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स्वच्छ वाहन, लंबा जीवन

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  • अमिताभ कांत

जो कार हम चलाते हैं, वह हमारे बारे में बहुत कुछ बताती है। नए युग के नागरिक जलवायु के प्रति बहुत जागरूक हैं। जब आप अपने वाहन को स्टार्ट करते हैं, तो क्या आप पृथ्वी को एक स्थायी हरित भविष्य की ओर ले जा रहे हैं और क्या साथी यात्रियों की सुरक्षा सुनिश्चित कर रहे हैं? भूमंडल-ताप वृद्धि (ग्लोबल वार्मिंग) के तेजी से बढ़ते स्तर ने हमें गंभीरता से सोचने पर मजबूर किया है।

पूरी दुनिया व्यापक स्तर पर जलवायु संकट के कगार पर है। जलवायु परिवर्तन पर संयुक्त राष्ट्र अंतर-सरकारी पैनल (आईपीसीसी) ने कहा है, ‘मानव हस्तक्षेप से,जलवायु उस तेजी से गर्म हो रही है, जिसे कम से कम पिछले 2000 वर्षों के अभूतपूर्व कहा जा सकता है। अभी जब मैं यह लिख रहा हूं, कैलिफोर्निया ऐतिहासिक सूखे की चपेट में है, जंगल की आग ने यूनान को तबाह कर दिया है और बाढ़ ने चीन और अपने देश में राजस्थान, यूपी, एमपी, महाराष्ट्र और पश्चिम बंगाल के कुछ हिस्सों को पानी से भर दिया है।

वैश्विक समुदाय इस भयानक संकट को चिंतित होकर देख रहा है। भारत, अत्यंत उच्च जोखिम वाले देशों में एक है। भारत में दुनिया के 30 सबसे प्रदूषित शहरों में से 22मौजूद हैं; देश में वाहन-प्रदूषण कुल कार्बन उत्सर्जन के लगभग 30 प्रतिशत के लिए जिम्मेदार है, जो भारत को दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा कार्बन-उत्सर्जक बना देता है। भारत में पुराने और अनुपयुक्त वाहन, वायु प्रदूषण की आपात स्थिति के लिए प्रमुख रूप से जिम्मेदार हैं, जिनमें उत्सर्जन-स्तर नए वाहनों की तुलना में लगभग 6-7 गुना अधिक होता है।

वित्त वर्ष 2020 में लगभग 2.1 करोड़ वाहनों की बिक्री हुई है और पिछले दो दशकों में ऑटोमोबाइल क्षेत्र की वृद्धि दर 9.4 प्रतिशत रही है। देश में लगभग 33 करोड़ वाहन पंजीकृत हैं। इसलिए, यह कहा जा सकता है कि 1950 के दशक में पंजीकृतवाहन अभी भी सड़क परिवहन प्राधिकरण में ‘पंजीकृत हो सकता है। कुल वाहनों की संख्या में दुपहिया का लगभग 75 प्रतिशत हिस्सा है।इसके बाद कार/जीप/टैक्सी का दूसरा सबसे बड़ा खंड लगभग 13 प्रतिशत है।

वाहन स्क्रैपनीति, किसी भी वाहन का पंजीकरण रद्द करने के लिए अपनी तरह की पहली संस्थागत व्यवस्था है। सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय के वाहन डेटाबेस के अनुसार, लगभग एक करोड़ से अधिक वाहन ऐसे हैं, जिनके पास वैध फिटनेस या पंजीकरण प्रमाण पत्र नहीं है। वाहन स्क्रैप नीति में ‘वाहनों की जीवन समाप्ति के लिए एक तंत्र बनाने की परिकल्पना की गई है। ये ऐसे वाहन हैं, जो अब सड़कों पर चलने के लिए उपयुक्त नहीं हैं और इनमें प्रदूषण उत्सर्जन, ईंधन की निम्न दक्षता और यात्रियों के लिए सुरक्षा-जोखिम जैसे नकारात्मक पहलू हैं।

ये ‘जीवन समाप्त वाले वाहन, स्क्रैपके लिए सबसे उपयुक्त हैं। इसके अलावा, अनुमान है कि लगभग 13-17 करोड़ वाहन अगले 10 वर्षों में अपने जीवन समाप्ति के स्तर पर पहुंच जाएंगे। ‘वाहनों की जीवन समाप्ति (ईएलवी) के स्क्रैप से न केवल लौह और अलौह धातुएं बल्कि प्लास्टिक, कांच, रबर, कपड़ा आदि अन्य सामग्री भी मिल सकतीं हैं, जिनका पुनर्चक्रण किया जा सकता है अनुपोगी हो रहे पुराने वाहन को नए से बदलने की प्रक्रिया के माध्यम से ही हम भारतीय आवागमन में नए युग की शुरुआत कर सकते हैं। प्रधानमंत्री ने भी जोर देकर कहा है कि चक्रीय अर्थव्यवस्था हमारी धरती के पर्यावरणको हुए नुकसान को दूर करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम होने जा रही है।
(लेखक नीति आयोग के मुख्य कार्यकारी आधिकारी हैं। )

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