कार्बन उत्सर्जन कम करने के प्रयास

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  • पशुपालन और डेयरी में नवाचारों के माध्यम से

अभियान के प्रभाव को बढ़ाने के लिए देशभर के प्रमुख शहरों में समय-समय पर घर-घर प्लास्टिक संग्रह अभियान चलाया गया। इसी तरह, राज्य दुग्ध संघों ने एक लीटर दूध की कीमत में 2 रुपये की सब्सिडी देने जैसे अपने प्रयासों के बारे में बताते हुए उठाए गए कदमों पर रिपोर्ट प्रस्तुत की।

  • अतुल चतुर्वेदी

5 जून को विश्व पर्यावरण दिवस समारोह ने एक बार फिर वैश्विक जलवायु नेतृत्व में भारत की भूमिका पर प्रकाश डाला। वास्तव में, भारत 1972 में मानवीय पर्यावरण पर स्टॉकहोम सम्मेलन में शामिल होने वाले सबसे प्रमुख देशों में से था, जब पहली बार पर्यावरण दिवस मनाने को लेकरघोषणा की गई थी।और 2016 में, भारत ने अपने पर्यावरणीय लक्ष्यों को आगे बढ़ाने में एक लंबी छलांग लगाई, जब माननीय प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में देश ने पेरिस समझौते को स्वीकार किया- उस पल की अपनी महत्ता थी क्योंकि यह महात्मा गांधी की जयंती 2 अक्टूबर को हुआ था। ऐसे में, हमारे देश के पर्यावरणीय लक्ष्यों को ध्यान में रखते हुए, पशुपालन और डेयरी विभाग (डीएएचडी) ने वनीकरण और नवाचारों को बढ़ावा देने के लिए कई पहल की है, जो इसके दायरे में आने वाले उद्योगों के कार्बन उत्सर्जन को कम करने की दिशा में सक्षम हैं।

सबसे पहले, डीएएचडी दूध की थैलियों में सिंगल यूज प्लास्टिक के उपयोग को कम करने की दिशा में प्रयास करते हुए माननीय प्रधानमंत्री के राष्ट्रव्यापी स्वच्छता अभियान (स्वच्छता ही सेवा) के तहत पूरी सक्रियता से काम कर रहा है। इसके लिए, डीएएचडी ने एक लीटर दूध के पाउच पर छूट देने और 500 एमएल पाउच की कीमत बढ़ाकर इसके उपयोग को हतोत्साहित करने की सलाह दी है। इसके अतिरिक्त यह सिफारिश की गई कि ग्राहकों को प्लास्टिक पाउच की वापसी पर छूट की पेशकश की जानी चाहिए ताकि इसे बाद में अपशिष्ट प्रबंधन एजेंसियों द्वारा रीसाइकल किया जा सके। डीएएचडी द्वारा जारी निर्देशों ने कई डेयरी सहकारी समितियों को प्राथमिकता के आधार पर रीसाइक्लिंग और अपशिष्ट प्रबंधन पर ध्यान केंद्रित करने के लिए प्रेरित किया।

इस तरह की पहल करने वाली प्रमुख डेयरी कंपनियों में मदर डेयरी है, जिसने दिल्ली एनसीआर में उपभोक्ताओं के इस्तेमाल के बाद 2000 मीट्रिक टन मात्रा में सिंगल लेयर प्लास्टिक को इका, अलग करने और रीसाइकल करने के लिए बोलियां आमंत्रित कीं। इस संदर्भ में, सोशल मीडिया अभियान और नई-नई रणनीतियों से जैसे, शहर के विभिन्न हिस्सों से प्लास्टिक कचरा इका कर रावण का लंबा पुतला तैयार करना और इसे जलाने की बजाय रीसाइकल करना- संदेश को घर-घर पहुंचाने की दिशा में एक लंबा रास्ता तय किया गया।

अभियान के प्रभाव को बढ़ाने के लिए देशभर के प्रमुख शहरों में समय-समय पर घर-घर प्लास्टिक संग्रह अभियान चलाया गया। इसी तरह, राज्य दुग्ध संघों ने एक लीटर दूध की कीमत में 2 रुपये की सब्सिडी देने जैसे अपने प्रयासों के बारे में बताते हुए उठाए गए कदमों पर रिपोर्ट प्रस्तुत की। प्रयासों को प्रदर्शित करने के लिए सबसे प्रमुख कार्यक्रम 2 अक्टूबर को जागरूकता वाले नाटकों (नुक्कड़), रेडियो पर कार्यक्रम, प्रिंट मीडिया में लेख आदि के रूप में आयोजित किए गए थे। इसके परिणामस्वरूप, बड़ी संख्या में डेयरी कंपनियां अब अपने दूध के पाउच पर ‘100 प्रतिशत रीसाइकल योग्य प्लास्टिकÓ की मुहर लगा रही हैं।

वृक्षारोपण के संदर्भ में केंद्रीय पशु प्रजनन फार्म की पहल उल्लेखनीय है। संरक्षण के क्षेत्र में अन्य पहलों के अलावा, संस्थान ने एक अभियान चलाया जिसके तहत इसके परिसर के आसपास 2000 से ज्यादा पौधे लगाए गए। अंत में, एक प्रमुख योजना जिसका उल्लेख किया जाना चाहिए वह है गोवर्धन योजना, जिसके तहत केंद्र सरकार किसानों के जीवन और आय में सुधार के लिए मवेशियों के अपशिष्ट के बेहतर प्रबंधन और उसे बायो गैस और जैविक खाद में परिवर्तित करने के लिए गंभीरता से काम कर रही है। सरकार ने रियल टाइम में योजना की प्रगति के बारे में जानने के लिए गोवर्धन का एकीकृत पोर्टल लॉन्च किया है।

इस प्रकार, उपर्युक्त सभी योजनाएं और पहलें डेयरी और पशुपालन से जुड़े सभी क्षेत्रों में कार्बन उत्सर्जन को कम करने के लिए सरकार की प्रतिबद्धता को रेखांकित करती हैं। इस दिशा में निरंतर प्रयास से हमारे किसानों की उत्पादकता, क्षमता बढ़ेगी और निवेश पर उच्च प्रतिफल प्राप्त होगा।
लेखक- सचिव, पशुपालन और डेयरी मंत्रालय

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