सेवा में जुटे अभाविप कार्यकर्ता

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‘समाज मेरा, मैं समाज का’ भाव करता है प्रेरित

अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद ने भी अपने सामाजिक उत्तरदायित्व का निर्वहन करते हुए कोरोना संक्रमण को रोकने के प्रयास में अपनी अहम् भूमिका निभाई। मध्यप्रदेश में तीन प्रांत अनुक्रम से मालवा, मध्यभारत और महाकौशल प्रांत और छत्तीसगढ़ के कार्यकर्ता लगातार इस कार्य में लगे रहे। कार्य को करने में स्वयं के भी संक्रमित होने की आशंका के बीच अनेक कार्यकर्ता अपने घरों से बाहर आए और विभिन्न अभियानों के माध्यम से समाज के साथ खड़े रहे।

  • चेतस सुखाडिय़ा

पिछले लगभग डेढ़ साल में हमारी दुनिया एकदम बदल गई है। हजारों लोगों की जान चली गई, लाखों लोग बीमार हुए, इन सब पर कोरोना वायरस का कहर टूटा। जो लोग इस वायरस के प्रकोप से बचे, उनका रहन-सहन भी एकदम बदल गया है। ये वायरस दिसंबर 2019 में चीन के वुहान शहर में पहली बार सामने आया था, उसके बाद से दुनिया में सब कुछ उलट पुलट हो गया। शुरुआत वुहान से ही हुई, जहां पूरे शहर की तालाबंदी कर दी गई। पहली लहर में तो इटली में इतनी बड़ी तादाद में वायरस से लोग मरे कि वहां दूसरे विश्व युद्ध के बाद से पहली बार लोगों की आवाजाही पर इतनी सख्त पाबंदी लगानी पड़ी और देखते ही देखते कोरोना वायरस ने पूरी दुनिया को अपनी चपेट में ले लिया। लाखों लोग प्रभावित हुए।

कईयों को अपनी जान गवानी पड़ी। संक्रमण से बचने के लिए लाकडाउन लगाया गया, लोगों को अपने घरों में बंद होने को मजबूर होना पड़ा। दुनिया भर में उड़ानें रद्द कर दी गई हैं। बहुत से संबंध सोशल डिस्टेंसिंग के शिकार हो गए हैं। हमारा देश, प्रदेश भी इसके प्रभाव से बच नहीं पाया। संक्रमण के दूसरे दौर में तो दुख की सुनामी जैसी रही। अनेक लोगों ने अपने स्वजन खोए, अनेक परिवारों ने अपने आधार स्तम्भ खोया। कितने ही बालक- बालिका अनाथ हुए। ऐसे समय में देश को बचाना, हर एक नागरिक को संक्रमण से बचाना, यही अपना प्राथमिक कार्य होना चाहिए।

देश की केंद्र सरकार व राज्य सरकारें अपने-अपने स्तर पर प्रयासरत है, परन्तु संक्रमण से निजात पाने केवल शासकीय प्रयास ही पर्याप्त नहीं। इस हेतु समाज का सामूहिक व अनुशासित प्रयास भी अपेक्षित है। ऐसे समय में अपनी नैतिक जिम्मेदारी समझते हुए कई सेवाभावी कार्यकर्ता, संगठन आगे आएं। अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद ने भी अपने सामाजिक उत्तरदायित्व का निर्वहन करते हुए कोरोना संक्रमण को रोकने के प्रयास में अपनी अहम् भूमिका निभाई।

मध्यप्रदेश में तीन प्रांत अनुक्रम से मालवा, मध्यभारत और महाकौशल प्रांत और छत्तीसगढ़ के कार्यकर्ता लगातार इस कार्य में लगे रहे। कार्य को करने में स्वयं के भी संक्रमित होने की आशंका के बीच अनेक कार्यकर्ता अपने घरों से बाहर आए और विभिन्न अभियानों के माध्यम से समाज के साथ खड़े रहे। हेल्पलाइन के माध्यम से हजारों लोगों को मदद की गई, वह चाहे अस्पतालों में बेड उपलब्धता हो, ऑक्सीजन की उपलब्धता हो, वेंटीलेटर बेड की आवश्यकता हो, प्लाज्मा की या भोजन की। मध्यभारत प्रांत के ‘स्टूडेंट फॉर सेवाÓ के तत्वावधान में नौ भाषाओँ में साठ से भी अधिक चिकित्सकों ने पांच हजार से भी अधिक होम क्वारंटाइन मरीजों को ऑनलाइन परामर्श दिया।

परिषद कार्यकर्ता कई पीडि़त, वंचित लोगों के लिए देवदूत बने, उनकी मदद की और आशीर्वाद पाया। परिषद के कार्यकर्ता यहां ही नहीं रुके, वे कोविड केयर सेंटर के अंदर भी पीपीई किट पहन कर संक्रमित लोगों की सेवा हो या उनके साथ सकारात्मक संवाद, उनके स्वस्थ होने की उम्मीद को संबल देने का कार्य किया। छात्रा कार्यकर्ता भी सेवा कार्य में बढ़-चढ़ कर लगी, हमारी मध्य भारत प्रांत मंत्री कु. शालिनी और ग्वालियर की कार्यकर्ता कु. मानवता ने भी पीपीई कीट पहनकर कोरोना संक्रमित लोगों से संवाद किया, उनके परिवार जनों से वीडियो कॉलिंग से बात भी कराई।

रोज कमाई कर अपना पेट भरने वाले श्रमिक तथा गरीब परिवारों तक भोजन और राशन पहुँचाने का कार्य लगातार चल रहा है। छत्तीसगढ़ के कांकेर जिले की पखांजूर के कार्यकर्ताओं ने तो दुर्गम व नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में राशन पहुँचाने का उम्दा कार्य किया। वही मध्यभारत प्रांत की शिवपुरी के कार्यकर्ता, मालवा के नीमच तथा छत्तीसगढ़ के बलौदा बाजार जिले के कार्यकर्ता ने जीव मात्र की चिंता करते हुए पशुओं के लिए चारे की व्यवस्था की।

विशेष रूप से कोरोना संक्रमण की चेन को तोडऩे के लिए विद्यार्थी परिषद मालवा प्रांत द्वारा चलाया गया कोरोना मुक्ति अभियान हो, मध्य भारत प्रांत द्वारा चलाया गया आरोग्य अभियान या महाकौशल प्रांत द्वारा चलाए गया ‘ब्रेक द चेनÓ अभियान। इन अभियानों के माध्यम से अनेक कार्यकर्ता शहरों की सेवा बस्ती से लेकर ग्रामीण क्षेत्रों आम जनों की थर्मल स्क्रीनिंग, ऑक्सीजन लेवल की जांच करते हुए संदिग्ध मिले लोगों को दवाई वितरण हो या उन्हें अस्पताल पहुंचाने का कार्य हो, गांव या शहर के सार्वजनिक स्थानों को सैनेटाइज करना हो, इन सब कार्य को लगातार इन अभियानों के माध्यम से चलाते हुए संपूर्ण मध्यप्रदेश के करीबन 200 सेवा बस्ती, 1750 गांवों में लगभग चार लाख लोगों की स्क्रीनिंग की। किसी विद्यार्थी संगठन के द्वारा किए गए इस कार्य को अनुकरणीय पहल के रूप में देखा जा सकता है।

कुदरती आपदा हो या मानवसर्जित आपदा, परिषद कार्यकर्ता हमेशा ‘समाज मेरा, मैं समाज काÓ इस भाव से अभिप्रेत होते हुए अपनी संवेदनाओं के साथ खड़ा रहता है। यही कारण है कि मध्यप्रदेश के माननीय मुख्यमंत्री से लेकर कई मंत्रियों, सांसदों ने सोशल मीडिया के माध्यम से परिषद द्वारा चलाए गए सेवा कार्य को सराहना की। विद्यार्थी परिषद के सेवा कार्य के यह कदम अभी रुके नहीं, अविरत सतत यह यज्ञ अब भी जारी है।

सेवा के उदाहरण बने मिसाल

आप मेरे लिए भगवान रात को लगभग दो बजे निवाड़ी के कार्यकर्ता को कॉल आता है, मेरी बेटी को बचा लो। रुदन के साथ यह मुंबई से एक मां की आवाज थी। उनकी बेटी दिल्ली में है, संक्रमित है, अकेली है। आधी रात को दिल्ली संपर्क किया गया, वहां कार्यकर्ता से बात होकर उस बहन की मदद की गई। कुछ समय बाद माताजी का फिर से कॉल आया और उस कार्यकर्ता को भावुक होते कहा बेटा ‘तुम मेरे लिए भगवान होÓ।

प्रयाग में अन्नपूर्णा बने कार्यकर्ता

छत्तीसगढ़ का प्रयाग माने जाने वाले राजिम से बहती महानदी में स्वर्गस्थ हुए अपने स्वजन की अस्थियां विसर्जित करने आते हजारों लोगों के लिए भोजन, पानी की व्यवस्था लाकडाउन के चलते कठिन बन गई। ऐसे में लगातार नि:शुल्क भोजन, नाश्ते की व्यवस्था कर नवापारा इकाई के कार्यकर्ता उनके लिए अन्नपूर्णा बने।

रक्तदान के लिए हमें भी बुलाना

इंदौर के पास के बिलवाली गांव में स्क्रीनिंग करने गए कार्यकर्ता को देख कई लोगों ने अपने दरवाजे बंद कर दिए। गांव के एक सज्जन के माध्यम से स्क्रीनिंग का उद्देश्य तथा लाभ बताया गया। संगठन और सेवा कार्य की जानकारी दी। सामने से प्रतिक्रिया आई अरे, हमने आपको गलत समझ लिया, माफ करें। आप बहुत अच्छा काम करते हो। कभी रक्तदान की भी आवश्यकता पड़े तो हमें भी याद करना, हम भी रक्तदान करेंगे।

(लेखक अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद के मध्य क्षेत्र क्षेत्रीय संगठन मंत्री हैं।)

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