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‘मन की बात’ के माध्यम से लोगों को स्वस्थ भारत की प्रेरणा

  • डॉ.विनोद के.पॉल
    स्वास्थ्य और विकास आपस में जुड़े हुए हैं – केवल स्वस्थ नागरिक ही किसी राष्ट्र के समग्र विकास में योगदान कर सकते हैं। प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में हमारी सरकार इस आदर्श के लिए प्रतिबद्ध है और भारत की स्वास्थ्य सेवा प्रणाली को भविष्य के लिए तैयार करने के लिए अथक प्रयास किया है। प्रधानमंत्री हमारे लोगों के स्वास्थ्य में लगातार सुधार पर अत्यधिक जोर देते हैं और उन्होंने भारत की स्वास्थ्य सेवाओं में सुधार के लिए प्राथमिकता से संचालित कार्रवाई सुनिश्चित की है। सरकार ने स्वास्थ्य सेवा क्षेत्र को मजबूत करने के लिए गहरे संरचनात्मक और निरंतर सुधार किए हैं और देश भर में सैचुरेशन लेवल का कवरेज प्राप्त करने के लिए अनुकूल रणनीतियों को भी लागू किया है।
    सरकार के सकारात्मक दृष्टिकोण से स्वास्थ्य सेवा के क्षेत्र में आमूल –चूल परिवर्तन हुआ है। आज, केवल बीमारों का इलाज करने के बजाय हेल्थ एंड वैलनेस दोनों पर ध्यान दिया जाता है। भारत के हेल्थकेयर इकोसिस्टम को बढ़ावा देने के लिए सरकार द्वारा कई योजनाएं शुरू की गई हैं। सरकार द्वारा वित्तपोषित दुनिया का सबसे बड़ा स्वास्थ्य कार्यक्रम-आयुष्मान भारत (एबी-पीएमजेएवाई), प्रधानमंत्री आयुष्मान भारत हेल्थ इंफ्रास्ट्रक्चर मिशन (पीएम-एबीएचआईएम), आयुष्मान भारत डिजिटल मिशन (एबीडीएम), एक मजबूत राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (एनएचएम), प्रधानमंत्री सुरक्षित मातृत्व अभियान (पीएमएसएमए), ई-संजीवनी ओपीडी और प्रधानमंत्री भारतीय जनऔषधि परियोजना (पीएमबीजेपी), ऐसी कुछ पहलें हैं, जो सरकार ने स्वास्थ्य क्षेत्र में चौतरफा परिवर्तन सुनिश्चित करने के लिए की हैं।
    2014 से (387 से 655 तक) मेडिकल कॉलेजों में 69 प्रतिशत की वृद्धि हुई है। प्रस्तावित 22 नए एम्स में से 19 चालू हैं। 35 करोड़ से अधिक नागरिकों का डिजिटल स्वास्थ्य खाता (आभा, एबीएचए) बनाया गया है। टेलीमेडिसिन के तहत ई-संजीवनी को मुख्यधारा ने अपनाया है और अब तक 11 करोड़ रोगियों ने इस सेवा का लाभ उठाया है। आयुष्मान भारत हेल्थ एंड वेलनेस सेंटर (एचडब्ल्यूसी) पहल के तहत, 156,000 उप-केंद्रों (एससी) और प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों (पीएचसी) में बदलाव आया है। एक नया मध्यस्तरीय स्वास्थ्य पेशेवर, सामुदायिक स्वास्थ्य अधिकारी तैनात किया गया है।उप केन्द्रों में एचडब्ल्यूसी को 105 दवाएं और 14 डायग्नोस्टिक परीक्षण प्रदान करना अनिवार्य है, और पीएचसी में वे 172 मुफ्त दवाएं और 63 मुफ्त डायग्नोस्टिक परीक्षण प्रदान करते हैं।
    सभी सरकारी योजनाओं का मूल्य केवल उनके अंतिम-मील तक वितरण के माध्यम से महसूस किया जाता है। इसके लिए सक्रिय स्वामित्व और लोगों की भागीदारी की आवश्यकता है। इस संबंध में, प्रधानमंत्री ने ‘मन की बात’ कार्यक्रम के माध्यम से जनता से जुड़ने के साधन के रूप में रेडियो की क्षमता का बेहतर उपयोग किया है, जिसका वर्षों से एक स्वस्थ राष्ट्र के निर्माण में व्यापक प्रभाव पड़ा है।
    इस कार्यक्रम के माध्यम से उन्होंने बार-बार लोगों के बीच अच्छे स्वास्थ्य के विचार का आह्वान किया है। प्रधानमंत्री श्रीमोदी का मानना है कि “स्वास्थ्य का अर्थ केवल रोगों से मुक्ति नहीं है। स्वस्थ जीवन हर व्यक्ति का अधिकार है।” उन्होंने विभिन्न सरकारी स्वास्थ्य योजनाओं के बारे में जागरूकता फैलाने के लिए ‘मन की बात’ का व्यापक रूप से उपयोग किया है और यह भीबतायाहैकिकिसप्रकारउन्होंनेदेशभरमें, विशेष रूप से ग्रामीण क्षेत्रों में करोड़ों लोगों को लाभान्वित किया है।
    मुझे याद है कि प्रधानमंत्री ने ‘मनकीबात’ पर आयुष्मान भारत के लाभार्थियों के साथ बातचीत की थी, जिन्होंने गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवा को किफायती बनाने के लिए आभार व्यक्त किया था। इसतरह की बातचीत कल्याणकारीयोजना के लाभ प्राप्त करने में संभावित लाभार्थियों के विश्वास को बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है, जिससे भारत केसार्वभौमिक स्वास्थ्य कवरेज (यूएचसी) को प्राप्त करने के सपने को बढ़ावा मिलता है। स्टेंटइम्प्लांटेशन और घुटने की सर्जरी की लागत कम करने और लगभग 10 करोड़ परिवारों को इलाज के लिए 5 लाख रुपये के बीमा के प्रावधान की प्रधानमंत्री की घोषणा दूर-दूर तक सुनाई दी। आज, आयुष्मान भारत योजना ने 4.8 करोड़ से अधिक व्यक्तियों के लिए स्वास्थ्य सेवाओं तक पहुंच की सुविधा प्रदान की है।
    जब केंद्र सरकार ने 2018 में ‘पोषणअभियान’ शुरू किया, तो प्रधानमंत्री ने बच्चों और माताओं के बीच पोषण संबंधी संकेतकों में सुधार के लिए जनआंदोलन का आह्वान किया। तबसे, कई स्वयं सहायता समूहों और आंगनवाड़ी केंद्रों ने देश के बच्चों को कुपोषण और स्टंटिंग से मुक्त करने के लिए अद्वितीय और लक्षित समाधान खोजे हैं। जब असम से ‘प्रोजेक्ट संपूर्ण’ और मध्यप्रदेश से ‘पोषनमटका’ जैसी पहलों को लेकर ‘मनकीबात’ में चर्चा की गई तो कई अन्य राज्यों के संगठनों ने अपने क्षेत्र में इसीतरह के मॉडल को दोहराया। इतना ही नहीं, इसतरह की मान्यता ने और लोगों का मनोबल बढ़ाकर उन्हें मौजूदा आंदोलनों मेंला दिया।
    भारत में पारंपरिक चिकित्सा का एक लंबा इतिहास है, जो हजारों साल पहले का है। सरकार ने रोकथाम, कल्याण और उपचार में आयुष प्रणालियों के उपयोग को बढ़ावा देने के लिए कई कदम उठाए हैं। प्रधानमंत्री के ‘मनकीबात’ का संवाद हमारी पारंपरिक स्वास्थ्य प्रणालियों के बारे में देशवासियों के बीच अभूतपूर्व जागरूकता पैदा करने में सहायक रहा है। इसने समग्र स्वास्थ्य सेवा की बढ़ती मांग और आयुष उत्पादों के उपयोग में भारी वृद्धि में योगदान दिया है। स्वस्थ जीवन के बड़े उद्देश्य के लिए पारंपरिक और आधुनिक प्रणालियों के बीच तालमेल बैठाने के लिए अब मांग बढ़ रही है।
    हाल ही में ‘मनकीबात’ के एक एपिसोड में, प्रधानमंत्री ने अंगप्रत्यारोपण की बात की। उन्होंने नागरिकों को अंगप्रत्यारोपण को बढ़ावा देने के लिए और अधिक अंगदान करने के लिए प्रेरित किया। दो परिवारों के साथ उनकी मार्मिक बातचीत, जिनके परिजनों ने दूसरों को जीवन देने के लिए अंगदान किया, मेरी आंखों में आंसू आग ए। लोगों को प्रधानमंत्री में एक दोस्त और एकमार्गदर्शक आवाज मिली है और जब वह ‘मनकीबात’ के माध्यम से स्वास्थ्य संवर्धन और देखभाल की बात करते हैं, तो राष्ट्रवास्तव में सुनता है और कार्य करता है।

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