नागरिक बोध: त्योहारों और व्रतों का महीना नवंबर

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रमा निगम, साहित्यकार, भोपाल

त्योहारों से समृद्ध आगामी नवंबर जहां सनातन लोगों की धर्म-आस्था एवं उल्लास की कहानी कहता है वहीं बारिश समाप्त होने के पश्चात् घर की साफ सफाई और रंग रोगन इत्यादि में लोगों की व्यस्तता को भी दर्शाता है। इसके साथ ही इस माह से ठंड पडऩा भी शुरु हो जाती है। त्योहारी महीना होने के कारण बाजारों में रौनक होना भी लाजमी है तथा इसके साथ ही दुकानों पर ऑफरों की भरमार का तो कोई जवाब ही नहीं। इस वर्ष नवंबर माह में आने वाले प्रमुख त्योहारों को हम सिलसिलेवार लेकर आये हैं। नवंबर माह में रमा एकादशी,देवउठनी ग्यारस, उत्पन्न्ना एकादशी, धनतेरस, दिवाली, गोवर्धन पूजा,भाई दूज, छठ पूजा एवं कार्तिक पूर्णिमा के अतिरिक्त भी बहुत से व्रत एवं त्योहार आ रहे हैं।

नवंबर में गुरू तेगबहादुर बलिदान दिवस भी आ रहा है। एकादशी का व्रत हिन्दू धर्मावलंबियों के लिए अत्यन्त महत्वपूर्ण हैं। त्योहारों की हम धनतेरस से शुरूआत करते हैं। धनतेरस के दिन धन और समृद्धि के देवता भगवान कुबेर का पूजन किया जाता है। इसी दिन भौम प्रदोष का व्रत भी किया जाता है। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार भगवान कुबेर प्रसन्न होकर घर में धन के भंडार भर देते हैं। इसके पश्चात् नरक चतुर्दशी का त्योहार आ रहा है। इसे रूप चौदस या छोटी दिवाली के नाम से जाना जाता है।

इसके पश्चात् कार्तिक मास की अमावस्या के दिन दिवाली का त्योहार मनाया जाएगा। इसके अगले दिन गोवर्धन पूजा करी जायेगी। यह दिन गोवर्धन एवं गाय की पूजा को समर्पित होता है। इस दिन घर के आंगन को गाय के गोबर से लीप कर गोवर्धन पर्वत बना भगवान गोवर्धन की पूजा करी जाती है। इसके पश्चात् अगले दिन भाई दूज की पूजा की जायेगी । इसी दिन कायस्थ लोग भगवान चित्रगुप्त की पूजा अर्चना कलम दवात के माध्यम से करते हैं।

इसके पश्चात् विनायक चतुर्थी का व्रत आ रहा है। चतुर्थी की तिथि पर रखे जाने वाले इस व्रत को रखने से जीवन में आने वाले सभी विध्न एवं संकट दूर हो जाते हैं। इसके बाद आने वाली छठ पूजा सूर्य उपासना का पर्व है। जिसे बिहार, झारखण्ड,पूर्वी उत्तरप्रदेश एवं नेपाल के तराई वाले इलाकों में काफी श्रृद्धा एवं विश्वास से मनाया जाएगा। देवउठनी एकादशी का महत्व भी कम नहीं है। इस दिन भगवान विष्णु चार माह की नींद से जागते हैं। इसके पश्चात् ही पुन: मांगलिक कार्यों की शुरूआत हो जाती है।

हर माह त्रयोदशी की तिथि के दिन रखे जाने वाला प्रदोष व्रत भगवान शिव एवं पार्वती के साथ मंगल देवता की पूजा कर संपन्न किया जाता है। इसके पश्चात् कार्तिक पूर्णिमा को गंगा स्नान का महत्व है। पौराणिक मान्यता है कि इस दिन किसी पवित्र नदी,सरोवर अथवा जलकुंड में स्नान करने से असंख्य पुण्यफलों की प्राप्ति होती।

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