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प्रांतवाद की राजनीति के निहितार्थ

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  • प्रो. रसाल सिंह , जम्मू केन्द्रीय विश्वविद्यालय में अधिष्ठाता, छात्र कल्याण
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एकबार फिर शिवसेना सुप्रीमो और महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे ने ‘पर-प्रांतियों को चिह्नित करने और उनपर निगरानी रखने की बात कहकर प्रांतवाद की राजनीति को हवा दी है। पिछले दिनों मुंबई के साकीनाका क्षेत्र में एक बत्तीस वर्षीय महिला के साथ ऑटो में वीभत्स बलात्कार किया गया। इस जघन्य वारदात के आरोपी के रूप में जौनपुर, उत्तरप्रदेश के एक ऑटोचालक की पहचान हुई है। आरोपित की पहचान और पकड़ के बाद शिवसेना के मुखपत्र ‘सामना में संजय राउत ने अपराध के ‘जौनपुर पैटर्न का उल्लेख किया और लिखा कि उससे मुंबई में गन्दगी फैल रही है।

इसी नृशंस घटना के सन्दर्भ में गृहविभाग के आला अधिकारियों और पुलिस महानिदेशक के साथ बैठक में उद्धव ठाकरे ने मुम्बई की कानून-व्यवस्था की बदहाली के लिए पर-प्रांतियों को जिम्मेदार मानते हुए उनकी ‘ट्रैकिंग और पंजीयन का निर्देश दिया। क्षेत्रीय भावनाओं को भड़काना और बाहरी लोगों के खि़लाफ़ लिखना-बोलना शिवसेना या उसके नेताओं के लिए नयी बात नहीं है। परन्तु प्रदेश के संवैधानिक मुखिया द्वारा इसप्रकार का बयान देना चिंताजनक और अफ़सोसनाक है। यह विडम्बनापूर्ण ही है कि वे उत्तर भारतियों की ट्रैकिंग करके मुंबई को अपराधमुक्त और मुम्बईवासियों को सुरक्षित करना चाहते हैं।

मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे क्या मुंबई और महाराष्ट्र में वीजा/पासपोर्ट और परमिट की व्यवस्था शुरू करना चाहते हैं? क्या वे भौगोलिक आधार पर चरित्र प्रमाण-पत्र जारी करते हुए क्षेत्र विशेष के लोगों को अपराधी घोषित करना चाहते हैं? क्या वे देश के अन्य राज्यों और शहरों में महाराष्ट्रवासियों के लिए इसीप्रकार की व्यवस्था चाहते हैं? क्या वे मराठा श्रेष्ठता-ग्रंथि के शिकार हैं और अन्य देशवासियों को हीनतर मानते हैं? क्या उन्होंने राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो के आँकड़ों का तुलनात्मक अध्ययन किया है? क्या वे इस बात से बेखबर हैं कि मुंबई अंडरवर्ल्ड के संचालक और सरगना कौन हैं? क्या वे इस बात से भी अनजान हैं कि मुंबई के उद्योग-धंधों और कारोबार की रीढ़ कौन हैं? क्या वे यह भी नहीं जानते कि प्रवासियों के खून-पसीने के बिना मुंबई की गगनचुम्बी इमारतों की चमक-दमक और चहल-पहल संभव नहीं है? यह सब जानते-समझते हुए भी उन्होंने जो आपत्तिजनक बयान दिया है, उसकी ख़ास वजह है। यह खास वजह अगले साल की शुरुआत में होने वाला बृहन्मुंबई महानगर पालिका का चुनाव है।

दरअसल, अपराध-शास्त्री संजय राउत द्वारा दी गयी संज्ञा ‘जौनपुर पैटर्न को समझने से पहले राजनीति के ‘शिवसेना पैटर्न को समझना भी जरूरी है। शिवसेना संकीर्ण अस्मितावादी और क्षेत्रीय भावनाओं को भड़काने वाला सबसे पुराना और किंचित पहला राजनीतिक संगठन है। इस आपराधिक घटना को स्थानीय बनाम बाहरी और मराठी बनाम प्रवासी का रंग जानबूझकर दिया जा रहा है। यह वोटबैंक की राजनीति के तहत किया गया है।

कुछ ही महीने बाद होने वाले बृहन्मुंबई महानगर पालिका के चुनाव के मद्देनजऱ मराठा वोटों का ध्रुवीकरण इसके केंद्र में है। उल्लेखनीय है कि पिछले चुनाव में भारतीय जनता पार्टी और शिवसेना में काँटे की टक्कर हुई थी और शिवसेना ने बहुत मामूली अंतर से बृहन्मुंबई महानगर पालिका पर कब्ज़ा किया था। 40 हजार करोड़ से अधिक बजट वाली बी एम सी देश की ही नहीं, दुनिया की सबसे मालदार और दुधारू संस्था है। बी एम सी का वार्षिक बजट देश के आधे राज्यों से अधिक है। यह शिवसेना की शक्ति का मूल आधार भी है। मुंबई देश की आर्थिक राजधानी भी है। शिवसेना किसी भी कीमत पर इसे नहीं खोना चाहती। मुंबई में काफी बड़ी संख्या कोंकड़ी लोगों की भी है।

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