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मानवाधिकारों से वंचित बांग्लादेश के हिन्दू

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बांग्लादेश में केवल पूजा पांडालों को ही नहीं तोड़ा गया बल्कि मंदिरों पर भी हमला किया गया। हिन्दू घरों को तहस-नहस किया गया और उन पर सुनियोजित हमले हुए। पवित्र धार्मिक यज्ञ है। विवाह में दो प्राणी (वर-वधू) अपने अलग अस्तित्वों को समाप्त कर, एक सम्मिलित इकाई का निर्माण करते हैं।

  • डॉ. समन्वय नंद
    samanwaya5@gmail.com

पिछले दिनों सोशल मीडिया में ‘लेटर्स फ्रम बांग्लादेश नामक ट्विटर हैंडल से एक वीडियो साझा किया गया था जो काफी वायरल हो रहा है । इस वीडियो में एक हिन्दू ब्राह्मण पंडाल में मां दुर्गा की पूजा करता हुआ दिख रहे है। लेकिन सामने जो मां दुर्गा की मूर्ति है उसे तोड़ दिया गया है। उसी मूर्ति के सामने बैठकर ब्राह्मण दुर्गा पूजा की आवश्यक रीति नीति को संपन्न कर रहा है।

वास्तव में सोशल मीडिया में प्रसारित यह पोस्ट व वीडियो बांग्लादेश में हिन्दुओं की स्थिति को दर्शाती है। एक इस्लामिक देश में हिन्दुओं की स्थिति को समझने के लिए यह पोस्ट व वीडियो पर्याप्त है। बांग्लादेश में केवल पूजा पंडालों को ही नहीं तोड़ा गया है, मंदिरों पर भी हमला किया गया है। हिन्दू घरों को फूंक दिया गया है। नोआखाली से लेकर कोक्स बाजार, कोमिला, फेणी आदि अनेक स्थानों से हिन्दुओं पर सुनियोजित हमले किये गये हैं। अनेक हिन्दुओं की हत्या कर दी गई है। हिंदू महिलाओं के साथ दुष्कर्म किया गया है।

हिंसा का सिलसिला लगातार कई दिनों तक बिना रुके चलता रहा। दशहरे के बाद भी हिंसा जारी रहने की सूचनाएं मिल रही हैं। दशहरे के दिन इस्लामी कट्टरपंथियों ने नोआखाली के प्रसिद्ध इस्कान मंदिर पर हमला किया। इस्कान मंदिर से जुड़े लोगों का कहना है कि शुक्रवार की नमाज के बाद पांच सौ से अधिक लोगों की भीड़ ने अचानक आकर हमला बोल दिया। इस्कान के साधु व भक्तों ने इसका वीरता के साथ प्रतिरोध किया। एक भक्त पार्थ दास का शव अगले दिन पास के तालाब से मिला।

काफी नृशंससा के साथ उनकी हत्या की गई थी। उनके शरीर के कई हिस्से काट दिये गये थे। ऐसा लगा मानो नोआखाली में 1946 के हिंसा दोहराया जा रहा हो। बांग्लादेश की राजधानी ढाका से प्रकाशित होने वाली प्रमुख समाचार पत्र डेली स्टार ने एक चार साल के बच्चे आदित्य शाह की खबर प्रकाशित की है। इस रिपोर्ट में कहा गया है कि चार साल का मासूम आदित्य अपने मां से बार-बार पूछ रहा है , मां, पिताजी कब आयेंगे। आदित्य के पिताजी जतन शाह दशहरे के दिन मंदिर में गये थे।

जिहादियों ने उन्हें पीट-पीट कर मार डाला था। ये केवल एक आदित्य की बात नहीं है या फिर एक लकी की बात नहीं है । हाल ही में हुए बांग्लादेश में हुए हिन्दू विरोधी हिंसा में ऐसे अनेक आदित्य अनाथ हो गये और ऐसे अनेक लकी हैं जो विधवा हो गई है । लेकिन उन्हें न्याय देने या फिर उनकी सुध लेने वाला कोई नहीं है ।

बांग्लादेश में हिन्दुओं पर हमला कई नई बात नहीं है । बांग्लादेश को हिन्दू विहीन करने के लिए इस्लामी शक्तियां इस तरह के काम लगातार करते आ रहा हैं। इसके कारण बांग्लादेश में हिन्दू आबादी केवल आठ प्रतिशत ही बची है।

इस मामले को लेकर इस्कान ने संयुक्त राष्ट्र को पत्र लिख कर अंतर्राष्ट्रीय पर्यवेक्षकों की टीम भेजने का अनुरोध किया था। बांग्लादेश के सच को पूरे विश्व के सामने लाने वाले ट्विटर हैंडलों को बंद कर दिया गया। फिलिस्तीन में सामान्य कुछ होने पर तख्तियां लेकर सड़क पर आ जाने वाले लोग भी बांग्लादेश के हिन्दुओं अत्याचार पर मौन है। बांग्ला अस्मिता की बात करने वाली ममता भी चुप हैं।

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