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जन-जन के प्रेरणास्रोत डॉ. कलाम

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  • योगेश कुमार गोयल

‘मिसाइल मैन’ के नाम से विख्यात डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम (अबुल पाकिर जैनुलाब्दीन अब्दुल कलाम) भारतीय इतिहास में एकमात्र ऐसे राष्ट्रपति रहे हैं, जो वैज्ञानिक थे। देश के महान वैज्ञानिक होने के साथ-साथ वह एक अद्भुत इंसान और एक प्रेरणादायक नेता भी थे। सादगी, मितव्ययिता और ईमानदारी जैसे विलक्षण गुणों की मिसाल डॉ. कलाम ने अपने इन्हीं गुणों की बदौलत समस्त देशवासियों को दिल जीत लिया था क्योंकि मौजूदा राजनीतिक परिवेश में ऐसे गुणों वाले व्यक्ति का मिलना दुर्लभ है।

15 अक्टूबर 1931 को तमिलनाडु के रामेश्वरम में एक गरीब परिवार में जन्मे अब्दुल कलाम गरीबी और कठिन परिस्थितियों के बावजूद उच्च शिक्षा प्राप्त कर वैज्ञानिक बने थे, जिनके नेतृत्व में भारत कई उपग्रह तथा स्वदेशी मिसाइलें बनाने में सफल हुआ और परमाणु शक्ति सम्पन्न राष्ट्र भी बना। उन्होंने डीआरडीओ तथा इसरो की कई महत्वपूर्ण परियोजनाओं पर काम कर उन्हें सफल बनाया। अपने जीवनकाल में उन्होंने ‘विंग्स ऑफ फायर’, ‘इग्नाइटेड माइंड’, ‘इंडिया 2020-ए विजन फॉर न्यू मिलेनियम’ इत्यादि 30 से भी ज्यादा पुस्तकें लिखी।

1999 से 2001 के बीच वे भारत सरकार के प्रमुख वैज्ञानिक सलाहकार रहे तथा 2002 से 2007 तक भारत के 11वें राष्ट्रपति रहे। राष्ट्रपति बनने के बाद जब वे राष्ट्रपति भवन पहुंचे थे तो उनके साथ सामान के रूप में केवल दो सूटकेस थे, जिनमें से एक में उनके कपड़े तथा दूसरे में उनकी प्रिय पुस्तकें थी। आज जहां नेतागण छुट्टियों पर घूमने जाने के लिए बेताब रहते हैं और संसद की कार्यवाहियों से भी गैरहाजिर रहते हैं, वहीं डॉ. कलाम ने राष्ट्रपति रहते अपने पूरे राजनीतिक जीवन में केवल दो छुट्टियां ली थी, एक अपने पिता के देहांत पर और दूसरी अपनी मां की मृत्यु के अवसर पर।

देश के सर्वोच्च पद पर रहते हुए कलाम साहब ने अपने कार्यकाल में सादगी, मितव्ययिता और ईमानदारी की जो मिसाल पेश की, वह आज और कहीं देखने को नहीं मिलती। ऐसा ही एक वाकया स्मरण आता है, जब एक बार उनका पूरा परिवार (कुल 52 सदस्य) उनसे मिलने दिल्ली आया। स्टेशन से सभी को राष्ट्रपति भवन लाया गया, जहां सभी आठ दिनों तक ठहरे। उन पर खर्च हुई एक-एक पाई कलाम साहब ने अपनी जेब से खर्च की।

बताया जाता है कि उन्होंने अपने अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिया था कि उनके इन अतिथियों के लिए राष्ट्रपति भवन की कारें इस्तेमाल नहीं की जाएंगी और उनके खाने-पीने के सारे खर्च का विवरण भी अलग से रखा गया। आठ दिन बाद सभी के दिल्ली से वापस चले जाने पर कलाम साहब ने अपने निजी बैंक खाते से 3.52 लाख रुपये का चेक काटकर राष्ट्रपति कार्यालय को भेज दिया। राष्ट्रपति पद पर रहते हुए उन्होंने कभी किसी का कोई उपहार अपने पास नहीं रखा। दरअसल उनका कहना था कि उनके पिता ने उन्हें यही शिक्षा दी है कि कभी किसी का कोई उपहार स्वीकार मत करो।

किसी ने एक बार उन्हें दो पैन उपहार स्वरूप दिए थे लेकिन वे भी उन्होंने राष्ट्रपति पद से विदाई के समय लौटा दिए थे। भारत के बच्चों के भविष्य को लेकर वे चिंतित स्वर में कहते थे कि देश में प्रतिवर्ष दो करोड़ बच्चे जन्म लेते हैं, उन सभी बच्चों का क्या भविष्य होगा और जीवन में उनका क्या लक्ष्य होगा? क्या हमें उनके भविष्य के लिए कुछ कदम उठाने चाहिए या हमें उन्हें उनके नसीब के सहारे छोड़ अभिजात्य वर्ग के फायदे के लिए ही काम करना चाहिए।

डॉ. कलाम का मानना था कि यदि भारत को भ्रष्टाचार मुक्त और सुंदर मस्तिष्क वालों का देश बनाना है तो इसमें समाज के तीन लोग सबसे महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं, पिता, माता और गुरु। भारत के भविष्य को लेकर उनके पास एक विजन था, जिस पर ‘इंडिया 2020: ए विजन फॉर न्यू मिलेनियमÓ नामक पुस्तक प्रकाशित हुई थी। उन्हीं की अध्यक्षता में 1996-97 में ‘विजन 2020’ डॉक्यूमेंट तैयार किया गया। उस रिपोर्ट में सरकार को कुछ सुझाव देते हुए बताया गया था कि 2020 तक भारत को क्या कुछ हासिल करने का लक्ष्य रखना चाहिए।
(लेखक वरिष्ठ टिप्पणीकार हैं)

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