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यह सीखें नरेन्द्र मोदी से

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  • अगर कोई एक शब्द है जो नरेन्द्र मोदी के जीवन का चरित्र चित्रण कर सकता है और जो जीवन भर उनके साथ रहा है, वह है ‘राष्ट्र-सेवाÓ। राष्ट्र-निर्माण एवं भारत को दुनिया में अव्वल बनाना ही उनके जीवन का ध्येय है।
  • मोदी का संदेश है कि-हम जीवन से कभी पलायन न करें, जीवन को परिवर्तन दें, क्योंकि पलायन में मनुष्य के दामन पर बुज़दिली का धब्बा लगता है जबकि परिवर्तन में विकास की संभावनाएं सही दिशा और दर्शन खोज लेती है।


ललित गर्ग


एक दीया लाखों दीयों को उजाला बांट सकता है यदि दीए से दीया जलाने का साहसिक प्रयत्न कोई शुरु करे। ऐसे ही अंधेरों से संघर्ष एवं सशक्त राष्ट्र-निर्माण की एक सार्थक मुहिम है श्री नरेन्द्र मोदी। जिसकी सुखद प्रतिध्वनियां अक्सर अनुगुंजित होती रहती हैं। नई खोजों, दक्षता, कौशल विकास, बौद्धिक संपदा की रक्षा, रक्षा क्षेत्र में उत्पादन, श्रेष्ठ का निर्माण-ये और ऐसे अनेकों सपनों को आकार देकर सचमुच मोदीजी नये भारत-सशक्त भारत के निर्माण में जुटे हैं।

ऑस्कर वाइल्ड ने कहा था कि मेरी बहुत साधारण रुचि है कि मैं श्रेष्ठ से संतुष्ट हो जाता हूं। नरेन्द्र मोदी भी भारत को श्रेष्ठता के सर्वोच्च शिखर पर आरूढ़ करने के लिए प्रयासरत है। हम श्रेष्ठ दिखें, हम श्रेष्ठ करें, हम श्रेष्ठ बोलें और श्रेष्ठ सुनें। श्रेष्ठता ही हमारा ध्येय हो। नरेन्द्र मोदी के रूप में एक रोशनी अवतरित होते हुए हमने देखी है। उनके नेतृत्व में हम स्वयं का विकास कर रहे हैं और देश को भी प्रगति की ओर अग्रसर कर रहे हैं। तूफानों से संघर्ष करके भी स्वाभिमानी मोदी अकेले सब कुछ सहते हुए उजाले बांट रहे हैं। मोदी उन लोगों के लिए चुनौती है जो अकर्मण्य, आलसी, निठल्ले, हताश, सत्वहीन बनकर सिर्फ सफलता की ऊंचाइयों के सपने देखते हैं पर अपनी दुर्बलताओं को मिटाकर नयी जीवनशैली की शुरुआत का संकल्प नहीं स्वीकारते।

उनके विचार और स्वप्न विद्यालय की कक्षा में शुरू होकर किसी दफ्तर के माहौल में खत्म हो जाने वाले पारम्परिक जीवन में नहीं बंधे, बल्कि कहीं आगे निकल गए। वे लीक से हटकर चलना चाहते थे और समाज में एक परिवर्तन देखना चाहते थे। समाज और व्यवस्था के हाशिये पर पड़े लोगों के दु:ख-दर्द को खत्म करना चाहते थे। युवावस्था में ही उनका झुकाव त्याग और तप की ओर बढ़ रहा था। उन्होंने नमक, मिर्च, तेल और गुड़ खाना छोड़ दिया था। स्वामी विवेकानंद के कार्यों का गहन अध्ययन उन्हें अध्यात्म की यात्रा की ओर ले गया और उन्होंने भारत को जगतगुरु बनाने के स्वामी विवेकानंद के सपनों को पूरा करने के लिए अपने मिशन की नींव रखी। उनकी विकास यात्रा नरेन्द्र- स्वामी विवेकानन्द से नरेन्द्र यानी नरेन्द्र मोदी तक की प्रेरक यात्रा है।

अगर कोई एक शब्द है जो नरेन्द्र मोदी के जीवन का चरित्र चित्रण कर सकता है और जो जीवन भर उनके साथ रहा है, वह है ‘राष्ट्र-सेवा। राष्ट्र-निर्माण एवं भारत को दुनिया में अव्वल बनाना ही उनके जीवन का ध्येय है। जब ताप्ती नदी ने बाढ़ का कहर ढाया था, नौ वर्ष के नरेन्द्र और उनके मित्रों ने खाने के स्टाल लगाये और राहत कार्यों हेतु धन जुटाने का कार्य किया था। जब पाकिस्तान के साथ युद्ध अपने चरम पर था, उन्होंने रेलवे स्टेशन पर सीमा की ओर जाने और वहां से लौटने वाले जवानों के लिए चाय वितरित करने का कार्य किया। मोदी का संदेश है कि-हम जीवन से कभी पलायन न करें, जीवन को परिवर्तन दें, क्योंकि पलायन में मनुष्य के दामन पर बुज़दिली का धब्बा लगता है जबकि परिवर्तन में विकास की संभावनाएं सही दिशा और दर्शन खोज लेती है।


मोदी-दर्शन कहता है-जो आदमी अभय से जुड़ता है वह अकेले में जीने का साहस करता है। जो अहिंसा को जीता है वह विश्व के साथ मैत्री स्थापित करता है। जो अनेकांत की भाषा में सोचता है वह वैचारिक विरोधों को विराम देता है। मोदी इस बात की परवाह नहीं करते कि लोग क्या कहेंगे, क्योंकि वे अपने कर्म में निष्ठा से प्रयत्नशील है। पुरुषार्थ का परिणाम फिर चाहे कैसा भी क्यों न आए, वे कभी नहीं सोचते।
नरेन्द्र मोदी को अपनी कार्य शक्ति पर कभी संदेह नहीं रहा। उनका आत्मविश्वास उन्हें नित-नवीन रोशनी देता है। यही पुरुषार्थ और निष्ठा उनको सीख और समझ देती है कि सिर्फ कुर्सी पर बैठने वालों का कर्तृत्व ही कामयाबी पर नहीं पहुंचता, सामान्य कागजों पर उतरने वाले आलेख भी इतिहास की विरासत बनते देखे गये हैं।


समय से पहले समय के साथ जीने की तैयारी का दूसरा नाम है मोदी। दुनिया का कोई सिकंदर नहीं होता, वक्त सिकंदर होता है इसलिए जरूरी है कि हम वक्त के साथ कदम से कदम मिलाकर चलना सीखें। आज का जीवन अच्छाई और बुराई का इतना गाढ़ा मिश्रण है कि उसका नीर-क्षीर करना मुश्किल हो गया है। पर अनुपात तो बदले। अच्छाई विजयी स्तर पर आये, वह दबे नहीं। अच्छाई की ओर बढऩा है तो पहले बुराई को रोकना होगा। इस छोटे-से दर्शन वाक्य में मोदी की ‘कल्पना का भारत का आधार छुपा है। और उसका मजबूत होना आवश्यक है। बहुत सारे लोग जितनी मेहनत से नरक में जीते हैं, उससे आधे में वे स्वर्ग में जी सकते हैं।

यही मोदी-जीवन का दर्शन है। इतिहास के दो प्रमुख राजा हुए। दृढ़ मनोबल के अभाव में एक ने पहले ही संघर्ष में घुटने टेक दिये और साला कहलाया। दूसरे ने दृढ़ मनोबल से संकल्पित होकर, घास की रोटी खाकर, जमीन पर सोकर संघर्ष किया और महाराणा प्रताप कहलाया। हमें साला नहीं प्रताप बनना है तभी राष्ट्रीय चरित्र में नैतिकता आयेगी, तभी हम राष्ट्र को वास्तविक प्रगति की ओर अग्रसर कर सकेंगे, जैसा माहौल इनदिनों नरेन्द्र मोदी निर्मित कर रहे है।

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