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केवडिय़ा : आनंद की भूमि

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चिन्मयी

गुजरात का केवडिय़ा कुछ साल पूर्व एक छोटा सा कस्बा हुआ करता था। नर्मदा तट के किनारे एक टीला, जो कि नदी के मध्य था। कुछ साधुओं के रहने के कारण इसका नाम साधु बेट पड़ गया। मगर आज उस टीले और केवडिय़ा गांव, दोनों की सूरत बदल गई है ।
भोपाल से कुल 546 किलोमीटर की दूरी पर स्थित इस पर्यटन स्थल पर जाने की योजना अकस्मात बनी और हम लोग अपनी कार से चल दिए। वहां पहुंचने में लगभग 10 घंटे का समय लगा।

रात का समय था। हमने जैसे ही केवडिय़ा में प्रवेश किया, पहली नजर में लगा जैसे कोई उत्सव चल रहा हो। यह स्थान रंग-बिरंगी रोशनी से जगमगा रहा था। ऐसा प्रतीत हो रहा था सारी रोशनी हमारे स्वागत में दमक रही हो। सड़कों पर रंगीन झिलमिलाती बत्तियां मन को अलग ही अनुभूति दे रही थीं। मानो तो किसी चमकीली दुनिया में जा रहे हों, जो जीवन को रंग और रोशनी से भर रही थी।

थोड़ा और आगे बढ़े तो दूधिया रोशनी में सराबोर विशालकाय मूर्ति दिखाई दी। एकदम जीवंत। जैसे अभी बोलने वाली है। मूर्ति की विशालता देखकर मुंह खुला का खुला रह गया। इतनी बड़ी, जो बादलों से बातें कर रही थी। ‘स्टैच्यू ऑफ यूनिटी (हिंदी में कहें तो एकता की प्रतिमा) अपने नाम को सार्थक करती हुई सरदार वल्लभभाई पटेल की मूर्ति। ऊंचाई कुल 182 मीटर। गुजरात में 182 विधानसभा क्षेत्र हैं। इसी आधार पर इस मूर्ति की ऊंचाई तय की गई है।

कुछ और आगे बढ़े तो सरदार सरोवर बांध जिस पर लेजर लाइट के तिरंगे में लिपटा हुए बांध और उस पर देशभक्ति गीतों की धुनों ने दिल में देश प्रेम की आग जगा दी। अत्यंत ही मनोहारी दृश्य था वो। हमने ठहरने के लिए टेंट सिटी आरक्षित की थी। एक कतार से वहां टेंट बने थे, अत्यंत ही आकर्षक व सभी सुविधाओं से लैस।

हमने वहां रात को ठहरने का निर्णय लिया। तड़के तैयार होकर स्टैच्यू ऑफ यूनिटी की ऑनलाइन बुकिंग कर वहां की ओर निकल गए। प्रवेश करते ही देशभक्ति गीतों ने समा बांध रखा था। मूर्ति इतनी विशाल थी कि उसे देखते हुए गर्दन में बल पड़ गए । नर्मदा नदी के बीचों-बीच से लंबा रस्ता स्टेच्यू ऑफ यूनिटी के तरफ जाता हुआ दिखता है। दोनों ओर नदी खलखलाती हुई और सामने वल्लभ भाई पटेल की वह सजीव मूर्ति।

प्रांगण में प्रवेश करने पर सरदार वल्लभभाई पटेल पर बहुत-सा इतिहास मिला। प्रदर्शनी के रूप में छोटी-छोटी फिल्मों के माध्यम से स्वतंत्रता के समय वल्लभ भाई की भूमिका पर बहुत सी जानकारियां मिलीं। वहीं से एक लिफ्ट मूर्ति के अंदर से हृदयस्थल तक जाती थी, वह हमें ऊपर ले गई। जैसे ही लिफ्ट रुकी, हम 400 फीट की ऊंचाई पर थे। अद्भुत दृश्य, बीच में नर्मदा नदी और एक तरफ सतपुड़ा और दूसरी ओर विंध्याचल की पहाडिय़ां, अत्यंत ही मनोहारी दृश्य था।

गाइड ने हमें स्टैच्यू ऑफ यूनिटी कैसे बनी, उसकी पूरी जानकारी दी। इस प्रतिमा को पद्मभूषण पुरस्कार से सम्मानित मूर्तिकार रामजी सुतार ने बनाया है। यह 180 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से चलने वाली हवा में भी स्थिर खड़ी रह सकती है और 6. 5 तीव्रता के भूकंप को भी सहने के लिए सक्षम है। इसको बनाने में कुल लागत 2700 करोड़ की आई और 2013 में इसका निर्माण कार्य चालू हुआ। 31 अक्टूबर 2018 को इसका उद्घाटन हुआ, जो कि सरदार पटेल की 143वीं जयंती थी।

वहां से फिर हम जंगल सफारी की सैर को गए, जो कि एक जूलॉजिकल गार्डन है। उसमें अनेक प्रजातियों के ऐसे अनोखे पशु-पक्षी भी हैं, जो हमें सिर्फ नेशनल ज्योग्राफिक चैनल पर ही देखने को मिलते हैं। वह एक सुखद अनुभव था। जिराफ, स्क्विरल मंकी, जेब्रा, 12 प्रकार के हिरण, शेर, गैंडा, चीता टाइगर कैट्स और ऐसे कई विदेशी जानवर और पक्षी जिनको देखकर आंखें फटी की फटी रह गईं। ऐसे अनोखे जानवर भी हुआ करते हैं।

पक्षी विहार में अंदर प्रवेश करते ही भांति-भांति के पक्षी आसपास से गुजरते हुए मन अत्यंत ही आनंदित हो उठा। उन पक्षियों की चहचहाहट और उड़ान देखकर सफारी का आनंद लेने के बाद हम डाइनो ट्रेल, विश्व वन, बटरफ्लाई गार्डन, कैक्टस गार्डन और अंत में वैली ऑफ फ्लावर्स पहुंचे जिसमें करीब 200 प्रजाति के रंग बिरंगे फूल थे। कई सेल्फी प्वाइंट और इतने मनोरम दृश्य। नदी बहती हुई, नीचे आसपास फूल ही फूल, ढलता हुआ सूरज मानो सारा आसमान सिंदूरी रंग दिया हो। वह शाम और वह आसमान के रंग, मन को नई दिशा में ले जा रहे हैं, जैसे जीवन की हर मुश्किल आसान हो रही हो। नई ऊर्जा, नई शक्ति का मन में संचार हो रहा हो।

शाम के समय स्टेच्यू ऑफ यूनिटी पर लाइट एंड साउंड शो होता है। उसमें मूर्ति के ऊपर लेजर प्रकाश व ध्वनि के माध्यम से वल्लभभाई का जीवन और स्वतंत्रता संग्राम के दृश्य दिखाए जाते हैं। नर्मदा नदी का किनारा और वह लेजर शो, आधुनिकता ने मानो गुजरा हुआ जमाना आंखों के सामने ला दिया। हम भी उस स्वतंत्रता की लड़ाई में शामिल लगे। लेजऱ से नदी और मूर्ति पर बनी आकर्षक आकृतियां मन का मनुहार कर रही थीं। अपने मन को रंगों और नई आशाओं से भरकर हम वहां से ढेर सारी सुनहरी यादों के साथ वापस अपने शहर की ओर लौट गए।

यात्रा जीवन को एक नई ताजगी देने के साथ नया उद्देश्य भी देती है, नए पहलू से साक्षात करवाती है। जीवन में हम उस मुश्किल को भी एक नए नजरिए से देखने लगते हैं। और वह नई सोच ही जीवन को और सरल व सुगम बनाती हैं।

केवडिय़ा में प्रवेश के लिए आपको एंट्री टिकट लेना अनिवार्य है उसके बाद अलग-अलग स्थानों के लिए अलग एंट्री टिकट होते हैं, जो कि ऑनलाइन माध्यम से ही बुक किए जाते हैं। केवडिय़ा मंगलवार से लेकर रविवार तक सुबह 8:00 बजे से शाम 6:00 बजे तक खुला रहता है। यात्रा जीवन को एक नया मोड़, एक नया उद्देश्य देती है, एक नए पहलू से रूबरू करवाती है कोई भी मुश्किल हो जीवन में हम उस मुश्किल को भी एक नए नजरिए से देखने लगते हैं और वह नहीं सोच ही जीवन को और सरल और सुगम बना देती हैं।

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