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अंतर्मन का अंतर्द्वंद्व

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  • पंकज चतुर्वेदी

वर्तमान भौतिकवादी युग में सबसे बड़ा द्वंद एव अंतर्द्वंद्व इस बात को लेकर है कि सामान्य जन स्वयं से स्वयं के संपर्क को लेकर गंभीर नहीं है। पढऩे और सुनने में यह विषय संभवत: उतना महत्वपूर्ण नहीं लगता जितना यह है। किंतु जीवन में पर प्रति पल, प्रति पथ एवं प्रति पग पर इसका विशेष महत्व है।
हम कितनी सशक्त का के साथ स्वयं के संपर्क में है। यह वर्तमान काल में अब सतत विचारणीय विषय बन चुका है। अंग्रेजी में इसके लिए उपयुक्त शब्द सेल्फ कनेक्शन है।

यह जो हमारा आत्म संपर्क है। यही सफलता का सबसे सशक्त सेतु भी है।जीवन में जो भी लोग आज स्व संपर्क की संपर्क की कला में पारंगत होते हैं। उनके लिए सफलता सरल होती है। ऐसा इसलिए होता है कि उनके जीवन में आने वाली चुनौतियों को वह बहुत आसानी के साथ पार कर लेते हैं। आशय स्पष्ट है कि संघर्ष, उतार-चढ़ाव, कठिनाई ,चुनौतियां सबके साथ हैं। किंतु जिनका कौशल उन्नयन आत्म संवाद के विषय में है वे इन सब चुनौतियों से पार पा। बहुत सरलता से आगे बढ़ जाते हैं। आज के दौर में जहां संचार माध्यमों की बहुतायत है।

दिन प्रतिदिन संचार माध्यमों के नित नए अविष्कारों से दुनिया सिमट कर हमारे हाथों और उंगलियों में समा चुकी है। ऐसे में हम सब मोबाइल इंटरनेट, टीवी इत्यादि के माध्यम से दुनिया भर से संपर्क में है। अर्थात ग्लोबल इरा में ग्लोबली तो कनेक्टेड है लेकिन इंटरनली डिस्कनेक्टेड है। हमारा इंटर्नल पर्सनल कनेक्शन या सेल्फ कनेक्शन कमजोर है। यानी हमको हमारी इनर इंजीनियरिंग पर आंतरिक यांत्रिकी पर विशेष ध्यान देना पड़ेगा। यह आंतरिक यांत्रिकी प्रकृति और विज्ञान के सिद्धांतों के आधार पर रचित है। जहां भी प्रकृति और विज्ञान के सिद्धांत आते हैं। वह शाश्वत सत्य होता है।

हम माने या ना माने यह अलग विषय है। जब तक मन-मस्तिष्क का समन्वय व संवाद नहीं होगा तब तक यह पता ही नहीं होगा कि हम जिस पथ पर अग्रसर है। वहां हम संयोग से आ गए हैं या कोई विशिष्ट निर्णय लेकर आए हैं। यही कारण है कि इस प्रश्न को लेकर भ्रम और वास्तविकता के द्वंद्व सतत रूप से सबके जीवन में बने रहते हैं। एक बहुत सशक्त उदाहरण है हम सब जानते हैं कि सूर्य अक्षय ऊर्जा का स्त्रोत है। जो प्रकाश और ऊर्जा से परिपूर्ण है। यदि हमारा मुख सूर्य की ओर है तो हमको प्रकाश ऊर्जा सब कुछ स्पष्ट नजर आएगा। लेकिन यदि हम अपनी ही दिशा को बदल कर सूर्य की ओर पीठ कर ले तो फिर हम को प्रकाश और ऊर्जा के स्थान पर प्रतिबिंब नजर आएगा। यह सब आत्म संपर्क की कमी के कारण होता है। हम सब लोग आत्म संपर्क के अभाव में गलत दिशा में देखते हैं। फिर सकारात्मक चित्रण के स्थान पर प्रतिबिंब के आधार पर सोचते हैं कि यह तो आभासी है यह वास्तविक नहीं हो सकता।

स्पष्ट है कि यह सब कुछ हमारी दिशा निर्धारण के कारण हुआ है। जीवन में नकारात्मकता का आधिक्य होने का कारण भी सिर्फ डिस्कनेक्शन ही है। सेल्फ डिस्कनेक्शन है ही नहीँ। जब भी हम अपने आप से संपर्क विहीन हो जाएंगे तो स्वता ही संवाद विहीन भी हो जाएंगे। फिर बहुत आसान है कि हम सरलता से नकारात्मकता के प्रभाव में स्वयं को पाएं। यदि हम स्वयं से सशक्त संपर्क में है तो फिर किसी भी प्रकार की विषमता और चुनौती आपको नकारात्मक नहीं बना सकती।

हम सब को इस बात पर विशेष ध्यान देना है कि हमारी सफलता और असफलता के लिए यदि कोई बांध और बाधा दोनों ही है तो वह हमारे नकारात्मक विचार है। आपक आत्म संपर्क के बाधित होने के या टूटने के कारण हम को नकारात्मक रूप से प्रभावित कर रहे हैं। मेटा फिजिक्स जो एक विज्ञान की शाखा है। वह बहुत स्पष्ट तौर पर इस बात को स्थापित करती है कि हमारे शरीर में जो भी कुछ है वह मूलता ऊर्जा के विभिन्न प्रकार हैं। ऊर्जा के बारे में हम सब जानते हैं कि ऊर्जा को ना तो निर्मित किया जा सकता है ना ही नष्ट किया जा सकता है। उसका स्वरूप परिवर्तित किया जा सकता है। विद्युत ऊर्जा को हम सब ने देखा है कि कितनी सरलता से यांत्रिक ऊर्जा में परिवर्तित करके यंत्रों को चलाया जाता है।

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