Home » बढ़ती जनसंख्या को रोकने के लिए कानून जरुरी

बढ़ती जनसंख्या को रोकने के लिए कानून जरुरी

  • प्रो. (डॉ.) राजेंद्र प्रसाद गुप्ता
    भारत के लिए तेजी से बढ़ती जनसंख्या गंभीर समस्या बन गई है। इससे पर्यावरणीय असंतुलन और संसाधनों पर भारी दबाव के कारण प्राकृतिक आपदाओं, गरीबी, भुखमरी, बेरोजगारी जैसी समस्याएं भयावह और विकराल रूप धारण करती जा रही हैं। गत अप्रैल माह में चीन को पछाड़कर भारत विश्व की सबसे बड़ी आबादी वाले देश की रूप में बन गया है। जिस रफ्तार से भारत की जनसंख्या में वृद्धि हो रही है एवं संसाधनों का जिस तीव्रता से दोहन हो रहा ऐसे में जनसंख्या में नंबर एक बनना दुर्भाग्यपूर्ण है। बेतरतीब बढ़ती जनसंख्या से आने वाले समय में संसाधन के समाप्त होने से उत्पन्न परिस्थिति का अनुमान सहज हीं लगाया जा सकता है। ऐसे में निश्चित भूभाग, उपलब्ध संसाधन और जनसंख्या का अनुपात ठीक रखना अपरिहार्य है। सन् 1857 में भारत का क्षेत्रफल 83 लाख वर्ग किमी और जनसंख्या लगभग 35 करोड़ थी। आज भारत का क्षेत्रफल 33 लाख वर्ग किलोमीटर और जनसंख्या लगभग 142.86 करोड़ हो गई है जो चीन से भी ज्यादा है। दुनिया की 17.7 प्रतिशत जनसंख्या भारत में निवास करती है, जबकि भूभाग 2.4 प्रतिशत ही है। ये आंकड़ें चिंताजनक हैं।
    विश्व में सर्वप्रथम भारत ने सन 1952 में परिवार नियोजन कार्यक्रम अपनाकर जनसंख्या नियंत्रण पर कार्य शुरू कर दिया था। प्रथम पंचवर्षीय योजना में इसके लिए 15 लाख की धनराशि का आवंटन किया गया। इसके बाद द्वितीय पंचवर्षीय योजना में 2 करोड़, तृतीय पंचवर्षीय योजना में 24 करोड़, चौथी पंचवर्षीय योजना में 300 करोड़ एवं 1974 से 2014 के बीच की पंचवर्षीय योजनाओं में 2 लाख करोड़ की राशि आवंटित की गई। इसी क्रम में सन 1975 के आपातकाल के दौरान कांग्रेस नेता श्री संजय गाँधी ने परिवार नियोजन के तहत नसबंदी का कार्यक्रम चलाया, लेकिन इसका समय और क्रियान्वयन का तरीका ठीक नहीं था। इसे बलपूर्वक, आतंक और भय दिखाकर क्रियान्वित नहीं किया जाता तो वह प्रयास भी सराहनीय था। भारत सरकार ने ‘हम दो-हमारे दो’ योजना चलाई। मुसलमानों ने कट्टर मानसिकता और जनसंख्या बढ़ाकर वोट की राजनीति में महत्व पाने की खातिर इसका विरोध किया। परिणामस्वरूप एक से अधिक विवाह कर अधिकाधिक बच्चे पैदा कर जनसंख्या बढ़ाकर राष्ट्र के समक्ष गंभीर चुनौती खड़ी हो गई है। यदि यहीं स्थिति बनी रही तो भारत में सन 2050 तक मुस्लिमों की जनसंख्या हिन्दू से भी अधिक होने का अनुमान है। इसके साथ ही भारत मुस्लिमों की जनसंख्या के मामले में विश्व में प्रथम देश बन जाएगा।
    कुछ लोग कुतर्क देते हैं कि जनसंख्या पूंजी है। इससे हम दुनिया की घटती जनसंख्या के लिए सहारा बनेंगें। लेकिन विचारणीय है कि हम सहारा कैसे बनेंगें? क्या दुनिया में हम श्रमिक के रूप में जाने जाएं? इससे विश्वभर में हमारी छवि धूमिल होगी। अफगानिस्तान, बहरीन, इंडोनेशिया, इराक, जॉर्डन, कुवैत आदि 18 इमिग्रेशन चेक रिक्वायर्ड देश हैं, जहाँ सबसे अधिक लोग मजदूरी कर कमाने के उद्देश्य से जाते हैं। जनसंख्या की अधिकता हीं हमें विदेशों में श्रमिक के रूप में धकेल रही है।
    घुसपैठ के माध्यम से भी मुसलमान अपनी जनसंख्या बढ़ाने के कार्य को अंजाम देते हैं। विश्व में 56 इस्लामिक देश होने के बावजूद ये सबसे अधिक भारत में घुसपैठी एवं शरणार्थी हैं। ये किसी भी देश में शरणार्थी बनकर घुसपैठ करते हैं फिर अधिक शादियाँ करके अपनी जनसंख्या बढाते हैं। भारत के 748 जिलों में 114 जिले ऐसे हैं, जहाँ मुस्लिम आबादी 20 प्रतिशत से अधिक है, जिसमें 8 राज्यों के 32 जिलों में इनकी आबादी 50 प्रतिशत से भी अधिक है। सन् 1947 में भारत को जनसंख्या के आधार पर ही दो भागो में बांटा गया। आंकड़ों के अनुसार सन 1951 में मुस्लिम आबादी 3.5 करोड़ (9.80%) जबकि हिन्दू आबादी 30.3 करोड़ (84.10%) थी। 2011 में मुसलमानों की जनसंख्या 17.2 करोड़ (14.23%) जबकि हिंदुओं की जनसंख्या 96.6 करोड़ (79.80%) थी। बढ़ती जनसंख्या के कारण एक बार फिर देश विभाजन जैसी स्थिति उत्पन हो, इससे पहले ही हमें जनसंख्या नियंत्रण हेतु योजना बनानी होगी। सन 2005 में गठित ‘सच्चर समिति’ से प्राप्त आंकड़ों के अनुसार भारत में मुसलमानों की साक्षरता दर बहुत कम है और इनकी आर्थिक स्थिति भी अच्छी नहीं है। इससे पता चलता है कि मुसलमान साक्षरता और अर्थोपार्जन से अधिक जनसंख्या वृद्धि पर ध्यान दे रहे हैं, क्योंकि इसी समिति की एक अन्य रिपोर्ट के अनुसार, मुसलमानों का जन्म दर हिंदुओं की अपेक्षा अधिक है। सन् 2011 में मुसलमानों की वृद्धिदर 24.60 जबकि हिन्दुओ की 16.76 थी। एक धर्म की आबादी तेजी से घटना और एक मजहब का बढ़ना विचारणीय है। इसकी भयावहता को अफगानिस्तान के रूप में पूरी दुनिया ने देखा। मुगलकाल में तलवार के बल पर हिंदुओ का धर्मांतरण किया गया और अब लव जिहाद तथा सोची समझी योजना के तहत जनसंख्या बढ़ाने का षड्यंत्र किया जा रहा है। इससे भारतीय जीवन-मूल्यों, संस्कृति और सभ्यता के नष्ट-भ्रष्ट होने का खतरा उत्पन्न हो गया है। मुसलमान धर्मनिरपेक्ष देशों में कानून का हवाला देते हैं ताकि उन देशों में ये अपनी जनसंख्या विस्तार के द्वारा उनकी लोकतांत्रिक पद्धति को समाप्त कर सकें और शरिया कानून लागू कर उन देशों को इस्लामिक राष्ट्र घोषित कर सकें। पाकिस्तान, बांग्लादेश, अफगानिस्तान इसका स्पष्ट उदाहरण हैं।

Swadesh Bhopal group of newspapers has its editions from Bhopal, Raipur, Bilaspur, Jabalpur and Sagar in madhya pradesh (India). Swadesh.in is news portal and web TV.

@2023 – All Right Reserved. Designed and Developed by Sortd