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गुरु मंत्र : बुराई में एका है, अच्छाई में नहीं – पर हम क्या करें?

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नागेश्वर सोनकेशरी

हर बुराई में एकता है, पर अच्छाई में नहीं, यह एक रहस्य है। भलाईयों में जितना द्वेष होता है, बुराइयों में उतना ही प्रेम। विद्वान, विद्वान को देखकर, साधु , साधु को देखकर , व्यापारी, व्यापारी को देखकर जलता है। ये आपस में एक दूसरे की सूरत नहीं देखना चाहते । लेकिन जुआरी, शराबी, चोर अपने हमपेशे को देखकर सहानुभूति दिखाते हैं व एक दूसरे की सहायता करते हैं। एक पंडित या व्यापारी कहीं अंधेरे में गिर पड़े तो दूसरे पंडित या व्यापारी दो ठोकर ऊपर से और मार देंग । और साथ ही यह प्रयास भी करेंगे कि वह उठ न सके।

बुराई से सब घृणा करते हैं इसलिए बुरों में परस्पर प्रेम होता है। भलाई का सारा संसार बड़ाई व प्रशंसा करता है, इसलिए भलों में आपस में विरोध होता है। कोई कितना भी बड़ा क्यों न हो, वह यह बर्दाश्त नहीं कर पाएगा कि कोई उससे आगे बढ़े। बस यही उस भले आदमी का कसूर है। तुम गरीब हो, तकलीफ में हो, अपमान से तिलमिला रहे हो, तो बहुत अच्छा। इससे दया और सहानुभूति के मगरमच्छ वाले ऑंसू तुम्हें अवश्य मिलेंगे। और यदि तुम आगे बढ़े नहीं कि तुम्हारे शत्रुओं की संख्या इतनी बढ़ जाएगी, जिन्हें आप जानते तक नहीं। जिनसे आपका कोई लेना- देना भी नहीं, आपने उनका कुछ नहीं बिगाड़ा है, वे भी आप पर आक्रमण करने का मौका ढूँढते रहते हैं। उनकी कटुता बढ़ती जाती है।

तुम परेशान रहो, मिट्टी में मिल जाओ, तभी उनकी छाती ठंडी होगी। कारण कुछ भी नहीं, तुम्हारा कसूर भी कुछ नहीं, बस मनुष्य स्वभाव व उसमें उपजी ईर्ष्या है । कई बार इसी ईर्ष्या की वजह से जिंदगी बहुत परेशानी के दौर से गुजरती है। अगर आपके पास दौलत या कोई विशेष हुनर नहीं है तो लोग आपसे बहुत बुरी तरह से पेश आते हैं , उनके दरवाजे आपके लिए बंद हो जाते हैं ।लोग आपका सबकुछ छीनकर आपकी उम्मीदों को कुचलना चाहते हैं । और जिंदा रहने के लिए आपको वह सब भी करना पड़ता है जो शायद आप कभी नहीं करना चाहते।

परन्तु आपका लगातार संघर्ष आपको सदैव भीड़ से अलग खड़ा कर देता है व आप वापस अपनी चिर-परिचित मुस्कान के साथ लौट पड़ते हैं तो दुनिया खूबसूरत हो जाती है व यही स्वार्थी लोग मेहरबान। अक्सर हमें यह भी देखने में आता है कि जिसे आप बुरा आदतों वाला दोस्त अर्थात् शराबी, जुआरी,नशेडी़ समझते हैं वह आपके दुख तकलीफ में बराबर से शरीक हो रहा है व उससे जितना भी बन रहा है उससे कहीं अधिक करने की कोशिश कर रहा है। न ही वह आपसे कोई ईर्ष्या कर रहा है। वहीं आपका हाई-फाई फ्रेंड ,किसी न किसी बहाने से हटो-बचो हो जाता है। आपकी तरक्की से मन ही मन जलता है, आपकी नई गाड़ी में बैठता जरूर है परन्तु उसके मन में आपसे बड़ी गाड़ी लेने की उधेड़बुन चलती रहती है।

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