हर घर तिरंगा अभियान

Share on facebook
Facebook
Share on twitter
Twitter
Share on linkedin
LinkedIn
Share on pinterest
Pinterest
Share on pocket
Pocket
Share on whatsapp
WhatsApp
  • प्रोफेसर रवीन्द्र नाथ तिवारी
    स्वतंत्र राष्ट्र का अपना ध्वज उसकी सार्वभौमिक एवं शाश्वत पहचान होती है। भारतीय राष्ट्रीय ध्वज कई बदलावों से गुजरा है तथा पिंगली वेंकय्या को इसके मूल डिजाइन के लिए श्रेय दिया जाता है। वर्तमान तिरंगा के अस्तित्व में आने से पहले हमारे राष्ट्रीय ध्वज के अन्य संस्करण भी थे। सिस्टर निवेदिता ने संभवतः भारतीय ध्वज का पहला डिजाइन तैयार किया था। स्वामी विवेकानंद के इस आयरिश शिष्या ने 1904 में पीले और लाल रंग का उपयोग करते हुए एक ध्वज को केंद्र में ’वज्र’ और ध्वज के दोनों ओर बांग्ला में लिखे गए ’वंदे मातरम’ शब्दों के साथ डिजाइन किया था। लाल रंग स्वतंत्रता संग्राम का प्रतीक था, पीला रंग जीत का प्रतीक था। वज्र भगवान इंद्र के हथियार का चित्रण था जो शक्ति का प्रतीक था। 7 अगस्त, 1906 को कोलकाता के पारसी बागान (वर्तमान प्रसिद्ध गिरीश पार्क) में राष्ट्रीय ध्वज फहराया गया। यह एक तिरंगा झंडा था जिसमें तीन बराबर धारियां थीं हरी (ऊपर), पीली (मध्य में) और सबसे नीचे लाल। हरे पैनल में 8 कमल के फूल थे, जो आधे खुले हुए थे और पीले हिस्से में देवनागिरी लिपि में वंदे मातरम शब्द लिखा था। उसी वर्ष, कलकत्ता ध्वज के आधार पर, मैडम भीकाजी कामा, वीर सावरकर और श्यामजी कृष्ण वर्मा द्वारा एक और ध्वज डिजाइन किया गया था। यह कामा ध्वज के रूप में लोकप्रिय तथा बर्लिन में समाजवादी सम्मेलन में प्रदर्शित हुआ। यह तिरंगा था, शीर्ष पट्टी में केवल एक कमल और सात तारे थे जो ’सप्तर्षि’ को दर्शाते थे और रंग केसरिया को शीर्ष पैनल में दर्शाया गया था जबकि हरा रंग नीचे की पट्टी पर था। इस झंडे में ’वंदे मातरम’ शब्द भी था। यह पहली बार था जब अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत का झंडा फहराया जा रहा था। इसे लोकप्रिय रूप से बर्लिन समिति के झंडे के रूप में जाना जाता था। तीसरा झंडा 1917 में सामने आया। इसे एनी बेसेंट और लोकमान्य तिलक ने होमरूल आंदोलन के दौरान डिजाइन किया था। इस झंडे में बारी-बारी से व्यवस्थित पांच लाल और चार हरी क्षैतिज पट्टियाँ थीं। इस ध्वज ने सप्तऋषि के चित्रण को बनाए रखा, जिसमें सात सितारे लगाए गए थे। ऊपरी बाएँ कोने में, ध्रुव की ओर यूनियन जैक का प्रतीक था। दाहिने कोने पर इसके विपरीत एक सफेद अर्धचंद्र और तारा भी था।
    वर्तमान भारतीय राष्ट्रीय ध्वज को 1916 में मछलीपट्टनम के पिंगली वेंकय्या द्वारा डिजाइन किया गया था। एक दशक पश्चात् 1931 हमारे तिरंगे के इतिहास में एक मील का पत्थर बनकर उभरा। वेंकैया ने ध्वज को फिर से डिजाइन किया। लाल को केसर से बदल दिया गया और सबसे ऊपर रखा गया। सफेद और हरे रंग की धारियों को क्रमशः केंद्र और निचले पैनल के रूप में रखा गया था। ध्वज के मध्य में गांधीजी के चरखे का चिन्ह रखा गया था। भारतीय राष्ट्रीय ध्वज को इसके वर्तमान स्वरूप में 22 जुलाई 1947 को आयोजित भारतीय संविधान सभा की बैठक के दौरान अपनाया गया। डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन ने संविधान सभा में कहा था कि “भगवा या केसरिया रंग त्याग या निःस्वार्थ भावना का प्रतीक है। झंडे के मध्य में सफेद रंग हमें सच्चाई के पथ पर चलने और अच्छे आचरण की प्रेरणा देता है। हरा रंग मिट्टी और वनस्पतियों के साथ हमारे संबंधों को उजागर करता है जिन पर सभी प्राणियों का जीवन आश्रित है। सफेद रंग के मध्य में अशोक चक्र धर्म के राज का प्रतीक है। इस झंडे तले शासन करने वाले लोगों को सत्य, धर्म और नैतिकता के सिद्धांतों का पालन करना चाहिए। चक्र शान्तिपूर्ण परिवर्तन की गतिशीलता का प्रतीक है।“
    प्रत्येक भारतीय के मन में राष्ट्रीय झंडे के लिए अथाह प्रेम, आदर और निष्ठा है। राष्ट्रीय ध्वज को गरिमापूर्वक फहराने के लिए पुराने सभी नियमों को बदल करके सभी के मार्गदर्शन और हित के लिए भारतीय झंडा संहिता, 2002 में सभी नियमों, रिवाजों, औपचारिकताओं और निर्देशों को एक साथ लाने का प्रयास किया गया है। सुविधा के लिए भारतीय झंडा संहिता, 2002 को तीन भागों में बांटा गया है। संहिता के भाग 1 में राष्ट्रीय झंडे के बारे में सामान्य विवरण दिया गया है। आम जनता, निजी संगठनों और शैक्षणिक संस्थानों आदि द्वारा राष्ट्रीय झंडा फहराए जाने के बारे में संहिता के भाग 2 में विवरण दिया गया है। केन्द्र और राज्य सरकारों तथा उनके संगठनों व एजेंसियों द्वारा राष्ट्रीय झंडा फहराए जाने का विवरण संहिता के भाग 3 में दिया गया है। भारतीय ध्वज संहिता, 2002 को 30 दिसंबर, 2021 के आदेश द्वारा संशोधित किया गया था और पॉलिएस्टर या मशीन से बने ध्वज से बने राष्ट्रीय ध्वज को अनुमति दी गई है। भारत के ध्वज संहिता के अनुसार, राष्ट्रीय ध्वज आकार में आयताकार होगा तथा लंबाई और ऊंचाई (चौड़ाई) का अनुपात 3ः2 होगा। इस वर्ष हम आजादी का अमृत महोत्सव मना रहे हैं। इस अवसर पर केंद्र सरकार ने ध्वज संहिता में महत्वपूर्ण बदलाव किया है जिसके अनुसार अब प्रत्येक भारतीय नागरिक अपने आवास पर चौबीस घंटे राष्ट्रीय झंडा फहरा सकता है। आजादी के अमृत महोत्सव को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने नए तरीके से मनाने का संकल्प लिया है। इसके तीन उद्देश्य हैं- पहला, जिन नामी-बेनामी शहीदों ने देश की आजादी के लिए अपना सर्वस्व न्योछावर किया, देश की युवा पीढ़ी को उनके और उनके बलिदान के बारे में जानकारी देकर देशभक्ति के संस्कार को सृजित करना।

Never miss any important news. Subscribe to our newsletter.

Leave a Reply

Recent News

Related News