Home लेख आज भी गायन रूपी आराधना में तल्लीन हैं लता जी

आज भी गायन रूपी आराधना में तल्लीन हैं लता जी

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अशोक मनवानी, रंगमंच, कला और सिनेमा पर लेखन
ashokmanwani22@gmail.com


मध्यप्रदेश के इंदौर में 28 सितम्बर 1929 को जन्मी हिन्दी फिल्मों की मशहूर पाश्र्ववगायिका लता मंगेशकर ने फिल्मी और गैर फिल्मी मिलाकर हजारों गीत गाये हैं। इनकी आवाज़ के प्रशंसक पूरी दुनिया में फैले हुए हैं। लताजी की विशेषता है कि इन्होंने शास्त्रीय संगीत, गजल और पॉप संगीत हर क्षेत्र में अपनी आवाज का जादू बिखेरा है और एक समान सफलता पाई है।

लता मंगेशकर जी जीवन के 88 वर्ष पूर्ण कर रही हैं। फिर भी वे हर दिन नई ताजगी से गाती हैं। दो-तीन बरस पहले उन्होंने एक पंजाबी एल्बम के लिए भी गाया है। एक समय उर्दू के सही उच्चारण सीखने के लिए उन्होंने प्रयास किए थे। अनेक गीतों में उर्दू शब्द आने से ऐसे अभ्यास को वो जरूरी मानती हैं। लता जी ने गायन के लिए शब्दों के सही उच्चारण के लिए अनेक भारतीय भाषाओं में खुद को जानकार और पारंगत बनाया। ऐसी भाषाओं में बंगाली, पंजाबी, सिंधी, गुजराती और मराठी भाषाओं की तालीम भी हासिल की।

कुछ बरस पहले फिल्म पेज थ्री के लिए गाया गया उनका एक सुमधुर गीत- ‘कितने अजीब रिश्ते हैं यहाँ पर… यह सिद्ध करता है कि बढ़ती आयु का उनके गायन पर कोई अधिक प्रभाव नहीं पड़ा। भारतीय सिनेमा की एक सदी पूरी होने पर उनका मन उल्लास से भर उठा और वे गीत गाने के अनुरोध ठुकरा नहीं पातीं। एक तरफ हम देखते हैं कि अभिनय से जुड़ी वे अनेक नायिकाएं जिनके लिए लता जी ने गाया, अब जिन्दगी को अपने घर की चार दीवारी में समेट चुकी हैं, लेकिन लताजी कर्म में यकीन रखते हुए नित नई उंचाईयों के साथ अपनी आराधना में तल्लीन हैं।

आज भी मानो वे गा रही हों-‘अल्लाह तेरो नाम, ईश्वर तेरो नाम या फिर ‘प्रभु तेरो नाम, जो ध्याये,फल पाये… लताजी सर्वाधिक गीत गाने वाली गायिका और सबसे अधिक भाषाओं में गाने का रिकॉर्ड बना चुकी हैं। यह कितनी सुखद और संतोष देने वाली बात है कि उनका जज्बा आज भी कायम है। चार-पांच दशक तक लगातार हिंदी सिनेमा के लिए पार्श्व गायन कर अलग पहचान बनाने वाली प्रसिद्ध पार्श्व गायिका लता जी के लिए गाना एक इबादत हैं। इसलिए वे जब गीत गाती हैं तब मन से एकाग्र और सिर्फ अपने गायन पर ध्यान देती हैं। अपने पिता दीना नाथ मंगेशकर का दिया आशीर्वाद उनके साथ रहता है।

अनूठे गीतों की श्रृंखला

हिंदी सिनेमा के अनेक लोकप्रिय गीतों के लिए लता जी को जाना जाता है। लता जी के गाए गीतों की श्रृंखला बहुत लम्बी है। हर श्रोता गीत के बोल और गायिका के गाने के अंदाज के अनुसार गीत को अनूठा मानता है। लता जी के गाए कुछ गीत तो इतने अधिक कर्णप्रिय हैं कि उन्हें बार-बार सुनने की इच्छा होती है। ऐसे गीतों में तेरे सुर और मेरे गीत…, घर आया मेरा परदेसी…, यूं हसरतों के दाग…, ये जिन्दगी उसी की है, धीरे धीरे मचल ऐ दिले…, ना कोई उमंग है…, ओ मेरे सनम ओ मेरे सनम…, आज हम अपनी दुआओं का असर…., दिल अपना और प्रीत परायी…., लाख छुपाओ छुप न सकेगा…., ये हरियाली और ये रास्ता…, ढूंढो-ढूंढो रे साजनाज् झिलमिल सितारों का आंगन होगा…, मुझको इस रात की तन्हाई में आवाज न दो… फूल तुम्हें भेजा है ख़त में…., मेरे महबूब तुझे मेरी मोहब्बत की कसम…. तू जहाँ-जहाँ चलेगा मेरा साया साथ होगा, आएगा… आने वाला…., मोहब्बत की झूठी कहानी परज् जाने क्यों लोग मोहब्बत कियाज् जोत से जोत जगाते…., हवा में उड़ता जाये… हँसता हुआ नूरानी चेहरा…., जिन्दगी भर नहीं भूलेंगे…. मोहे भूल गए सांवरिया….ज्योति कलश छलके…. नगरी नगरी…. गाता जाये बंजारा…. कहीं दीप जले कहीं दिल…. ओ सजना बरखा बहार आई….. लो आ गयी उनकी याद….. अजीब दास्ताँ है ये…शामिल हैं।

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