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भारत में ईंधन की कीमतों का एक झूठा आख्यान

  • हरदीप एस पुरी
    प्रमुख नैरेटिव को अक्सर एक वस्तुपरक सत्य के रूप में प्रस्तुत किया जाता है। यह याद रखना महत्वपूर्ण है कि ऐसे नैरेटिव अक्सर उन लोगों द्वारा तैयार किए जाते हैं, जिनका अपना एक एजेंडा होता है और इसलिए उन्हें एक परिप्रेक्ष्य की आवश्यकता होती है। ईएच कार की प्रसिद्ध उक्ति है, इतिहासकार अपने तथ्यों के बिना जड़हीन और निरर्थक है; इतिहासकार के बिना तथ्य मृत और अर्थहीन हैं।“ इसका एक उदाहरण है – ईंधन की कीमतों का संदर्भ और इससे जुड़ी समझ।
    पेट्रोल और डीजल की लगातार कम कीमतें, जो संभव नहीं हैं, केवल कल्पना की दुनिया के लिए हो सकतीं हैं। भारत में ईंधन की कीमतें बहुत अधिक हैं, यह एक ऐसे नैरेटिव पर आधारित है, जो बहुत ही दोषपूर्ण है। वास्तव में, ये कीमतें, मुख्य रूप से प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की ऊर्जा उपलब्धता और इसे किफायती बनाए रखने के प्रयासों के कारण, दुनिया की सबसे कम कीमतों में से एक हैं। पीएम मोदी ने मई 2022 और नवंबर 2021 में केंद्रीय उत्पाद शुल्क में दो बार कटौती की थी – जिनसे पेट्रोल में 13 रुपये प्रति लीटर और डीजल में 15 रुपये प्रति लीटर की कमी आयी। इनसे केंद्रीय खजाने पर सालाना 2.2 लाख करोड़ रुपये का अतिरिक्त भार पड़ा। इसके अलावा, भारत सरकार ने घरेलू उपभोक्ताओं के हितों को ध्यान में रखते हुए, निर्यातकों को मुनाफाखोरी से रोकने के लिए घरेलू उत्पादित पेट्रोलियम उत्पादों पर निर्यात उपकर और विंडफॉल (अप्रत्याशित) टैक्स भी लगाया।
    तेल विपणन कंपनियों ने (ओएमसी) अच्छे कॉर्पोरेट नागरिक” होने का परिचय देते हुए, भारतीय नागरिकों को नियंत्रित दरों पर पेट्रोल और डीजल की आपूर्ति सुनिश्चित की, जिसके कारण इन्हें ऊंची कीमतों के दौर में भारी नुकसान उठाना पड़ा। सार्वजनिक क्षेत्र की ओएमसी द्वारा इन कीमतों को 6 अप्रैल 2022 से अपरिवर्तित रखा गया है। कई राज्य सरकारें ने भी पेट्रोल और डीजल की कीमतों को कम करने के लिए वैट में कटौती की। यहां कई बातें महत्वपूर्ण हैं, सभी नहीं – लेकिन कुछ राज्य वैट दरों में कटौती नहीं करने और राज्य में कीमतों को कम नहीं करने के अपने दृढ़ संकल्प पर अडिग रहे।
    गौरतलब है कि बीजेपी शासित राज्यों और जिन राज्यों ने अपनी वैट दरों में कटौती की है, वहां पेट्रोल और डीजल पर वैट की दर आम तौर पर 14.50 रुपये से 17.50 रुपये प्रति लीटर है, जबकि राज्यों में वैट की सीमा 26 रुपये से 32 रुपये प्रति लीटर है। इससे आम आदमी की जेब पर असर पड़ता है और खर्च में भारी अंतर आता है। कांग्रेस शासित राजस्थान में उपभोक्ता, पेट्रोल के लिए 108.48 रुपये प्रति लीटर और डीजल के लिए 93.80 रुपये प्रति लीटर दे रहे हैं, जो पड़ोसी बीजेपी शासित उत्तर प्रदेश की तुलना में पेट्रोल पर लगभग 12 रुपये प्रति लीटर और डीजल पर लगभग 4 रुपये प्रति लीटर अधिक है, जहां उपभोक्ता क्रमशः 96.57 रुपये प्रति लीटर और 89.76 रुपये प्रति लीटर का भुगतान करते हैं।
    यूपीए सरकार द्वारा 2005-12 के बीच किए गए स्थायी नुकसान के कारण, जिसके तहत ओएमसी को अंडर-रिकवरी के बजाय 1.44 लाख करोड़ रुपये के दीर्घकालिक तेल बांड जारी किए गए थे, भारतीय करदाता अभी भी ब्याज + मूलधन के रूप में 3.2 लाख करोड़ रुपये का भुगतान कर रहे हैं। वाईएसआर-कांग्रेस शासित आंध्र प्रदेश में पेट्रोल और डीजल की कीमत क्रमशः 110.48 रुपये प्रति लीटर और 98.27 रुपये प्रति लीटर है, जो कर्नाटक की तुलना में लगभग 10 रुपये अधिक है, जहां यह क्रमशः 101.94 रुपये प्रति लीटर और रु. 87.89 रुपये प्रति लीटर है। आंध्र प्रदेश ने लगातार दूसरे साल भारत में सबसे ज्यादा पेट्रोल की कीमत वाले राज्य का रिकॉर्ड बनाया है। टीआरएस शासित तेलंगाना में, उपभोक्ता भारत में पेट्रोल की दूसरी उच्चतम दर @109.66 रुपये प्रति लीटर का भुगतान करते हैं। यह यूपी (96.57 रुपये प्रतिलीटर) की तुलना में 13 रुपये प्रति लीटर अधिक है।
    प्रतिशत में, तेलंगाना में पेट्रोल पर वैट की दर 35.2 प्रतिशत है, जबकि यूपी में यह 26.8 प्रतिशत है! यूपी के 17.48 प्रतिशत की तुलना में तेलंगाना में डीजल पर वैट की दर 27 प्रतिशत है! पश्चिम बंगाल में, उपभोक्ता पेट्रोल के लिए 106.03 रुपये प्रति लीटर और डीजल के लिए 92.76 रुपये प्रति लीटर का भुगतान करते हैं, जबकि असम में उपभोक्ता क्रमशः 97.02 रुपये प्रति लीटर और 88.30 रुपये प्रति लीटर का भुगतान करते हैं। यदि दीदी को अपने लोगों की परवाह है, तो वे पेट्रोल के दाम, 100 रुपये प्रति लीटर से कम क्यों नहीं कर देतीं हैं? पाखंड साफ़, स्पष्ट और बिना ठोस आधार के हैं, जिसे सभी देख सकते हैं। यहां तक कि जब विमान ईंधन की कीमतों की बात आती है, जो आतिथ्य और यात्रा क्षेत्र के लिए महत्वपूर्ण हैं, तो कुछ राज्यों का घोर लालच स्पष्ट और साफ़ दिखाई पड़ता है। हाल के महाराष्ट्र बजट 2023 में: राज्य सरकार ने जेट ईंधन पर वैट को 18 प्रतिशत तक घटा दिया है, जबकि भारत का सबसे बड़ा विमानन केंद्र – दिल्ली – उन राज्यों में से एक है, जो अभी भी जेट ईंधन पर 25प्रतिशत तक का ऊंचा टैक्स लगाते हैं। अंतर्राष्ट्रीय गैस सूचकांकों (जापान कोरिया) में जनवरी 2021 और फरवरी 2023 के बीच प्राकृतिक गैस की कीमतों में 228 प्रतिशत तक की वृद्धि हुई है, भारत में (सीएनजी) मूल्य वृद्धि (दिल्ली प्रतिनिधि बाजार) लगभग 83 प्रतिशत तक सीमित थी।
    ऐसा 2013-14 के आवंटन से घरेलू गैस आवंटन में लगभग 250 प्रतिशत तक की वृद्धि करने और सीएनजी (परिवहन) और पीएनजी (घरेलू) की आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए घरेलू गैस को अन्य गैर-प्राथमिकता वाले क्षेत्रों से अलग करने जैसे कदमों के कारण संभव हुआ। हाल ही में प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में कैबिनेट ने घरेलू उत्पादित प्राकृतिक गैस के मूल्य निर्धारण पद्धति को संशोधित करने का एक बड़ा निर्णय लिया है, जो भारत के गैस आधारित अर्थव्यवस्था के लक्ष्य को प्रोत्साहन प्रदान करेगा।
    यह संतुलित निर्णय, भारतीय प्राकृतिक गैस की कीमत को भारतीय क्रूड बास्केट के मासिक औसत की तुलना में 10 प्रतिशत पर निर्धारित करता है। उद्योग के साथ-साथ उपभोक्ताओं द्वारा संतुलित सुधार के रूप में इस निर्णय की सराहना की जा रही है। उद्योग जगत अधिक गतिशील और मजबूत मूल्य निर्धारण व्यवस्था से लाभान्वित होता है, उपभोक्ता पहले से ही इनका लाभ उठा रहे हैं, क्योंकि घरेलू पीएनजी और सीएनजी की कीमतों में 7-8 रुपये तक की कटौती की गयी है। हालांकि, इस संकटपूर्ण समय में अपने 1.4 बिलियन नागरिकों को सुलभ और सस्ती ऊर्जा प्रदान करने में भारत की अभूतपूर्व सफलता को पूरी दुनिया स्वीकार करती है, लेकिन कुछ पाखंडी राज्य सरकारें और राजनीतिक नेता अपनी नागरिक-विरोधी रणनीति को छिपाते हुए अर्थहीन बातें बोलते रहते हैं। यह उनके लिए ईंधन पर राज्यों के टैक्स में कटौती करने का समय है।

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