आतंकी साजिशों के लिए धर्मांतरण

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प्रमोद भार्गव

उत्तरप्रदेश में आतंक विरोधी दस्ते (एटीएस) को जो सबूत मिले हैं उनसे पता चलता है कि धर्मांतरण के पीछे आतंक का षड्यंत्र काम कर रहा था। जिन्हें हिंदू से मुस्लिम बनाया गया, उन्हें आतंकी वारदात करने का प्रशिक्षण दिया जा रहा था। पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी आईएसआई और आईएसआईएस से इस काम में धन और मदद मिल रही थी। अन्य अरब देशों से भी धर्मांतरण के लिए बड़ी धन राशि मिलने के सबूत मिले हैं। इनकी मंशा थी कि भारत में हरेक माह कम से कम 15 हिंदुओं को धर्मांतरित किया जाए।

दिल्ली से एटीएस द्वारा हिरासत में लिए गए जहांगीर आलम और मोहम्मद उमर गौतम ने अपने कई वीडियो में यह कबूल किया है कि देश में ‘इस्लामिक दावा केंद्रÓ की कई शाखाएं में धर्म परिर्वतन के काम में लगी हैं। नोएडा में तो डेफ सोसायटी में पढऩे वाले मूक-बधिर छात्रों तक का न केवल मतांतरण किया गया, बल्कि उन्हें मानव बम के रूप में इस्तेमाल करके भारत समेत पूरी दुनिया को दहलाने की साजिश रची जा रही थी। इन संस्थाओं को एनजीओ के माध्यम से बड़ी मात्रा में विदेशी धन उपलब्ध करया जा रहा था।

मालूम हो, कुछ समय पहले गाजियाबाद के डासना मंदिर में साजिश के तहत विपुल विजयवर्गीय, सलीमुद्दीन एवं कासिफ घुसे थे, इनके देश के अनेक कट्टरवादी संगठनों से संबंध थे। ये संगठन लोक कल्याणकारी न्यासों के जरिए चलाए जा रहे हैं। साफ है भारत विरोधी घिनौने काम में लगे एनजीओ पर और शिकंजा कसने की जरूरत है। इस्लामिक दावा केंद्र में हर महीने औसतन 15 लोगों का धर्मांतरण कराया जाने के दास्तावेज जारी किए जाते हैं।

इस केंद्र को अमेरिका, पाकिस्तान, कुवैत, दुबई व अन्य इस्लामिक देशों से गैर सरकारी संगठनों (एनजीओ) को चंदे के रूप में धन मिलने के सबूत मिले हैं। इससे पता चलता है कि विदेशी धन पर प्रभावी कानून बना दिए जाने के बावजूद धन की अवैध आमद पर लगाम नहीं लगी है। इस्लामिक दावा केंद्र को दिल्ली, लखनऊ, मुबंई और फरीदाबाद के धार्मिक इस्लामिक चैरिटेबल ट्रस्टों से धन मिल रहा है। ये संगठन एफसीआरए के तहत पंजीकृत हैं, इसलिए इन्हें आईडीसी को धन स्थानांतरित करने में आसानी होती है। इस धन को ये धर्म प्रचार के बहाने मतांतरण जैसे कुत्सित कार्य में लगा रहे हैं।


यह धर्मांतरण भारत के लिए राष्ट्रांतरण की तरह है। जो काम अब तक ईसाइ कर रहे थे, बही हतकंडा इस्लामिक धर्म प्रचारकों ने अपना लिया है। इन दोनों धर्मों में धर्मांतरण धर्म का आदेश व कर्तव्य का पालन माना जाता है। ये लोग गरीब व वंचित हिंदुओं को धन व काम कंधे का लालच देकर लुभाते हैं। ये अपनी पैठ ऐसे आर्थिक व शैक्षिक रूप से कमजोर समुदायों में बनाते हैं, जो इनकी बातों में आसानी से आ जाएं। ऐसे लोगों में ग्रामीण इलाकों में रहने वाले आदिवासी समूह सबसे ज्यादा होते हैं। उमर गौतम ने एटीएस को बताया है कि वह 18 बार इंग्लैंड, 4 बार अमेरिका, अफ्रीका व अन्य देशों की भी यात्राएं कर चुका है।

इंग्लैंड, अमेरिका, पुर्तगाल, जर्मनी, सिंगापुर व कुछ अन्य देशों के नागरिक इस्लामिक दावा केंद्र (आईडीसी) में इस्लाम धर्म अपनाने के लिए कानूनी सलाह लेने आते रहे हैं। इनमें से कई के विवाह भी कराए गए हैं। यह केंद्र अब तक एक हजार से भी ज्यादा हिंदुओं का मतांतरण करा चुका है। यानी केंद्र विदेश यात्रा और शादी करा देने का लालच देकर भी धर्मांतरण के गोरखधंधे में लगा है। भारत में स्वैच्छिक भाव से दीन-हीन मानवों की सेवा एक सनातन परंपरा रही है। पाप और पुण्य के प्रतिफलों को भी इन्हीं सेवा कार्यों से जोड़कर आज भी देखा जाता है।

किंतु वर्तमान गैर सरकारी स्वैच्छिक संगठनों को देशी-विदेशी धन के दान ने इनकी आर्थिक निर्भरता को दूषित तो किया ही है, इनकी कार्यप्रणाली को भी अपारदर्शी व भारत विरोधी तक बना दिया है। इस लिहाज से जो धार्मिक व सांस्कृतिक संगठन हैं, उनकी गतिविधियों पर यह नजर रखने की जरूरत है कि वे उमर गौतम की तरह बहरूपिया बनकर धर्मांतरण को बढ़ावा तो नहीं दे रहे ? इस्लाम धर्म के कथित उपदेशक डॉ. जाकिर नाइक अपने एनजीओ के बहाने इसी काम में भारत से भागने के बाद अभी भी लगा हूआ है। गोया, एफसीआरए कानून को अभी और कठोर रूप में बदलने की जरूरत है।

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