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चीनी विस्तारवाद और क्वाड

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चीन पूरे दक्षिणी चीन सागर के 80 प्रतिशत भाग पर अपना दावा कर कई द्वीपों पर सैन्य अड्डे बना लिये है। जिसके विरोध में ब्रुनेई, मलेशिया, फिलीपीन्स, ताइवान व वियतनाम रहते है। चीन एक तरफ अमेरिकी क्षेत्र में अपने नौसैनिक पोतों को भेजकर कई तरह के क्षेत्रीय दावे कर रहा हैं,वहीं पूर्व सागर में जापान की संप्रभुता को चोट पहुंचता है।

  • डॉ. नवीन कुमार मिश्र

विस्तारवादी नीति के तहत चीन हिंद व प्रशांत महासागरीय क्षेत्र तथा दक्षिणी चीन सागर में सैन्य व आर्थिक शक्ति के बल पर धौंस जमाता है। चीन के लिये नेपोलियन ने सही कहा था कि चीन सोता हुआ ड्रैगन है, जिसे शीत युद्ध में रूस को रोकने के लिए अमेरिका ने आगे बढ़ाया था और अब वो जाग गया है। वह अपनी सैन्य शक्ति के बल पर आर्थिक व भौगोलिक विस्तार कर विश्व में वर्चस्व कायम करना चाहता है। हिन्द व प्रशांत महासागर में चीन के बढ़ते आक्रामक रवैये से गंभीर संकट पैदा हो रहे है। चीन की विस्तारवादी नीति के कारण दक्षिणी चीन सागर में अतिक्रमण व तकरार जैसी स्थिति बनी रहती है।

चीन पूरे दक्षिणी चीन सागर के 80 प्रतिशत भाग पर अपना दावा कर कई द्वीपों पर सैन्य अड्डे बना लिये है। जिसके विरोध में ब्रुनेई, मलेशिया, फिलीपीन्स, ताइवान व वियतनाम रहते है। चीन एक तरफ अमेरिकी क्षेत्र में अपने नौसैनिक पोतों को भेजकर कई तरह के क्षेत्रीय दावे कर रहा हैं,वहीं पूर्व सागर में जापान की संप्रभुता को चोट पहुंचता है। फिलीपीन्स के द्वीपों पर कब्जे करने का प्रयास हो या कर्ज के मकडज़ाल में श्रीलंका को फंसाकर बंदगाहों को हथियाने की सोची-समझी साजिश भी चीनी विस्तारवाद का ही परिणाम है। चीन की इन करतूतों पर अंकुश लगाने व नियम आधारित व्यवस्था को मजबूत करने की प्राथमिकता के साथ भारत के नेतृत्व में क्वाड (क्वाड्रीलेटरल सिक्योरिटी डायलॉग) बनाया गया है जो अमेरिका,भारत,जापान और ऑस्ट्रेलिया के बीच का समूह है। इस चतुर्भुज सुरक्षा संवाद की पहली बैठक वर्ष 2007 में मनीला में हुई थी। इसी वर्ष बंगाल की खाड़ी में मालाबार नौसैनिक अभ्यास किया गया।

चीन ने इस पर प्रतिक्रिया देकर इसे एक बीजिंग विरोधी गठबंधन कहा था। चीन के कारण आस्ट्रेलिया ने भाग नहीं लिया। परन्तु दस वर्ष बाद वर्ष 2017 में मनीला में ही आसियान शिखर सम्मेलन के दौरान आस्ट्रेलिया के पुन: शामिल होने से क्वाड फिर से अस्तित्व में आया। उस दौरान भारत और चीन के बीच डोकलाम में विवाद भी चल रहा था। क्वाड अपने नौसैनिक अभ्यास को निरन्तर करता रहा। वर्ष 2018 में फिलीपीन्स के सागरीय भाग गुआम तट और वर्ष 2019 में जापान के ससेबो शहर के समीप पश्चिमी प्रशांत महासागर में नौसैनिक अभ्यास किया गया।

नवंबर 2020 में भारतीय नौसेना ने बहुपक्षीय युद्धाभ्यास मालाबार के 24वें संस्करण का आयोजन हिंद महासागर की बंगाल की खाड़ी में विशाखापत्तनम से शुरू किया था। इस अभ्यास में अमेरिकी नौसेना, जापानी मैरीटाइम सेल्फ़ डिफेंस फ़ोर्स और रॉयल ऑस्ट्रेलियन नेवी ने हिस्सा लिया। क्वाड देशों के इस युद्धाभ्यास को अपने विस्तारवादी नीति का विरोधी मानते हुये चीड़ाहुआ चीन इसे ‘एशियन नाटोÓकहता है और बांग्लादेश को क्वाड से दूर रहने की धमकी भी दे चुका है। परन्तु क्वाड का मकसद सैन्य संगठन बनाना नहीं है बल्कि लोकतांत्रिक विचारों को बढ़ावा देने वाले देश आपस में साथ मिलकर स्वतंत्र व समावेशी हिंद व प्रशांत महासागरीय क्षेत्र के लिए प्रतिबद्ध व एकजुट है। भारत हिंद व प्रशांत महासागरीय क्षेत्र में नियम आधारित अंतर्राष्ट्रीय व्यवस्था के प्रति साझा मूल्यों एवं प्रतिबद्धता को प्रदर्शित करने का पक्षधर है।

बाइडेन के अमेरिकी राष्ट्रपति बनने के बाद से क्वाड की सक्रियता और बढ़ गयी है। अमेरिका ने 12 मार्च 2021 के वर्चुअल शिखर सम्मेलन की मेजबानी कर क्वाड को मजबूत करने की दिशा में कार्य करना शुरू कर दिया है। हिंद व प्रशांत महासागरीय क्षेत्र में चीनी अतिक्रमण को रोकने के लिये क्वाड एक बड़ी चुनौती हो सकता है। इससे चीन काफी डरा हुआ है। इसलिये चीन ने रूस के साथ मिलकर ‘क्षेत्रीय सुरक्षा संवाद मंचÓके गठन का प्रस्ताव क्वाड शिखर सम्मेलन के बाद दक्षिणी चीन के शहर गुइलिन में किया है।

क्वाड को लेकर रूस की चीन से निकटता जरूर बढ़ी है लेकिन यह अस्वभाविक है और पश्चिमी विरोध के कारण है।भारत व रूस एक दूसरे के परम्परागत दोस्त है और अंतर्राष्ट्रीय मंचों पर रूस ने भारत का हमेशा साथ दिया है। चीन की विस्तारवादी चुनौतियों के लिये भारत का खुलकर समर्थन करने वाले अमेरिका का साथ भी जरूरी है।इन बदलते भू-राजनीतिक परिस्थितियों व अंतर्राष्ट्रीय प्राथमिकताओं के बीच भारत के लिए नये और पुराने दोस्तों में संतुलन बनाये रखना आवश्यक है जो चीन के विस्तारवादी मंसूबे को नाकाम करने में सक्षम होगा।
(लेखक विदेशी मामलों के अध्येता हैं)

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