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कठिन संघर्ष से मिली आजादी

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1857 के पहले देश में अंग्रेजों के विरुद्ध कई विद्रोह हुए, 1857 की क्रांति इनकी बड़ी संगठित अभिव्यक्ति थी। यह असफल भले ही हुई हो लेकिन इसके बाद देश के कई हिस्सों में स्थानीय संघर्ष का सिलसिला शुरु हुआ जिसमें कई स्थानीय नायक उभरकर आए और उन्होंने राष्ट्रभाव की अलख जगाई। इसी काल में लिखा गया कालजयी गीत-वंदेमातरम जो स्वतंत्रता संघर्ष का मंत्र बना। इसके बाद स्वदेशी और अनेक आंदोलनों के माध्यम से ब्रिटिस सत्ता के विरुद्ध जनज्वार शुरु हुआ।


रंजना चितले, कथाकार व स्तंभकार

भारत में दासत्व का इतिहास बहुत लंबा है। लगभग हजार साल से ऊपर। फिर यदि अंग्रेजों की दासता को ही देखें तो यह लगभग दो सौ साल का काल बैठता है। सौ साल से ज्यादा समय ऐसे बीता जब संपूर्ण भारत का आधिपत्य उनके हाथ में था। तब भारत का भौगोलिक स्वरूप इतना भर नहीं था जितना आज दिख रहा है। तब पाकिस्तान या बंगलादेश ही नहीं तिब्बत म्यामार, अफगानिस्तान भी भारत का हिस्सा थे। लेकिन दासत्व के अंधकार में सब एक-एक करके भारत से टूटते गये। और आज भारत सिकुड़ कर कितना रह गया यह हम सबके सामने है। लेकिन इसमें एक बात विशेष रही। निसंदेह भारत में दासत्व का अंधेरा बहुत लंबा रहा।।

सैकड़ों वर्षों का रहा पर स्वतंत्रता का संघर्ष कभी थमा नहीं। हर दौर में हुआ और हर अंचल में हुआ। इतिहास के विवरण इस बात के प्रमाण हैं कि असंख्य बलिदानियों ने भारत को स्वतंत्र कराने के लिए अपने जीवन की आहुतियाँ दी हैं । लाखों बलिदानियों का तो कहीं उल्लेख तक नहीं है केवल इतना विवरण मिलता है कि अमुक गाँव में आग लगाकर लोगों को मार डाला। लोगों को पकड़ कर उनकी सामूहिक हत्याएं कीं। भारत में स्वतंत्रता का संघर्ष हर स्तर का रहा है। मानसिक, बौद्धिक, अहिसंक आंदोलनात्मक भी और सशस्त्र भी। भारतीय स्वतंत्रता संग्राम में अहिंसक और सशस्त्र संग्रामों के कई चरण हुए।

ब्रिटिश सत्ता के पहले सौ साल में पूरे देश में कई विद्रोह हुए जैसे वनवासी संघर्ष संन्यासी संघर्ष या स्थानीय स्वदेशी रियासतों का संघर्ष। और 1857 की क्रांति तो इन सभी संघर्ष का संगठित और समन्वित स्वरूप था। जिसमें स्थानीय रियासत के शासकों, सैनिकों, वनवासियों और ग्रामवासियों ने संगठित होकर हिस्सा लिया। यह संघर्ष ब्रिटिश साम्राज्य द्वारा किये जा रहे भारत और भारतीयों के दमन से उत्पन्न आक्रोश का प्रस्फुटन था। यह तात्कालिक सामाजिक और राजनैतिक परिस्थितियां थीं जिनका लाभ अंग्रेजों ने उठाया और वे इस सशस्त्र संगठित संघर्ष में फूट डालने में सफल रहे जिससे यह क्रांति सफल न हो सकी। क्रांति भले असफल रही लेकिन स्वतंत्रता की चिंगारी बुझी नहीं फिर देश में स्थानीय संघर्ष का सिलसिला शुरु हुआ।

अनेक स्थानीय नायक उभर कर सामने आये जिन्होंने अपने स्तर पर संघर्ष आरंभ किया। 1857 के संघर्ष में यदि मंगल पांडे, रानी लक्ष्मीबाई, तात्या टोपे और पेशवा नाना साहिब शामिल थे तो 1885 से 1905 के बीच स्थानीय नायकों ने भारत में राष्ट्रभाव की अलख जगाई। इसी काल में लिखा गया कालजयी गीत वंदेमातरम जो स्वतंत्रता संघर्ष का मंत्र बना। 1905 में तो बाकायदा स्वदेशी का नारा दिया गया और ब्रिटिश वस्तुओं के बहिष्कार का आह्वान हुआ। हालाँकि अपनी विभाजन नीति के अंतर्गत तत्कालीन वायसराय कर्जन ने बंगाल के विभाजन की योजना रखी। उनका मानना था कि इससे भाषा और क्षेत्रभाव पनपेगा। लेकिन इससे राष्ट्र भाव और प्रबल हुआ स्वदेशी आंदोलन तेज हो गया। कर्जन योजना के विपरीत सारे भारतीय एक हो गए। बाल गंगाधर तिलक, विपिन चंद्र पाल और अरविंद घोष ने स्वराज का उद्घोष कर दिया ।

1919 में रोलेट अधिनियम के खिलाफ लाला लाजपत राय के नेतृत्व में व्यापक राष्ट्रीय अभियान शुरू हुआ जिसमें वो गंभीर रुप से घायल हो गए। और यही उनके बलिदान का कारण बना जिसका प्रतिशोध क्रंातिकारियों ने लिया। क्रांतिकारी आंदोलन की मजबूती के लिये काकोरी रेल एक्शन हुआ जिसमें कुल नौ क्रांतिकारियों को आरोपी बनाया गया, रामप्रसाद बिस्मिल और अशफाकउल्ला खान सहित चार को फांसी दी गई। चंद्रशेखर आज़ाद और खुदीराम बोस अपने समय के महत्वपूर्ण क्रांतिकारी थे। मार्च 1931 में साजि़शों की श्रंखला के बाद भगत सिंह, राजगुरु और सुखदेव को फांसी दे दी गई।


अन्य क्रांतिकारी समूह भी थे जैसे सूर्य सेन के नेतृत्व वाला चिटगांव समूह। यही वो समय था जब सशस्त्र और अहिंसक आंदोलन दोनों अपने चरम पर थे। अंग्रेजों के विरुद्ध आरंभ में जो आंदोलन सशस्त्र चल रहा था उसमें निशस्त्र या अहिसंक आँदोलन का आयाम गाँधीजी ने जोड़ा। गांधीजी जब दक्षिण अफ्रीका से भारत लौटे तब सशस्त्र और वैचारिक संघर्ष ही चल रहा था। उन्होंने इस संघर्ष में अहिसंक आँदोलन की विधा जोड़ी ।


उनका विश्वास था कि सत्य, अहिंसा के संकल्प से भी सत्ता को झुकाया जा सकता है। उनके तीन बड़े आंदोलन इतिहास प्रसिद्ध हैं। एक सविनय अवज्ञा आन्दोलन दूसरा असहयोग आंदोलन और तीसरा भारत छोड़ो आंदोलन। उन्होंने अपने साबरमती आश्रम से दांडी तक मार्च करके नमक सत्याग्रह भी आरंभ किया। भारत में इन दो आँदोलनों के बीच एक तीसरा आयाम जुड़ा आजाद हिन्द फौज का।

द्वितीय विश्वयुद्ध के दौरान नेताजी सुभाष चंद्र बोस ने आजाद हिंद फौज का गठन किया और नेतृत्व भी किया। इस समय के दौरान कई महिलाओं ने भी स्वतंत्रता संग्राम में भाग लिया था। कुछ प्रमुख महिला स्वतंत्रता सेनानियों में दुर्गा भाभी अरुणा आसफ अली, सरोजिनी नायडू, भीकाजी कामा और सुचेता कृपलानी जैसी अनेक महिलायें भी स्वतंत्रता संग्राम में आगे आईं। 1942 में भारत छोड़ो आंदोलन शुरु हुआ जिसमें ब्रिटिश साम्राज्य से भारत छोडऩे का आह्वान हुआ। जो 9 अगस्त को देश में एक साथ आरंभ हुआ। देश भर में गिरफ्तारियां हुई गोलियां चलीं लेकिन आंदोलन जारी रहा।


यह भारतीय स्वतंत्रता संग्राम में एक काला अध्याय भी है कि स्वतंत्रता तो मिली किंतु देश के विभाजन के साथ। इस विभाजन में देश की धरती का ही बंटवारा नहीं हुआ, लाखों लोगों को प्राण गवाना पड़े। करोड़ों लोग बेघर हुए। जून 1947 में माउंटबेटन ने भारत के विभाजन की घोषणा की और अगस्त 1947 में भारत को दो देशों में बांट दिया गया जिसमें मुस्लिम पाकिस्तान और धर्मनिरपेक्ष भारत।


यह प्रश्न आज भी जीवन्त है कि क्या विभाजन सही था और क्या उसे टाला नहीं जा सकता था? स्वतंत्रता के बाद से आज तक भारत ने लंबी यात्रा पूरी कर ली है। 74 वर्ष की यात्रा। यहां कई क्षेत्रों में विकास और व्यापक पैमाने पर प्रगति हुई है। विज्ञान और प्रौद्योगिकी सूचना प्रौद्योगिकी, स्वास्थ शिक्षा आदि सभी दिशाओं में भारत ने सभी क्षेत्रों में उंचाई को छुआ है और संसार की स्पर्धा में अग्रणी हो रहा है। स्वास्थ्य के क्षेत्र में भारत ने बहुत विकास किया है। पूरे देश में जन्मदर और मृत्युदर में काफी कमी आई है। पिछले वर्षों में देश में साक्षरता दर में वृद्धि हुई है। परमाणु उर्जा के क्षेत्र में भारत ने बहुत प्रगति की है।


इसके अलावा भारत ने सूचना प्रौद्योगिकी में भी बहुत तरक्की की है। पूरी दुनिया में भारतीय सूचना प्रौद्योगिकी की मांग है। भारत उन कुछ देशों में शामिल है जिसने विभिन्न उपग्रह लांच किए हैं। आजादी के बाद से भारत ने बहुत कुछ हासिल किया है। लेकिन अब भी बहुत कुछ हासिल करना बाकी है। भारत को अब भी विश्व का सबसे उन्नत देश बनना बाकी है। यह भविष्य में कुछ महान उन्नति करने की ओर बढ़ रहा है।।

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