कलाओं की जीती जागती संस्था थे किशोर दा

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  • डॉ. राघवेंद्र शर्मा
    मिटा दे अपनी हस्ती को अगर कुछ मर्तबा चाहे।
    कि दाना खाक में मिलकर गुले गुलजार होता है।।
    उपरोक्त पंक्तियां भारत के प्रसिद्ध पार्श्व गायक स्वर्गीय किशोर कुमार पर एकदम सार्थक सिद्ध होती हैं। उनके लिए यह भाव हृदय से इसलिए भी प्रस्फुटित होते हैं, क्योंकि किशोर दा ने अपनी गायकी के माध्यम से इतने कलाकारों को आवाज दी जिनका हिसाब लगाना नामुमकिन ना सही मुश्किल तो है ही। उन्होंने जब भी जिस अभिनेता के लिए गाना गाया, उसे इस प्रकार अपनी आवाज दी मानो उक्त गाने को वह फिल्म अभिनेता ही का रहा हो जो सिनेमा के रुपहले पर्दे पर दिखाई देता है। किशोर दा के बारे में आज इसलिए भी लिखने का मन हुआ क्योंकि 4 अगस्त 1929 उनकी जन्म तिथि है और मध्यप्रदेश के लिए उनका महत्व इसलिए और अधिक बढ़ जाता है, क्योंकि किशोर दा का जन्म इसी प्रदेश के खंडवा जिले में हुआ तथा उन्होंने स्नातक तक की पढ़ाई इंदौर में रहकर पूरी की।
    किशोर दा जैसी कलात्मक हस्तियां कम ही पैदा होती हैं। इसलिए भी उनके बारे में लिखना अपनी लेखनी को गरिमा प्रदान करना मात्र है और कुछ नहीं। क्योंकि किशोर दा ना केवल एक बेहतरीन पार्श्वगायक थे, बल्कि वे मंझे हुए संगीतकार, गीतकार, अदाकार, फिल्म निर्माता, निर्देशक और पटकथा लेखक आदि विषयों में भी महारत रखते थे। क्या यह उनकी विलक्षण प्रतिभा नहीं थी, कि उन्होंने भारत की लगभग अधिकांश भाषाओं में फिल्मी तथा गैर फिल्मी गीत गाए और संगीत रसिकों से इस बारे में जमकर वाहवाही बटोरी। इससे भी बड़ी बात और क्या होगी कि किशोर दा जितनी भी कलाओं में महारत रखते थे, उनमें से किसी के लिए भी उन्होंने कभी भी किसी प्रकार का प्रशिक्षण नहीं लिया था। बस उनके दिल में कुछ कर गुजरने का जुनून था, सो वह एक के बाद एक नित नए प्रयोग करते रहे और अंततः भारतीय फिल्म उद्योग में एक ऐसी हस्ती के रूप में स्थापित हो गए, जिसका जिक्र किए बगैर भारतीय फिल्मों की कल्पना किया जाना लगभग असंभव हो चला था। शायद यही वजह रही कि उन्होंने फिल्मी दुनिया में सबसे पहला कदम अभिनेता बनने के लिए रखा था। लेकिन समय के साथ सांचे बदलते गए और उनमें ढलते हुए किशोर दा अंततः एक सफल पार्श्वगायक के रूप में जाने गए। अतः आज हम सब किशोर दा को एक गायक कलाकार के रूप में ज्यादा जानते पहचानते हैं। उनके इसी महती स्वरूप के चलते किशोर दा को लता मंगेशकर पुरस्कार सम्मान से सम्मानित किया जा चुका है।
    यही नहीं, अब तो मध्यप्रदेश शासन स्वर्गीय किशोर कुमार की स्मृति में सम्मान प्रदान करने लगी है और इसके तहत वर्तमान गायकों, संगीतकारों और गीतकारों को शासकीय स्तर पर सम्मानित किया जाने लगा है। कुल मिलाकर आज का दिन संगीत को समर्पित कहा जाए तो अतिशयोक्ति नहीं होगी। पूरे भारतवर्ष में उनकी जन्म तिथि आज अनेक संगीतमय कार्यक्रमों के माध्यम से मनाई जा रही है तो वह केवल इसलिए, क्योंकि किशोर दा ने अपनी कला को ऊंचाइयां प्रदान करने के लिए अपनी स्वयं की मूल आवाज को एक प्रकार से संगीत रूपी वेदी में आहुति बनाकर स्वाहा कर दिया था। जिसके बदले में उन्हें वह महारत हासिल हुई जिसके तहत लोग यही विश्वास करते रहे कि किशोर दा द्वारा गाए हुए गाने उनकी आवाज से अधिक उन कलाकारों की आवाज ज्यादा प्रतीत होते हैं जिनके लिए उन्होंने गीत गए थे। ऐसी विलक्षण प्रतिभा के धनी स्वर्गीय किशोर कुमार को शत-शत नमन और उनके असंख्य प्रशंसकों को उनके जन्मदिन की ढेर सारी बधाइयां।

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