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गुरु मंत्र : प्रेरणास्त्रोतों से जुड़े रहिए लाभ ही लाभ पाइए

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  • नागेश्वर सोनकेशरी

प्रेरणा हर किसी के लिए सही दिशा में आगे बढऩे व आशावादी बने रहने के लिए बहुत आवश्यक है। आप याद करेंगे तो पाएंगे कि महापुरुषों की जीवनियाँ या कोई ऐसी बात या कहानी आपको पढऩे या सुनने में आयी, वह आपके जेहन में बैठ गई। और फिर आपने कमाल कर दिया।आप कभी पूर्व ओलंपियन अभिनव बिंद्रा के बारे में जब पढ़ेंगे व जानेंगे, तो पाएंगे कि कैसे उन्होंने जर्मनी में जाकर शूटिंग सीखी, कैसे उनके जीवन में किताबों ने उनके कोच ने उन्हें प्रेरित किया। और तो और, जब साथी खिलाड़ी सप्ताह में छह दिन अभ्यास करके एक दिन रविवार को सप्ताहांत का लाभ उठाते थे,तो अभिनव रविवार के दिन भी अपनी प्रैक्टिस किया करते थे।

वहीं अतिरिक्त प्रैक्टिस ने उन्हें शूटिंग का स्वर्ण पदक दिलवाया था। कुछ ऐसी कहानियाँ निश्चित तौर पर टोक्यो ओलंपिक में हमारे देश के जेवलिन थ्रो के एकमात्र गोल्ड मेडलिस्ट नीरज चोपड़ा की भी होंगी ही। इन्होंने अपना स्वर्ण पदक 1960 के रोम ओलंपिक में सेकेंड के दसवें हिस्से की वजह से पदक से चूके स्वर्गीय श्री मिल्खा सिंह को समर्पित कि। बस अपने प्रेरणा स्त्रोत की वजह से । मेरे साथ भी यही वाकया हुआ। बात सन 1996 की 29 अगस्त की है। इस दिन मैं इन्दौर के रीगल चौराहे की शासकीय लायब्रेरी में कोचिंग से ऊबकर पहुँचा व समाचार पत्र में एक आलेख मेजर ध्यानचंद के जीवन पर व रात में उनकी हॉकी प्रैक्टिस के बारे में पढ़कर इतना अधिक मेहनत करने लगा कि पहले ही प्रयास में लोक सेवा आयोग की परीक्षा उत्तीर्ण कर गया था।

आज के समय हम किसी भी प्रेरणास्रोत की तलाश करें तो नतीजे के तौर पर हमारे पास बहुत सारे विकल्प उपस्थित हो जाते हैं जिनसे हम प्रेरित हो सकते हैं। आजकल सेल्फ-हेल्प बुक बहुत ही शानदार आ रही हैं। आज भी विपरीत परिस्थितियों में मेहनती लोगों की कहानियाँ पढ़कर हमें एक अलग राह मिलती है। परेशानी तब शुरू होती है जब आप किसी विपरीत परिस्थिति में खुद व अपनी क्षमता पर विश्वास खोने लगते हैं । इसी वजह से आप बहुत जल्दी मुसीबत और निराशा के सागर में डूब जाते हैं।

जब कभी आपके जीवन में भी कोई ऐसा दौर आए , तो उस दौरान आप ऐसी सच्ची कहानियाँ पढऩे लग जाएं जिसमें वे महान लोग विपरीत परिस्थितियों में भी उससे बाहर निकलने में कैसे कामयाब हुए तो यकीन मानिए कि आप इससे प्रेरित भी होंगे व आपका खोया हुआ आत्मविश्वास भी वापस आने लगेगा । ये कहानियाँ समझाएंगी कि असफलता से आपके जीवन का अंत नहीं है। जब आप अपने प्रेरणास्रोत को नहीं छोड़ते व लगातार इससे जुड़े रहते हैं तो आपको एक नई दिशा मिलती है व आप सफल होने लगते हैं व अपने जीवन में भी अच्छा महसूस करने लगते हैं । इसलिए मैं अपने अनुभव से कहता हूँ कि अपने प्रेरणास्रोतों से जुड़े रहिएगा, लाभ ही लाभ मिलेगा ।

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