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सीएए से भारत विभाजन की त्रासदी के शिकार लोगों का भला होगा

  • डॉ राघवेंद्र शर्मा
    देश में नागरिकता संशोधन अधिनियम लागू करके अंततः भाजपा नीत एनडीए सरकार के प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी ने एक बार फिर यह साबित कर दिया है कि हम जो कहते हैं वह करके रहते हैं, और कहते भी वही हैं जो देश हित में करना उचित होता है। यही बात नागरिकता संशोधन अधिनियम पर लागू होती है। हम सभी जानते हैं कि लगभग 3 साल पहले यह कानून लोकसभा में पारित हो चुका है। यह भी किसी से छुपा नहीं है कि इस कानून को लेकर विपक्षी दलों, खासकर कांग्रेस द्वारा भ्रम फैलाया जाता रहा है। मसलन, इस कानून के लागू होने से देश के अल्पसंख्यकों के हित प्रभावित होने वाले हैं। उनकी नागरिकता पर आंच आने वाली है। एक भाजपा कार्यकर्ता होने के नाते में अपना कर्तव्य मानता हूं कि इस बारे में मुस्लिम भाइयों को असल स्थिति से अवगत करा सकूं। सत्यता यह है कि नागरिकता संशोधन अधिनियम के लागू होने से किसी भी मुस्लिम भाई अथवा अल्पसंख्यकों के हितों पर किसी भी प्रकार का प्रतिकूल प्रभाव पड़ने वाला नहीं है। विशेष रूप से यह भरोसा दिलाना चाहता हूं कि इसके लागू होने से किसी की भी नागरिकता नहीं जाने वाली। दरअसल यह कानून इसलिए आवश्यक है क्योंकि भारत विभाजन के दौरान जो लोग परिस्थिति वश अथवा भावनाओं में बहकर पाकिस्तान बांग्लादेश या फिर अफगानिस्तान में ही स्थिर होकर रह गए थे। वह उक्त देशों में अल्पसंख्यक होने के चलते अनेक यातनाओं का शिकार बन रहे हैं। वहां की सरकारों की पक्षपात पूर्ण नीतियों के चलते उन्हें प्रताड़ित, धर्म परिवर्तन के लिए विवश किया जा रहा है। वहां उन लोगों की मां बहन बेटियों की आबरू सुरक्षित नहीं रह गई है। ऐसे लोग या तो परेशान होकर भारत आ चुके हैं और बहुत सारे लोग भारत में वापस आना चाहते हैं। लेकिन कानूनी अड़चनों के चलते इनका भारतीय नागरिकता हासिल करना बेहद दुष्कर कार्य बना हुआ है। यही वजह है कि भारत सरकार को नागरिकता संशोधन अधिनियम लागू करना पड़ा। दरअसल यह कार्य महात्मा गांधी की इच्छा अनुसार बहुत पहले ही हो जाना चाहिए था। लेकिन तुष्टिकरण की नीति के तहत देश को सदैव ही विभाजनकारी हालातों की ओर धकेलने वाली कांग्रेस सरकारें कभी ऐसा कर ही नहीं पाईं। अब जब केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार ने इस असंभव से लगने वाले कार्य को संभव कर दिखाया है तो कांग्रेस को यह देश हित का कार्य पच नहीं रहा। वह एक बार फिर यह प्रचारित करने में जुट गई है कि इस कानून से अल्पसंख्यकों, और खासकर मुसलमानों का बुरा होने वाला है। इसे जाति अथवा संप्रदाय आधारित कानून भी बताया जा रहा है। जबकि ऐसा नहीं है, इस कानून में हिंदू सिख बौद्ध पारसी आदि संप्रदायों का इसलिए उल्लेख है, क्योंकि उपरोक्त संप्रदायों को मानने वाले लोग दूसरे देशों में अल्पसंख्यक होकर वहां प्रताड़ित हो रहे हैं। जबकि वे सब मूलतः भारत के ही जन्मजात नागरिक हैं। विश्व में और कोई देश ऐसा नहीं है जिसे यह अपना कह सकें। अतः एकमात्र देश भारत ही रह जाता है जहां यह निश्चिंत होकर अपनी गुजर बसर कर सकते हैं, क्योंकि यह उनका अपना देश है। इस विशेष अवसर पर में मुसलमान भाइयों से भी इस सत्यता को बांटना चाहूंगा कि उन्हें अब कांग्रेस और उसके जैसी विचारधारा रखने वाले अवसरवादी संगठनों के बहकावे में आने की आवश्यकता नहीं है। अब वह दिन लद गए जब हिंदुओं का भय दिखाकर मुसलमानों को और मुसलमान का भय दिखाकर हिंदुओं को बरगलाया जाता रहता था। अब केंद्र सरकार जिस तरह की जनहित की योजनाएं लागू कर रही है, उनसे बगैर किसी भेदभाव के सभी नागरिकों का भला हो रहा है। प्रधानमंत्री आवास योजना, प्रधानमंत्री जन औषधि योजना, आयुष्मान योजना, उज्ज्वला योजना, नल जल योजना, निशुल्क राशन योजना, ऐसी अनेक योजनाएं हैं जिनके सहारे देश के सभी नागरिक बगैर भेदभाव के अपना जीवन सवांर रहे हैं। इन जैसी अनेक योजनाओं का लाभ देते वक्त सरकार द्वारा हितग्राही से कभी भी उसकी जाति अथवा संप्रदाय का ब्यौरा नहीं मांगा जाता। किसी को भी नुकसान न पहुंचने वाली यही बात नागरिकता संशोधन अधिनियम पर भी लागू होती है। मुझे इस बात की खुशी है कि अनेक मुस्लिम विद्वान इस सच्चाई को समझ रहे हैं।

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