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संस्कृति : आपके जीवन में कोई कहानी नहीं तो ऐसे लिखिए एक प्रेरक कथा

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  • नागेश्वर सोनकेशरी

कल ही गुरु पूर्णिमा का पर्व समाप्त हुआ है व हम सभी ने अपने-अपने गुरुदेवों का श्रद्धानुसार पूजन- अर्चन निश्चित तौर पर किया ही होगा। मैं यहॉं पर गुरु पूर्णिमा पर्व पर नहीं अपितु इस पर्व को मनाने के उद्देश्य के साथ इस बात पर जरूर जोर दूँगा कि क्या हम सभी ने अपने गुरुदेवों की दी गई सीख अथवा उनसे प्राप्त ज्ञान को अपने जीवन में उतार पाए? उन शिक्षाओं से कुछ भी लाभ उठा पाए या नहीं ?

हमारी भारत भूमि पर बहुत अधिक पर्व व महापुरुषों की जयंतियाँ भी इसी उद्देश्य को लेकर मनायी जाती हैं परन्तु हम यदि उनकी शिक्षाओं को अपने आचरण में अपनाते नहीं हैं तो यह सब एक कर्मकांड से अधिक कुछ भी नहीं रह जाता है। हमारे गुरू हमें जीवन की समस्याओं के निदान के साथ-साथ हमेशा सार्थक जीवन जीने की शिक्षा देते रहें हैं ।और सार्थक जीवन की परिभाषा में अधिक धन व अधिक सुख कदापि नहीं है। आप जानते ही हैं कि भूख से ज्यादा भोजन करने वाले को अपने उत्तम स्वास्थ्य की आकांक्षा नहीं रखनी चाहिए। ठीक इसी प्रकार पैसों के पीछे भागने वाले को शांति, प्रसन्नता व प्रेम इन तीनों को भूल जाना चाहिए।

याद रखना अधिक संपत्ति, अधिक सुख भ्रम है, और भ्रम में रहना एक भयंकर भूल है। हमारे जीवन में कुछ बातें ऐसी भी हो जाती हैं जिनपर हमारा कोई नियंत्रण नहीं होता है व जीवन समस्याग्रस्त हो जाता है। फिर आप ढोंगी और पाखंडियों के चक्कर में पड़कर और ज़्यादा भ्रमित हो जाते हैं व अपना आर्थिक व मानसिक शोषण करवा चुके होते हैं जिससे आपकी समस्या सुलझने के बजाए और बढ़ जाती है ।यदि आप यह सोचें कि यदि आप जिंदा हैं तो जिंदगी में समस्याएँ तो होंगी ही, क्योंकि सुख व दुख दोनों ही स्थायी नहीं है। असल समस्या सुख को स्थायी मानने से शुरू होती है । समस्या को अपने जीवन का हिस्सा मान लीजिए और यह आती- जाती रहती है ।

सोचिए कि जब आप ही स्थायी नहीं हैं तो समस्या कैसे स्थायी हो सकती है, इसलिए हमें आयी हुई समस्या का हल निकालकर निरंतर सार्थक कर्म तो करने ही होंगे। और उन कर्मों के साथ-साथ अपनी अनावश्यक इच्छाओं के प्रति सचेत भी रहना होगा, क्योंकि इन अनावश्यक इच्छाओं को ही शास्त्रों में तृष्णा कहा गया है और तृष्णाओं की पूर्ति करना आकाश को नापने के समान है, परन्तु आवश्यकताओं की पूर्ति आसान है।

यदि आवश्यकता की पूर्ति ऊपर वाले ने अच्छे से कर दी है तो फिर उसके सच्चे प्रतिनिधि की तरह आप भी, अपनी गरीबों की मदद करने वाली जिम्मेदारी निभाइए। इस जिम्मेदारी की वजह से आपको अपने जन्म पर गर्व होगा। व एक शानदार कहानी की शुरुआत भी होगी। यदि इस समय तक आपके जीवन में ऐसी कहानियाँ नहीं है, तो इन कहानियों के निर्माण के साथ ही सार्थक जीवन की यात्रा प्रारंभ कर दीजिए।
लेखक ने पूर्व में अद्भुत श्रीमद्भागवत (मौत से मोक्ष की कथा) की रचना भी की है ।

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