Home लेख भारत की पहचान को बदलने का षडय़ंत्र

भारत की पहचान को बदलने का षडय़ंत्र

77
0
  • विदेशी शह पर धर्मांतरण के ताजा खुलासों से उठे सवाल

भारत में घुसपैठ, विदेशियों को बसाने और धर्मांतरण के यह षडय़ंत्र नये नहीं है । यह सब आजादी के बाद से ही चल रहा है । लेकिन सरकार और समाज दोनों इस ओर से की उदासीनता रही है । इससे यह षडयंत्र खूब फल-फूल रहा है । उत्तर प्रदेश की ये दो घटनायें तो केवल बानगी हैं । यह सब रात दिन हो रहा है ।

  • रमेश शर्मा

उत्तरप्रदेश में दो बड़े षडय़ंत्र उजागर हुये हैं, दो रैकेट पकड़े गये हैं। पश्चिम उत्तरप्रदेश में एक ऐसा रैकेट पकड़ में आया है जो रोहिग्याओं को बसाने के अभियान में लगा था, इस काम में अभी ग्यारह लोग बंदी बनाये जा चुके हैं। वहीं एक दूसरा गिरोह ऐसा मिला है जो योजनापूर्वक धर्मांतरण के अभियान में लगा है। इस रैकेट में अभी दो लोग बंदी बनाये गये हैं। बाकी के बारे में जांच की जा रही है। इन दोनों गिरोहों को विदेश से फंडिग होने की बात भी सामने आई है। पुलिस सारे तथ्यों की जाँच कर रही है।

भारत में घुसपैठ, विदेशियों को बसाने और धर्मांतरण के यह षडयंत्र नये नहीं है। यह सब आजादी के बाद से ही चल रहा है। लेकिन सरकार और समाज दोनों इस ओर से की उदासीनता रही है। इससे यह षडय़ंत्र खूब फल-फूल रहा है। उत्तरप्रदेश की ये दो घटनायें तो केवल बानगी हैं। यह सब रात दिन हो रहा है । ऐसी घटनाएं खूब हो रहीं ह। नाम बदले तरीका बदला लेकिन भारत में ऐसी घुसपैठ और धर्मांतरण कराने में सक्रियता बराबर बनीं रहीं। एक रोहिग्याओ की घुसपैठ ही क्यों भारत के हर पड़ौसी देश के नागरिकों की घुसपैठ और बसाहट भारत में है। पाकिस्तानी, बंगलादेशी, नेपाली, चीनी आदि देशों से आकर नागरिक भारत में बस रहे हैं । और अब इसी श्रृंखला में रोहिंग्याओ का नाम जुड़ गया है ।

नेपाल की सीमा से लगे उत्तरप्रदेश और बिहार के जिलों पाकिस्तानी घुसपैठियों और बंगलादेशी घुसपैठियों की लंबी लंबी बस्तियाँ बसीं हैं। कश्मीर घाटी में पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर के रास्ते आवाजाही और बसाहट किसी से छिपी नहीं है। इसी तरह चीनी षडयंत्रकारी नेपाल और तिब्बत के रास्ते मिजोरम नागालैण्ड और बंगाल में अपनी पैठ बना रहे हैं । इन इलाकों में चीनी नागरिक बड़ी संख्या में स्वयं को नेपाली और तिब्बती बताकर रह रहे हैं । बंगलादेशी नागरिकों की घुसपैठ का रैकेट कितना तगड़ा है, इस बात का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि वे न केवल असम में विधायक मंत्री और सांसद बन रहे हैं बल्कि देश की राजधानी दिल्ली में भी उनकी बस्तियाँ बन गयीं हैं। देश में ऐसा कौन सा महानगर है जहाँ बंगलादेशी नागरिकों की उपस्थिति न हो। ठीक वही कतार अब रोहिग्याओं की लग रही है। उनकी आबादी बढ़ रही है। जनसंख्या का अनुपात बदल रहा है। सामाजिक-आर्थिक समीकरण बदल रहा है।

यह बदलाव कितना तेज है इसे समझने के लिये केवल दो आंकड़े ही पर्याप्त हैं । एक यह कि आजादी के बाद 1951 की पहली जनगणना में हिन्दुओं की आबादी 92.5 प्रतिशत थी जो 2021 में 80 के आसपास आ गयी है। हिन्दुओं की जनसंख्या प्रतिशत घटने का कारण परिवारों का सीमित होना नहीं है, यह तो एक छोटा सा कारण है। हिन्दुओं की जनसंख्या प्रतिशत घटने का सबसे बड़ा कारण घुसपैठ और धर्मांतरण ही है । हिन्दू ूघट रहे हैं और अन्य मतावलंबी बढ़ रहे हैं । ये आंकड़े तो वे हैं जो रिकॉर्ड पर आ गये हैं, जनगणना के सर्वेक्षण में दर्ज हो गये हैं। इनके अतिरिक्त कितने लोग हैं जो नाम बदलकर रह रहे हैं, अपना काम कर रहे हैं । इसके दो उदाहरण इसी जून माह के तीसरे सप्ताह में देश के दो अलग-अलग प्रांतों में सामने आये हैं। एक राजस्थान के जयक मामूली गलती से पकड़ा गया। यह तो पकड़ा गया है। और कितने होंगे किन किन नगरों में होंगे जो नहीं पकड़े गये। दूसरा उदाहरण छत्तीसगढ़ के राजनांदगाँव जिले का है। जहां रोहिग्या घुसपैठिये हिन्दू नामों से रह रहे थे। वे एक अपराधी गिरोह चला रहे थे। यह घटना भी इसी जून के तीसरे सप्ताह की है ।

पश्चिमी उत्तरप्रदेश में रोहिग्याओं को बसाने का जो गिरोह पकड़ा गया है उसकी कहानी भी ऐसी ही है। वे नाम बदल कर रहे थे और बाहर से आने वाले रोहिग्याओं के लिये ठिकाने तलाशते थे। बाहर की दुनिया में उनकी पहचान अलग थी और उनके अपने लोगों के भीतर अलग । ये लोग रोहिग्याओं को बसाने के लिये बस्तियाँ तलाशते थे, उन्हें छोटे-मोटे काम से लगाते थे। लेकिन उनका भीतरी काम एक और था वह था अपराध। ये लोग संगठित अपराध समूह चला रहे थे। दूसरा जो धर्मांतरण का रैेकेट पकड़ा गया है उसका केन्द्र दिल्ली जामियानगर में है ।

इस गिरोह में फिलहाल दो ही गिरफ्तारी हुई है लेकिन उनका संपर्क देश के बारह प्रांतों में है। इन पकड़े गये लोगों ने स्वीकार किया कि उन्होंने लगभग एक हजार लोगों का धर्मातरण कराया है । लेकिन एक और बात जो सामने आई है वह चौंकाने वाली है। वह है कि यह गिरोह बच्चों को आत्मघाती बम के रूप में इस्तेमाल करता था। इसके तार अन्य प्रांतों से भी जुड़े हैं और इसे पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी आईएसआई से आर्थिक मदद मिलने की भी बात सामने आई है। जिस तरह भारत में अनेक देशों की घुसपैठ की जा रही है, या कराई जा रही है उसी तरह धर्मांतरण का सिलसिला भी ऐसा है । हिन्दू मत से अन्य अनेक मतों की ओर हो रहा है । हिन्दू से धर्मांतरण केवल इस्लाम की ओर ही नहीं हो रहा है ईसाई मिशनरियों का भी एक पूरा नेटवर्क है। भय लालच, भ्रम और हिन्दू परंपरा के विरुद्ध मिथ्या प्रचार करने के प्रकरण यदा कदा सामने आते रहे हैं ।

अब प्रश्न उठता है कि जब भारत में सभी धर्मों को अपने धर्म का प्रचार करने का अधिकार है। अन्य देश के शरणाथियों को शरण देने का भी प्रावधान है तब चोरी छुपे ऐसे योजनाबद्ध आपराधिक अभियान चलाने का आशय क्या है ? उद्देश्य क्या है ? क्यों भय लालच और भ्रम को भी माध्यम बनाया जा रहा है । इसका केवल एक ही उद्देश्य हो सकता है वह है भारत में ही भारत के स्वरूप का रूपान्तरण करना । हिन्दू या सनातनी तो कहीं किसी के धर्मान्तरण अभियान में नहीं लगे तब अन्य देश के नागरिक या अन्य मतावलंबी क्यों यहाँ इस प्रकार का अभियान चलाये हुये हैं । इसका पर्याप्त और ठोस उत्तर किसी के पास नहीं है पर इतना जरूर कहा जा सकता है कि इसके पीछे भारत की पहचान भारत में ही बदलने की है ।

चूंकि भारत में धर्मांतरण केवल मतान्तरण भर नहीं है, यह राष्ट्रांतरण का हिस्सा है। व्यक्ति केवल मत नहीं बदलता या धर्म नहीं बदलता बल्कि उसका राष्ट्रभाव भी बदल जाता है। इस समझने के लिये सबसे बड़ा उदाहरण मोहम्मद अली जिन्ना का है। जिन्ना के पूर्वज चार पीढ़ी पहले हिन्दू थे लेकिन जिन्ना ने भारत राष्ट्र के बंटवारे का जो अभियान चलाया इससे इतिहास के पन्ने भरे पड़े हैं। दूसरा उदाहरण शेख अब्दुल्ला का है । उनके पूर्वज भी कश्मीरी ब्राह्मण थे लेकिन धर्मांतरण के बाद उनकी भूमिका क्या है सब जानते हैं।

Previous article‘आपातकाल’ भारतीय लोकतंत्र के चेहरे पर अमिट धब्बा
Next articleआपातकाल : भारतीय लोकतंत्र का काला अध्याय

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here