Home » एक प्रोग्राम,एक पाठ्यक्रम, एक परीक्षा पद्धति पर विचार होना चाहिए

एक प्रोग्राम,एक पाठ्यक्रम, एक परीक्षा पद्धति पर विचार होना चाहिए

  • प्रो.मनमोहन प्रकाश
    ये हमारे देश के शिक्षा तंत्र को क्या हो गया है। बोर्ड से लेकर विश्वविद्यालयों तक तथा अच्छे शिक्षण संस्थानों में प्रवेश से लेकर नोकरी तक के लिए आयोजित प्रतियोगी परीक्षाओं में कभी प्रश्न पत्र लीक के समाचार प्राप्त होते हैं, कभी सिलेबस के बाहर प्रश्न पूछे जाने की खबरें प्राप्त होती हैं और परीक्षार्थियों द्वारा आपत्ति लेने पर उन प्रश्नों को निरस्त कर दिये जाते हैं। कहीं उत्तर पुस्तिकाओं का मूल्यांकन सही नहीं होता है। किन्हीं परीक्षा केन्द्रों से परीक्षा में नकल करने और कहीं से सामुहिक नकल कराने की खबरें समय-समय पर आती रहती हैं। इतना ही नहीं कभी परीक्षा परिणाम जरूरत से ज्यादा देरी से आते है तो कहीं परीक्षा परिणाम जरूरत से ज्यादा जल्दी आ जाते हैं। कभी-कभी तो परीक्षार्थियों को परीक्षा परिणाम में की गई अनियमितता के लिए, उत्तर पुस्तिकाओं के मूल्यांकन से सहमत नहीं होने कारण न्यायालय की शरण में जाना पड़ता है। ये सब घटनाएं देश के शिक्षा तंत्र की इमेज को निश्चित रूप से प्रभावित करती हैं। इतना ही नहीं शिक्षा नीति 2020 को केन्द्र सरकार द्वारा स्वीकृति प्रदान कर देने के बाद भी भारत के सभी राज्यों में अभी तक लागू नहीं किया जा सका। परिणाम यह है कि कुछ विश्वविद्यालय और स्वशासी शिक्षा संस्थानों में सेमेस्टर परीक्षा पद्धति लागू है तो कुछ अन्य में वार्षिक परीक्षा पद्धति लागू है। कहीं स्नातक प्रोग्राम तीन वर्ष का है, कहीं स्नातक प्रोग्राम चार वर्ष का है। एक ही प्रोग्राम और कोर्स के लिए पाठ्यक्रम भी अलग-अलग दिखाई देते हैं, प्रश्न पत्र का पेटर्न भी अलग-अलग हैं, अंतरिक्ष परीक्षाओं का अधिभार और मूल्यांकन का तरीका भी भिन्न है। विधार्थियों की महाविद्यालयों में दैनिक उपस्थित घट रही है और कोचिंग संस्थानों में उपस्थित बढ़ रही है। शिक्षण संस्थानों में मूल भूत सुविधा की दृष्टि से मानक भी एक समान नजर नहीं आते हैं। विधार्थियों में अनुशासन और राष्ट्र प्रेम की भावना जगाने वाली एनसीसी की सुविधा भी प्रत्येक शिक्षण संस्थानों में नहीं है जबकि भारत अभी भी पूरी तरह से आतंकवाद, नक्सलवाद से मुक्त नहीं हुआ है और विभिन्न देशों के मध्य चल रहे युद्ध और शीत युद्ध के कारण निकट भविष्य में विश्व युद्ध की संभावनाओं से कोई इंकार नहीं कर रहा है।शरीर और मन को स्वस्थ रखने में और हार या जीत की विभिन्न परिस्थितियों सामंजस्य स्थापित करने में खेलों का अपना विशेष स्थान है ऐसे में कुछ ही शिक्षण संस्थानों से आउटडोर और इनडोर खेल की सुविधाएं नजर आती है। सबसे चिंता जनक बात यह है कि प्रतियोगी परीक्षाओं (नोकरी/प्रवेश हेतु) और उपाधि परिक्षाओं के प्रश्नपत्र में कोई समानता नजर नहीं आती है। जबकि किसी भी प्रोग्राम की शिक्षा प्राप्त कर लेने के बाद अधिकांश विधार्थियों का लक्ष्य प्रतियोगी परीक्षाओं के माध्यम से अच्छी नोकरी प्राप्त करना होता है। अतः जब हमारा देश एक राष्ट्र,एक निशान,एक विधान की दिशा में आगे बढ़ रहा है तो उसे एक जैसे शिक्षा प्रोग्राम के लिए एक पाठ्यक्रम,एक परीक्षा पद्धति पर भी विचार करना चाहिए।

Swadesh Bhopal group of newspapers has its editions from Bhopal, Raipur, Bilaspur, Jabalpur and Sagar in madhya pradesh (India). Swadesh.in is news portal and web TV.

@2023 – All Right Reserved. Designed and Developed by Sortd