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कहते हैं पर देश क्यों नहीं छोड़ते?

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  • मुनव्वर राना को भी डर लगने लगा

मुनव्वर राना पहले मुस्लिम नहीं है जिसे किसी प्रदेश या फिर देश से डर लगने लगा है और प्रदेश या देश छोड़कर चले जाने की घोषणा की है । और भी कई उदाहरण है। उदाहरण तो मुस्लिम मानसिकता का ही प्रतिनिधित्व करने वाले हैं।

विष्णु गुप्त

लीजिए अब मुनव्वर राना को भी डर लगने लगा। उसने एक बड़ा ही सनसनीखेज और राजनीतिक उफान फैलाने वाला बयान दिया है । उसके बयान की गूंज भारत की सीमाओं को पार कर दुनिया तक पहुंच गई। खासकर दुनिया के मुस्लिम और ईसाई मीडिया और तथाकथित मानवाधिकार संगठनों ने इसको एक हथकंडा बनाकर, भारत को एक खतरनाक और असहिष्णुता वाला देश घोषित कर दिया, प्रत्यारोपित कर दिया कि अल्पसंख्यकों और खासकर मुसलमानों के लिए भारत एक खतरनाक देश हो गया है , उत्पीडऩ और प्रताडऩा का प्रतीक बन गया है।

अब हम यहां यह देखते हैं कि मुनव्वर राणा का पूरा बयान क्या है, उनकी डर के कारण क्या है ,क्या उनकी डर सही में है या फिर उनकी डर में कोई राजनीति है, राजनीति प्रेरित या फिर मुस्लिम मानसिकता से ग्रसित है। दरअसल मुनव्वर राणा ने अपने एक बयान में साफ तौर पर कहा है कि उत्तर प्रदेश में योगी आदित्यनाथ की सरकार डरावनी है, अगर फिर भी उत्तर प्रदेश में योगी आदित्यनाथ की सरकार की वापसी होती है तो फिर वह उत्तर प्रदेश छोड़कर चले जाएंगे । जाहिर तौर पर योगी आदित्यनाथ की हिंदू राजनीति उनके लिए डरावनी है।

मुनव्वर राना पहले मुस्लिम नहीं है जिसे किसी प्रदेश या फिर देश से डर लगने लगा है और प्रदेश या देश छोड़कर चले जाने की घोषणा की है । और भी कई उदाहरण है। उदाहरण तो मुस्लिम मानसिकता का ही प्रतिनिधित्व करने वाले हैं। याद कीजिए आप मुस्लिम अभिनेता शाहरुख खान को। शाहरुख खान को देश की राजनीति में नरेंद्र मोदी की सक्रियता मात्र से डर लगने लगा था, नरेंद्र मोदी की देश की राजनीति में आहट मात्र से शाहरुख खान को भारत में अपना भविष्य खतरनाक ,अंधकार पूर्ण ,जोखिम पूर्ण भी लगने लगा था ।

शाहरुख खान ने तब बयान दिया था कि अगर नरेंद्र मोदी देश का प्रधानमंत्री बनते हैं तो वह देश और हिंदी फिल्म जगत को छोड़ कर के चले जाएंगे । जबकि उस समय नरेंद्र मोदी या भाजपा के किसी भी बड़े या छोटे नेता ने शाहरुख खान को डराने वाले बयान तक नहीं दिए थे और ना ही शाहरुख खान के फिल्मी व्यापार ,फिल्मी अभिनय पर रोक लगाने की कोशिश की थी । एक दूसरे मुस्लिम अभिनेता आमिर खान है। आमिर खान और उनकी तत्कालीन बीवी किरण राव को भी भारत में डर लगने लगा था ।

आमिर खान की तत्कालीन बीवी किरण राव ने अपने बयान में मुनव्वर राणा और शाहरुख खान की कहानी दोहराई थी। भारत में कथित तौर पर बढ़ती सांप्रदायिकता किरण राव आमिर खान को अपच थी। आमिर खान ने अपनी दूसरी बीवी को तलाक दे दिया है । किरण राव तलाक के बाद भी अपने उस बयान पर कायम है या नहीं, किरण राव को अब भी भारत में डर लगता है या नहीं, यह सब मालूम नहीं है।

एक बड़ा प्रश्न यह है कि जब ऐसे लोग अमान्य होते हैं , गुमनाम होते हैं और ख्याति से दूर होते हैं, ख्याति के लिए संघर्षरत रहते हैं तो फिर इन्हें भारत में क्यों नहीं डर लगता है, भारत इनके लिए खतरनाक देश क्यों नहीं होता है, इनके लिए भारत मुस्लिम विरोधी देश क्यों नहीं होता है, इन्हें हिंदू सांप्रदायिक क्यों नहीं लगते ,इन्हें असहिष्णुता जैसे शब्द क्यों नहीं प्रिय होते। जब ये गुमनाम होते हैं ,जब ये ख्याति हीन होते हैं, जब ये संघर्ष करते रहते हैं तो फिर इन्हें संप्रदायिकता का डर नहीं होता है , इन्हे भारत के अंदर अंदर ही अपना भविष्य दिखने लगता है, भारत की संस्कृति और भारत की धर्म निरपेक्षता इन्हें प्यारा होता है।

अगर मुनव्वर राना की शायरी का हिंदू समर्थक नहीं होते, हिंदुओं की विभिन्न श्रेणियों में मुनव्वर राना की शायरी स्वीकार नहीं होती , मुनव्वर राना की शायरी को मुस्लिम मानसिकता से ग्रसित करार देकर खारिज कर दिया गया होता तो क्या मुनव्वर राणा इतनी इतनी बड़ी शायरी हस्ती होते, मुनव्वर राना की उत्तर प्रदेश छोडऩे के बयान को कोई सुध तक लेता? कदापि नहीं। इसी तरह शाहरुख खान की कहानी है । शाहरुख खान की ख्याति में हिंदुओं के योगदान को खारिज करना गलत है।

शाहरुख खान की फिल्में देखने वाले भी 100 में 90 हिंदू हैं। अगर हिंदू शाहरुख खान की फिल्में बायकाट कर देते या शाहरुख खान से घृणा करते तो फिर शाहरुख खान की फिल्में हिट होती क्या? शाहरुख खान इतनी बड़ी हस्ती बनते क्या? इसका उत्तर कदापि नहीं है। आमिर खान का प्रकरण तो और खतरनाक है। आमिर खान सत्यमेव जयते सीरियल में जिस प्रकार से हिंदू संस्कृति का अपमान करते हैं, हिंदू संस्कृति के खिलाफ घृणा उत्पन्न करते हैं, हिंदू संस्कृति में उन्हें सिर्फ बुराइयां ही दिखती हैं, हिंदू संस्कृति उन्हें मानवता से दूर लगती है उससे आमिर खान की हिंदू विरोधी मानसिकता को कैसे खारिज किया जा सकता है।

दहेज और तलाक को लेकर हिंदू धर्म की आलोचना सत्यमेव जयते सीरियल में करते हैं और हिंदू धर्म में तलाक पर भी प्रवचन देते हैं। पर खुद दो दो हिंदू बीबियों को तलाक दे देते हैं। लड़कियों को ताश के पत्तों की तरह उलटना फेरना या फिर तलाक जैसी खतरनाक खेल खेलना क्या सही है ? हिंदू बुराइयां तो ठीक है पर मुस्लिम बुराइयों पर खामोशी क्यों होती है? तीन तलाक से महिला की जिंदगी को बर्बाद कर देना, हालला जैसी पीड़ा, त्रासदी, खतना जैसी उत्पीडऩ के खिलाफ बोलना नहीं, सत्यमेव जयते और फिल्म का विषय ना बनाना क्या मुस्लिम परस्त मानसिकता का परिचायक नहीं है। अगर आप इस पर प्रश्न कीजिए तो फिर आपको हिंदू सांप्रदायिक घोषित कर खिल्ली उड़ाएंगे।

डर की मानसिकता से पूर्व उपराष्ट्रपति हामिद अंसारी भी पीडि़त है उन्हें भी भारत में डर लगता है, मुसलमानों के लिए भारत एक खतरनाक देश है पर हामिद अंसारी जैसे लोग कश्मीर से भगाए गए हिंदुओं ,असम में आदिवासियों की जमीन बलपूर्वक कब्जा करने वाले मुस्लिम घुसपैठिए, पश्चिम बंगाल में हिंदुओं का कत्लेआम पलायन, मुसलमानों की आबादी बढ़ाओ आदि जिहाद में इन्हें कोई बुराई नजर नहीं आती हैं।

ये घोर मुस्लिम परस्त हस्तियां ,अगर किसी मुस्लिम देश में होती, या फिर किसी कम्युनिस्ट देश में होती तो ये मुस्लिम परस्त हस्तियां इतनी बड़ी मनोरंजन कारी , उपभोग कारी ख्याति पाती क्या? इसका उत्तर बताती नहीं है। शाहरुख खान आमिर खान जैसे अभिनेता को मुस्लिम देशों में ख्याति मिलती ही नहीं। अगर ये मुस्लिम रूढिय़ों के खिलाफ कलाकारी दिखाते तो फिर मुस्लिम देशों के कट्टरपंथियों द्वारा इन्हें हलाल कर दिए जाता। मुस्लिम देशों की सरकार इन्हें जेलों में डालकर सड़ा देती।

कम्युनिस्ट देश बिना मुकदमा चलाए मौत का घाट उतार देते। मुनव्वर राणा की शायरी इस्लाम की परिधि में कैद रहती,सिमटी रहती। नरेंद्र मोदी की सत्ता के सात साल हो गए, इस दौरान नरेंद्र मोदी की सरकार ने शाहरुख खान, आमिर खान, हामिद अंसारी और मुनव्वर राना पर कौन सी उत्पीडऩ की है, कौन सा बदला लिया है?

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