Home लेख पुण्यतिथि आज : रवीन्द्रनाथ टैगोर ने कहा निंदकों को कौन रोक सका

पुण्यतिथि आज : रवीन्द्रनाथ टैगोर ने कहा निंदकों को कौन रोक सका

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रवीन्द्रनाथ टैगोर विशिष्ट कवि थे। वे विचारक ही नहीं, शांत साधक भी थे। वे भयमुक्त थे। उनका स्वभाव बहुत शांत था। लेकिन निंदकों को कौन रोक सका है। कुछ लोग रविन्द्रनाथ टैगोर जी की भी निंदा करते थे। एक बार उनके मित्र शरदबाबू ने टैगोर से कहा, ‘मुझसे आपकी यह आलोचना सही नहीं जाती। आप अपनी आधारहीन आलोचना का प्रतिकार करें।’

टैगोर ने शांत भाव से कहा, ‘तुम जानते हो, मैं निंदकों और आलोचकों को स्तर तक नहीं जा सकता। मेरा अपना स्तर है। उसको छोड़कर मैं आलोचकों के स्तर तक जाऊं तभी उसका प्रतिकार हो सकता है, अन्यथा नहीं। मैं ऐसा कभी नहीं कर सकता।’

दो देशों का राष्ट्र-गान लिखा, तीसरे को प्रेरणा दी
रवीन्द्रनाथ टैगोर ने साहित्य को अप्रतिम योगदान दिया है और अपने देश को राष्ट्रगान ‘जन गण मन’ दिया है। महात्मा गांधी ने उन्हें सम्मान देते हुए गुरुदेव की उपाधि दी थी। इस गीत को 24 जनवरी 1950 में संविधान में जगह मिली। भारत के बांग्लादेश का राष्ट्रगान ‘आमार सोनार बांग्ला’ भी उन्होंने लिखा है। श्रीलंका का भी राष्ट्रगान ‘नमो नमो माता’ रवीन्द्रनाथ टैगोर से प्रेरित है। कुछ लोगों का मत है कि उन्होंने लिखा जबकि कुछ लोग इसके लेखक के रूप में गुरुदेव के शांति निकेतन के शिष्य आनंद समरकून को इसका रचयिता मानते हैं। उसका संगीत रवीन्द्रनाथ का दिया हुआ था।

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