Home » महिला उत्थान के अग्रदूत थे भारत रत्न महर्षि केशव धोंडो कर्वे

महिला उत्थान के अग्रदूत थे भारत रत्न महर्षि केशव धोंडो कर्वे

  • शिवकुमार शर्मा
    भारतीय राष्ट्रीय आंदोलन की अगुवाई करने वाले नेताओं के जहन में यह तथ्य भी था कि स्वाधीनता का उद्देश्य तभी पूरा होगा जब समाज हर दृष्टि से जागरूक हो जाएगा। इस एजेंडे में सबसे बड़ा मुद्दा महिलाओं की स्थिति में सुधार और लैंगिक बराबरी का था। बह्य शक्तियों से संघर्ष के साथ-साथ देशवासियों में जागरूकता बढ़ाने का कार्य देश के ही अनेक मनीषी समानांतर रूप से कर रहे थे,जिनमें महर्षि धोंडो केशव कर्वे का नाम बड़े सम्मान के साथ लिया जाता है।भारतीय जनमानस में चेतना जागृत करने,सामाजिक समता,जाति विहीन समाज तथा राष्ट्र शिक्षा का समर्थन करने वाले समाज सुधारक,शिक्षा शास्त्री,महर्षि धोंडो केशव कर्वे को नारी स्वतंत्रता के मार्ग को प्रशस्त करने,स्त्री शिक्षा को बढ़ाने तथा नारी उत्थान के अग्रदूत के रूप में पहचाना जाता है। उन्हें डॉ. डी. के .कर्वे तथा सम्मान से ‘अन्ना कर्वे’ नामों से भी संबोधित किया जाता है। देश में पहला महिला विश्वविद्यालय (एस एन डी टी महिला विश्वविद्यालय) स्थापित करने का श्रेय डॉ. कर्वे को जाता है। महर्षि कर्वे का जन्म 18 अप्रैल 1858 को महाराष्ट्र के रत्नागिरी जिले में मुरुड़ कस्बे के पास शेरावाली गांव में हुआ था ।उनकी माता का नाम श्रीमती लक्ष्मी बाई तथा पिता का नाम श्री केशव पंत था। प्रारंभिक शिक्षा मुरुड़ में ही संपन्न हुई। आगे की पढ़ाई के लिए संघर्ष शुरू हुआ। मिडिल परीक्षा में सम्मिलित होने के लिए अपनी नियमित पढ़ाई छोड़ ,गांव से मीलों दूर कोल्हापुर जाकर स्वतंत्र परीक्षार्थी के रूप में सम्मिलित होना पड़ा ।1881 में मुंबई के रॉबर्ट मनी स्कूल से हाई स्कूल परीक्षा उत्तीर्ण की तथा 1884 में मुंबई के एलफिंस्टन कॉलेज से विशेष योग्यता के साथ स्नातक परीक्षा उत्तीर्ण की।बी.ए. की परीक्षा उत्तीर्ण करने के पूर्व राधाबाई के साथ विवाह संपन्न हो गया था, संतानोत्पत्ति भी हो गई ,खर्चा चलाना मुश्किल हो गया। परिवार की माली हालत अच्छी नहीं होने से आगे की पढ़ाई न करते हुए मराठा स्कूल में अध्यापन कार्य शुरू किया तथा अन्य विद्यालयों में अंशकालिक रूप से काम कर जीविका चलाई। 1891 में गोपाल कृष्ण गोखले के आमंत्रण पर वे पुणे के प्रसिद्ध फर्ग्यूसन कॉलेज में प्राध्यापक बन गए। 23 वर्ष तक वहां सेवाएं देते हुए उन्होंने स्त्री शिक्षा के क्षेत्र में ऐतिहासिक कार्य किए । वे डक्कन शिक्षा समिति के आजीवन सदस्य बने। समाज सुधार के प्रति उनकी लगन होने से वे निरंतरआगे बढ़ते चले गए। 1915 में मराठी में उनकी पुस्तक ‘आत्मचरित्र’ प्रकाशित हुई। 1893 में उनकी पत्नी का निधन हो जाने से उन्होंने अपने मित्र की विधवा बहन गोपूबाई (आनन्दी बाई)से विवाह कर लिया।

Swadesh Bhopal group of newspapers has its editions from Bhopal, Raipur, Bilaspur, Jabalpur and Sagar in madhya pradesh (India). Swadesh.in is news portal and web TV.

@2023 – All Right Reserved. Designed and Developed by Sortd