापरवाही के चलते अमेरिका में संक्रमण का ग्राफ 145 फीसदी तक बढ़ गया है। 28 जुलाई को अमेरिका संक्रमण के मामलें में एक बार फिर शीर्ष पर आ गया और 61 हजार नए मामले सामने आए हैं। चिंता की बात यह है कि भारत भी संक्रमण के मामले में दूसरे नंबर पर और ब्राजील तीसरे नंबर पर चल रहे हैं। हालांकि कोरोना से मौत के मामले में भारत तीसरे स्थान पर है। पर हालात की गंभीरता को इसी से समझा जाना चाहिए कि केरल और महाराष्ट्र में कोरोना संक्रमितों की संख्या तेजी से बढऩे लगी है।

दरअसल अमेरिका में 14 मई को एक आदेश जारी कर वैक्सीनेशन की दोनों डोज लगा चुके लोगों को सार्वजनिक और इनडोर स्थानों पर भी मास्क न लगाने की छूट दे दी गई। लोगों को मौका मिल गया और फिर कोरोना प्रोटोकाल की पालना नहीं होनी ही थी। इससे कोरोना के नए अवतार डेल्टा का संक्रमण बढऩे लगा और परिणाम सबके सामने हैं। यह सब तो तब है जब अमेरिका में 49 प्रतिशत आबादी को वैक्सीन की दोनों डोज लग चुकी हैं। ऐसा नहीं है कि अमेरिका में ही यह हालात हो, इंग्लैण्ड की स्थिति सबके सामने है। इसी तरह कमोबेश स्थितियां अन्य देशों में सामने आ रही हैं। वैज्ञानिकों द्वारा कोरोना की तीसरी लहर की घोषणा पहले ही की जा चुकी है। यहां तक माना जा रहा है कि यूरोपीय देशों में तो तीसरी लहर ने दस्तक दे दी है। यह तो संपन्न और शिक्षित देशों के हालात हैं। ऐसे में पिछड़े देशों के हालात की कल्पना आसानी से की जा सकती है।

देश में कोरोना की दूसरी लहर के हालातों ने जितनी जनहानि की है वह त्रासद स्थिति भुलाए नहीं भूली जा सकती। ऑक्सीजन के लिए तड़पते संक्रमितों और उनके परिजनों को एक अस्पताल से दूसरे अस्पताल जाते, बेड नहीं मिलने के कारण अस्पताल के बाहर ही दम तोड़़ते लोगों के जो हालात सामने रहे हैं वह हालातों को स्वयं बयां करने को काफी हैं। वेंटिलेटर बेड, ऑक्सीजन बेड के लिए जो मारामारी रही और जिस तरह से कुछ असामाजिक लोगों ने इन हालातों का बेजा फायदा उठाने का प्रयास किया वह मानवता को शर्मसार करने के लिए काफी है। कोरोना के इलाज के लिए आवश्यक दवाओं की जिस तरह से जमाखोरी और कालाबाजारी सामने आई और एक-एक लाख तक में इंजेक्शन ब्लैकियों द्वारा उपलब्ध कराया जाना अपने आप में चिंतनीय है। ऐसे में तीसरी लहर के लिए गंभीर होना जरूरी हो जाता है। खासतौर से तीसरी लहर में बच्चों के अधिक संक्रमित होने की भविष्यवाणी गंभीर हो जाती है।

दरअसल हमें ही नहीं बल्कि दुनिया के देशों को अमेरिका के ताजा हालातों से सबक लेना होगा। हमारे यहां भी छूट का दायरा तेजी से बढ़ रहा है। बाजारों व सार्वजनिक स्थानों पर आवाजाही आम होती जा रही है। हालांकि अर्थव्यवस्था को पटरी पर लाने के लिए देर सबेर हालात सामान्य करना भी आवश्यक है। पर इस सबके साथ कोरोना प्रोटोकाल की पालना भी उतनी ही जरूरी हो जाती है। हमें नहीं भूलना चाहिए कि कोरोना अभी गया नहीं है। इसका असर बरकरार है। इसलिए लोगों को कोरोना प्रोटोकाल की पालना के प्रति गंभीर रहना ही होगा। दो गज की दूरी, मास्क है जरूरी आज भी उतना ही जरूरी है जैसा पहले था।

अब स्टे होम, स्टे सेफ की बात करना तो बेमानी होगा। क्योंकि कोरोना के साथ साथ ही हमें जीना है, आगे बढऩा है, आर्थिक गतिविधियों को संचालित करना है, काम धंधे जारी रखना है। आखिर सरकार की भी एक सीमा है। ऐसे में देश के प्रत्येक नागरिक का दायित्व हो जाता है कि वो आत्म नियंत्रण करना सीखे। यह हमारी सनातन परम्परा भी कहती आ रही है। इसमें नया कुछ भी नहीं है। निज पर शासन फिर अनुशासन आज की आवश्यकता है। मास्क का उपयोग और दो गज की दूरी उतनी ही जरूरी है जितनी कोरोना के पहले दौर में थी। मास्क लगाना, बार-बार हाथ धोना और सेनेटाइजर का उपयोग आने वाले समय में भी जारी रखना होगा।

अपनी सुरक्षा अपने हाथ में है यह हमें समझना होगा। यह देश के प्रत्येक नागरिक की जिम्मेदारी हो जाती है। हालांकि देश में तेजी से वैक्सीनेशन जारी है। पर हमें अमेरिका से सबक लेना होगा, वैक्सीनेशन का मतलब कोरोना व खासतौर से कोरोना के नए अवतारों से मुक्ति नहीं समझना होगा। हालांकि देश में एंटीबॉडीज का प्रतिशत बढ़ रहा है। यह भी सही है कि कोरोना की दोनों डोज लेने के बाद भी संक्रमित हुए हैं और ऐसे संक्रमितों को जीवन मृत्यु से दो चार होते हुए देखा गया है। इसलिए हमें मास्क लगाना, दो गज की दूरी सहित कोरोना प्रोटोकाल की पालना के लिए गंभीर रहना ही होगा। सरकार को भी कोरोना प्रोटोकाल की पालना के प्रति कठोरता बरतनी ही होगी।

(लेखक : स्वतंत्र पत्रकार)

Previous articleसंसदीय अवरोध : विपक्ष का अतिवादी रवैया
Next articleउत्तम फलों को प्रदान करने वाली कामिका एकादशी

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here