Home लेख खेती को मिलेगी नई रफ्तार

खेती को मिलेगी नई रफ्तार

51
0
  • रबी फसलों की एमएसपी में बढ़ोतरी

केन्द्र सरकार के ये समग्र प्रयास, रबी फसलों की एमएसपी में बढ़ौत्री, महत्वपूर्ण योजनाओं की घोषणाएं उम्मीद जगाती है कि इनके प्रभावी क्रियान्वयन से देश की खेती में आमूल-चूल परिवर्तन होगा, किसानों की तकदीर बदलेगी, युवा पीढ़ी के सपनों का पंख मिलेंगे।

सुनील गंगराड़े

रबी की बुवाई से बहुत पहले रबी फसलों की एमएसपी निर्धारित कर केन्द्र सरकार ने खेती-किसानी के प्रति अपनी प्राथमिकता स्पष्ट कर दी है। खेती को लाभकारी बनाने के लिए मोदी सरकार की बानगी रबी फसलों के न्यूनतम समर्थन मूल्य की घोषणा के रूप में भी पूरी प्रखरता से झलकती है। पूर्व में रबी-खरीफ फसलों के न्यूनतम समर्थन मूल्य की घोषणा फसल कटाई के समय तक हो पाती थी। किसान वर्ग अनुमान भी नहीं लगा पाता था कि उसकी उपज का आधार भाव क्या होगा? प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी की अध्यक्षता में आर्थिक मामलों की केन्द्रीय मंत्रिमंडलीय समिति (सीसीईए) की बैठक के बाद रबी मार्केटिंग सीजन 2022-23 के लिए रबी फसलों की एमएसपी में बढ़ोतरी की घोषणा की गईं।

गेहूं के एमएसपी में गत वर्ष के मूल्यों पर 40 रु. की वृद्धि कर 2015 रु. प्रति क्विंटल किया गया है वहीं सरसों में 400 रु. क्विंटल की बढ़ौत्री कर 5050 रु. किया गया। इसके अलावा मसूर में भी 400 रु. बढ़ाकर 5500 रु. प्रति क्विंटल की वृद्धि की गई। अन्य रबी फसलों में चने की एमएसपी 130 रु. बढ़ाकर 5230 रु. प्रति क्विंटल की गई, कुसुम में 114 रु. बढ़ाकर 5441 रु. और जौ के न्यूनतम समर्थन मूल्य में 35 रु. की बढ़ोतरी कर 1600 से 1635 रु. प्रति क्विंटल एमएसपी की गई है।

न्यूनतम समर्थन मूल्यों में वृद्धि का विश्लेषण करेंगे तो यह स्षष्ट है कि गेहूं के मुकाबले दलहनी, तिलहनी फसलों की एमएसपी में बढ़ोतरी कर केन्द्र सरकार किसानों को प्रत्यक्ष रूप से प्रोत्साहित कर रही है। किसानों का रूझान दलहनी फसलों की ओर झुकेगा। विश्व में भारत दलहन उत्पादन में शीर्ष पर है, परन्तु उपभोक्ता भी उससे बड़ा है। 2014-15 में देश में दलहन का रकबा 2.35 करोड़ हेक्टेयर था जो 2020-21 में बढ़कर 2.81 करोड़ हेक्टेयर हो गया, उत्पादन भी 2020-21 में 2.55 करोड़ टन हुआ, परंतु देश में दालों की खपत अधिक होने के कारण लगभग 40 लाख टन का आयात करना पड़ता है। चना, मसूर का समर्थन मूल्य बढऩे के कारण किसानों का रुझान बढ़ा है और उत्पादन और उत्पादकता का ग्राफ निरंतर ऊपर जा रहा है।

इसी प्रकार सीसीइए की सिफारिशों को मानकर सरसों के समर्थन मूल्य में रिकॉर्ड 400 रु. प्रति क्विंटल बढ़ाकर सरसों का रकबा व उत्पादन बढ़ाना, प्राथमिकता है। देश की खाद्यान्न तेल आयात पर निर्भरता कम होगी और किसानों की आमदनी में बढ़ौत्री होगी। हाल ही केन्द्र सरकार द्वारा घोषित राष्ट्रीय खाद्य तेल पाम ऑयल मिशन का लक्ष्य भी यही है। इस मिशन के लिए 11,040 करोड़ रखे गए है।

आत्म निर्भर भारत का मेरुदंड और नींव भी आत्मनिर्भर कृषि ही है और इसके मूल में देश के किसानों को आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में केन्द्र सरकार निरंतर कल्याणकारी योजनाएं, परिणाम देने वाले कार्यक्रम और उनके प्रभावी, क्रियान्वयन में जुटी है। बड़ी बात यह है कि ये नीतियां और योजनाएं हकीकत में तब्दील हो रही हैं।

इस वर्ष 2021-22 में एमएसपी पर गेहूं की रिकॉर्ड सरकारी खरीद ने विभिन्न असंतुष्ट पक्षों की उस आशंका को निर्मूल कर दिया कि सरकार एमएसपी बंद कर रही है। आंकड़ों के मुताबिक इस वर्ष 2021-22 में रिकॉर्ड 49 लाख किसानों से 4.3 करोड़ टन गेहूं की खरीद की जो गत वर्षों के मुकाबले कहीं अधिक है और लगभग 85 हजार करोड़ रुपए से अधिक की राशि डीबीटी के माध्यम से किसानों के खाते में पहुँची।
खेती की लागत, किसान की शक्ति, बाजार की जरूरत का बेहतर तरीके से समझकर केन्द्र सरकार ने रबी फसलों के न्यूनतम समर्थन मूल्य घोषित किए है। सरकार कृषि फसलों के एमएसपी निर्धारित करने के लिए उस फार्मूले पर कार्य कर रही है जो किसानों को लागत पर 50 प्रतिशत मुनाफे की गारंटी देता है। बुवाई पूर्व रबी फसलों की एमएसपी की घोषणा कृषि को नई रफ्तार देगी।

कृषि क्षेत्र के समग्र विकास के लिए मोदी सरकार ने प्रतिबद्धता दर्शाते हुए कल्याणकारी योजनाओं के क्रियान्वयन में प्रभावी कदम उठाए है। छोटे किसानों को पहले बीज खरीदने और बुवाई की अन्य तैयारियों के लिए कर्ज लेना पड़ता था। किसानों की इन मुश्किलों को देखते हुए पीएम किसान सम्मान निधि से सभी किसानों को वर्ष में तीन बार 2 हजार रु. की सहायता डीबीटी के जरिए दी जा रही है।

गत अप्रैल में फर्टिलाइजर कंपनियों ने डीएपी, एनपीके आदि उर्वरक के दामों को दुगुना करने का निर्णय लिया तो केंद्र सरकार ने तत्काल फैसला किया कि फर्टिलाइजर की कीमतें नहीं बढेंगी .कंपनियों द्वारा डीएपी की बोरी के दाम 1200 रु. से बढ़ा कर 1900 रु. तक कर दिए गए थे . केंद्र ने किसानों को तत्काल राहत देते हुए डीएपी पर 140 प्रतिशत सब्सिडी बढ़ाने का फैसला किया, और किसानों को डीएपी पुराने दामों पर ही मिल रही है। हालाँकि सब्सिडी बढऩे से खजाने पर सालाना लगभग 15 हजार करोड़ रु. का अतिरिक्त बोझ आएगा। खेती की लागत ना बढऩे देने के लिए केंद्र सरकार का ये अभूतपूर्व कदम था।

वहीं कृषि को उद्योग की तरह विकसित करने के लिए 1 लाख करोड़ रुपए के एग्री इंफ्रास्ट्रक्चर फंड की स्थापना की गई ताकि फसल कटाई के बाद के प्रबंधन के लिए कोल्ड स्टोरेज, वेयरहाउस आदि का निर्माण हो। किसानों की आय दोगुनी करने के क्रम में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (ए.आई.) सहित नई और उभरती टेक्नालॉजी के उपयोग को बढ़ावा देवे वित्तीय सुविधा देने के लिए केन्द्र ने अपनी योजनाओं में सामयिक संशोधन भी किए हैं। हाल ही में ड्रोन उपयोग के नियमों को सरलीकृत किया गया ताकि कृषि में भी इसका अधिक से अधिक उपयोग ही जिससे मानव श्रम और समय की बचत और खेती की लागत में कमी आए।

केन्द्र सरकार के ये समग्र प्रयास, रबी फसलों की एमएसपी में बढ़ौत्री, महत्वपूर्ण योजनाओं की घोषणाएं उम्मीद जगाती है कि इनके प्रभावी क्रियान्वयन से देश की खेती में आमूल-चूल परिवर्तन होगा, किसानों की तकदीर बदलेगी, युवा पीढ़ी के सपनों का पंख मिलेंगे। और 2022 तक किसानों की आय दोगुनी करने का मोदी सरकार का संकल्प पूरा होगा। इन योजनाओं की निरंतरता और सतत गतिमान रहने से ही देश के कृषि क्षेत्र के फलक पर विकास का इन्द्रधनुष अपनी सतरंगी छटा बिखेरेगा।

Previous articleहिंदुत्व के दर्शन से परिचित होने का दिन
Next articleक्षमापना का अर्थ है क्षमा मांगना भी और क्षमा करना भी

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here