मप्र में कोविड के कठिन दौर में भी बनी रही शिक्षा की निरंतरता

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  • संदीप कपूर


प्रदेश में कोरोना काल में भी शिक्षा की निरंतरता बनी रही जिसका श्रेय शिक्षक वर्ग को है। आने वाली चुनौतियों के लिए छात्रों को तैयार करना शिक्षक का कर्तव्य है,जिसे उन्होंने बखूबी निभाया है। मुख्यमंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान ने भी प्रदेश के शिक्षकों की सार्थक भूमिका के लिए सराहना की है। मुख्यमंत्री श्री चौहान का मानना है कि वास्तव में समाज को गढऩे का कार्य शिक्षक ही करते हैं। कठिन दौर में गत डेढ़ वर्ष से लगातार अपने कर्तव्य के प्रति शिक्षक प्रतिबद्ध रहे ।

प्रदेश में शालेय शिक्षक न केवल आने वाली पीढ़ी को चुनौतियों के लिए तैयार कर रहे हैं, अपितु स्वयं भी चुनौतियों का दृढ़ता पूर्वक सामना कर रहे हैं। कोरोना संक्रमण ने शालेय शिक्षा व्यवस्था को झकझोर कर रख दिया था। बच्चों के एक साथ होने, सीखने, खेलने–कूदने, अन्य पाठ्येत्तर गतिविधियों और परस्पर आपसी संवाद से ही स्कूल नामक संस्था जीवंत थीं और उसकी पहचान थी। वहां का आनंद व बच्चों में स्कूल के लिए रूचि इन्हीं कारणों से थी। कोरोना ने इन सब गतिविधियों को संक्रमण फैलने का कारण बना दिया।

शिक्षकों ने कोरोना प्रभावितों की मदद भी की

प्रदेश के गुरूजन ने कोविड संक्रमण के दौरान दीक्षा, डिजिलेप, दूरदर्शन, रेडियो, व्हाटएप आदि माध्यमों से ऑनलाइन कक्षाओं का संचालन कर शिक्षा व्यवस्था का संचालन किया तथा ‘हमारा घर-हमारा विद्यालय जैसी योजनाओं के माध्यम से विद्यार्थियों तक निरंतर शिक्षा की पहुंच बनाए रखी। शिक्षा के साथ-साथ शिक्षकों ने कोरोना से ग्रसित लोगों के सर्वेक्षण, उनकी चिकित्सा तथा टीकाकरण में सहयोग जैसे कार्य भी किये।

ऑनलाइन कक्षाओं की व्यवस्था से हुई पढ़ाई

कोविड-19 की स्थिति के दृष्टिगत विद्यार्थियों की शिक्षा न रूके इसके लिए विगत वर्ष से ही प्रतिदिन ऑनलाइन कक्षाएं संचालित की जा रही हैं। डिजिटल लर्निंग एन्हांसमेंट प्रोग्राम (डिजीलेप) के माध्यम से कक्षा 1 से 12 के विद्यार्थियों के लिए व्हाट्सएप से शिक्षण सामग्री साझा की जा रही है।

व्हाट्सएप बना सशक्त माध्यम, मिली विद्यार्थियों की सक्रिय भागीदारी

दूरदर्शन मध्यप्रदेश के माध्यम से कक्षा 6 से 12 के लिए शैक्षिक प्रसारण और रेडियो कार्यक्रम के माध्यम से प्रतिदिन कक्षा 1 से 8 के लिए शैक्षिक प्रसारण विगत वर्ष से किया जा रहा है। इसके अतिरिक्त कक्षावार और विषयवार रोचक शैक्षिक सामग्री भी शिक्षकों और पालकों के लिए व्हाट्सएप ग्रुप बनाकर प्रेषित की गई । हमारा घर हमारा विद्यालय- कार्यक्रम के तहत विद्यार्थियों को प्रिंट मैटीरियल दिया गया है। इनके सीखने का मूल्यांकन करने के लिए वॉट्सएप आधारित व्यवस्था की गई है। इसमें कुल 41 लाख विद्यार्थियों की भागीदारी रही है।

विद्यार्थियों की मनोवैज्ञानिक समस्याओं को सुलझाने टेली काउसिंलिग

प्रदेश के विद्यार्थियों की मनोवैज्ञानिक समस्याओं के समाधान के लिए टेली काउसिंलिग की व्यवस्था उमंग हेल्पलाइन 14425 का संचालन कर की जा रही है। अब तक 62 हजार 716 विद्यार्थियों द्वारा इस हेल्पलाइन सुविधा का लाभ लिया गया है।

शिक्षकों को मिला ऑनलाइन प्रशिक्षण

मध्यप्रदेश में शिक्षा के स्तर में सुधार के उद्देश्य से गुणवत्तापूर्ण शिक्षा प्रदान करने के लिए शिक्षकों के ऑनलाइन प्रशिक्षण की व्यवस्था की गयी । भारत सरकार के दीक्षा प्लेटफॉर्म के माध्यम से राज्य में 2 लाख 70 हजार शिक्षकों ने 18 प्रशिक्षण मॉडयूल के संबंध में प्रशिक्षण प्राप्त किया है।

(जनसंपर्क अधिकारी, मुख्यमंत्री प्रेस प्रकोष्ठ, भोपाल)

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