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अन्तर्राष्ट्रीय युवा दिवस आज : युवाओं की आंखों में स्वप्न ही नहीं, बल्कि सच भी

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ललित गर्ग, वरिष्ठ पत्रकार
lalitgarg11@gmail.com

सारी दुनिया प्रतिवर्ष 12 अगस्त को अन्तर्राष्ट्रीय युवा दिवस मनाती है। सन् 2000 में अंतर्राष्ट्रीय युवा दिवस का आयोजन आरम्भ किया गया था। यह दिवस मनाने का मतलब है कि पूरी दुनिया की सरकारें युवा के मुद्दों और उनकी बातों पर ध्यान आकर्षित करे। न केवल सरकारें बल्कि आम-जनजीवन में भी युवकों की स्थिति, उनके सपने, उनका जीवन लक्ष्य आदि पर चर्चाएं हो। युवाओं की सामाजिक, आर्थिक, सांस्कृतिक और राजनीतिक स्तर पर भागीदारी सुनिश्चित की जाए। इन्हीं मूलभूत बातों एवं युवा संभावनाओं को नये पंख देने के लिये यह दिवस मनाया जाता है। जैसाकि जीनएंजिलों ने कहा भी है कि यौवन! तेरी आशाएं कितनी प्रेरक होती हैं।

सूर्यमुखी पुष्पों की भांति वे सदा आलोक-पक्ष की ओर उन्मुख रहती हैं। संयुक्त राष्ट्र ने अन्तर्राष्ट्रीय युवा दिवस की पृष्ठभूमि पर 1977 में काम करना प्रारम्भ किया था। चार चरणों की महत्त्वपूर्ण बैठक के बाद 1985 में संयुक्त राष्ट्र ने पहले ‘अंतर्राष्ट्रीय युवा पर्व की घोषणा की। दस वर्ष पूरे होने पर संयुक्त राष्ट्र ने युवाओं की स्थिति सुधारने के लिए वैश्विक कार्यक्रम की संकल्पना की। जिसमें शिक्षा, रोजगार, भूख, गरीबी, स्वास्थ्य, पर्यावरण, नशा मुक्ति, बाल अपराध, अवकाश के दौरान की गई गतिविधियाँ, सूचना और संचार प्रौद्योगिकी, एड्स, युवा से जुड़े विवाद और पीढ़ीगत सम्बन्ध आदि पंद्रह सूत्रीय समस्याओं को केंद्र में रखा गया।

इसके बाद सन् 2000 में ‘अन्तर्राष्ट्रीय युवा दिवस पहली बार मनाया गया, जिसकी तिथि 12 अगस्त घोषित की गई। इसका उद्देश्य युवाओं में गुणवत्तापूर्ण विकास करना और उन्हें सामाजिक एवं राष्ट्रीय सहभागिता के लिए तैयार करना है। हालांकि यह एक कैथोलिक मान्यता के अंतर्गत शुरू किया गया था, लेकिन वर्तमान परिदृश्य और वैश्विक रूप में युवाओं की बढ़ती भागीदारी से यह सभी सीमाओं को लाँघकर विश्वभर में मनाया जाने लगा।

युवा किसी भी देश का वर्तमान और भविष्य हैं। वो देश की नींव हैं, जिस पर देश की प्रगति और विकास निर्भर करता है। लेकिन आज भी बहुत से ऐसे विकसित और विकासशील राष्ट्र हैं, जहाँ नौजवान ऊर्जा व्यर्थ हो रही है। कई देशों में शिक्षा के लिए जरूरी आधारभूत संरचना की कमी है तो कहीं प्रछन्न बेरोजगारी जैसे हालात हैं।

इन स्थितियों के बावजूद युवाओं को एक उन्नत एवं आदर्श जीवन की ओर अग्रसर करना वर्तमान की सबसे बड़ी जरूरत है। युवा सपनों को आकार देने का अर्थ है सम्पूर्ण मानव जाति के उन्नत भविष्य का निर्माण। यह सच है कि हर दिन के साथ जीवन का एक नया लिफाफा खुलता है, नए अस्तित्व के साथ, नए अर्थ की शुरूआत के साथ, नयी जीवन दिशाओं के साथ। हर नई आंख देखती है इस संसार को अपनी ताजगी भरी नजरों से। इनमें जो सपने उगते हैं इन्हीं में नये समाज की, नयी आदमी की नींव रखी जाती है।

विचारों के नभ पर कल्पना के इन्द्रधनुष टांगने मात्र से कुछ होने वाला नहीं है, बेहतर जिंदगी जीने के लिए मनुष्य को संघर्ष आमंत्रित करना होगा। वह संघर्ष होगा विश्व के सार्वभौम मूल्यों और मानदंडों को बदलने के लिए। सत्ता, संपदा, धर्म और जाति के आधार पर मनुष्य का जो मूल्यांकन हो रहा है मानव जाति के हित में नहीं है। दूसरा भी तो कोई पैमाना होगा, मनुष्य के अंकन का, पर उसे काम में नहीं लिया जा रहा है। क्योंकि उसमें अहं को पोषण देने की सुविधा नहीं है। क्योंकि वह रास्ता जोखिम भरा है। क्योंकि उस रास्तें में व्यक्तिगत स्वार्थ और व्यामोह की सुरक्षा नहीं है।

युवा पीढ़ी पर यह दायित्व है कि संघर्ष को आमंत्रित करे, मूल्यांकन का पैमाना बदले, अहं को तोड़े, जोखिम का स्वागत करे, स्वार्थ और व्यामोह से ऊपर उठे। युवा दिवस मनाने का मतलब है-कोई ऐसा सकारात्मक कार्यक्रम हाथ में लेना होगा, जिसमें निर्माण की प्रक्रिया अपनी गति से चलती रहे। विशेषत: राजनीति में युवकों की सकारात्मक एवं सक्रिय भागीदारी को सुनिश्चित करना होगा। स्वामी विवेकानन्द ने भारत के नवनिर्माण के लिये मात्र सौ युवकों की अपेक्षा की थी। क्योंकि वे जानते थे कि युवा ‘विजनरी होते हैं और उनका विजन दूरगामी एवं बुनियादी होता है।

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