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संकटकाल में सेवा का संकल्प

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गजेंद्र सिंह तोमर
कोविड-19 संक्रमण के कठिन समय में जब रिश्तेदार भी मदद से अपने हाथ खींच रहे हैं, आपदा को अपनी स्वार्थसिद्धि के अवसर के रूप में भुनाने के कुत्सित प्रयास निरंतर किये जा रहे हैं, राजनीतिक संगठन आरोप-प्रत्यारोप का भद्दा खेल कर रहे हैं, तब ‘वसुधा है परिवार हमारा, यह सच कर दिखलाएंगेÓ के गान में झूमते हुए अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद् के कार्यकर्ता अपनी चिंता छोड़कर समाज के अपने बन्धु-बान्धवों की पीड़ा दूर करने में अहर्निश लगे हुए हैं और अपने ‘स्वÓ को समाज के साथ एकीकृत करने का उदाहरण प्रस्तुत कर रहे हैं। पूरे देश में जारी परिषद् के सेवाकार्यों में अभाविप मध्यभारत प्रान्त के कार्यकर्ता भी योगदान दे रहे हैं। गत एक वर्ष से परिषद् के कार्यकर्ताओं ने अपनी व्यक्तिगत क्षमता से परे जाकर भी हर तरह से लोगों की सहायता करने का प्रयास किया है। कोरोना संक्रमण के पहले दौर में जहाँ प्रान्त के कार्यकर्ताओं ने निरन्तर जन-जागरुकता कार्यक्रमों के संचालन, जरूरतमंद परिवारों को राशन वितरण, प्रवासियों के लिए भोजन पैकैट की व्यवस्था, सेवारत ‘कोरोना वॉरियर्सÓ की सहायता करने, मास्क वितरण करने, आयुर्वेदिक काढ़ा वितरण करने जैसे कार्य किये; वहीं आपदा के दूसरे और पहले से भयानक दौर में भी कार्यकर्ताओं ने ऑक्सीजन सिलेण्डर, आवश्यक दवाओं, वेंटिलेटर्स, ब्लड एवं ब्लड-प्लाज़्मा आदि प्राप्त करने में संक्रमित रोगियों के परिजनों की सहायता की। प्रान्त के कार्यकर्ताओं ने अब ‘आरोग्यÓ अभियान प्रारम्भ कर गाँव-गाँव एवं बस्ती-बस्ती तक जाकर स्वास्थ्य परीक्षण करने और संक्रमण के संदिग्धों को दवाएँ वितरित करने का बीड़ा उठाया है। इस अभियान के अन्तर्गत प्रान्त में अब तक 18 जिलों के 363 गाँवों एवं 142 बस्तियों के 19 हजार 357 परिवारों का स्वास्थ्य सर्वेक्षण किया गया है।
इस सर्वेक्षण के अन्तर्गत उपर्युक्त परिवारों से अब तक 86 हजार 457 लोगों का स्वास्थ्य परीक्षण किया गया है, जिनमें से 5977 कोरोना संदिग्ध लोगों को दवाएँ दी गईं तथा 139 लोगों को (जिनमें संक्रमण का स्तर तुलनात्मक रूप से अधिक पाया गया था) अस्पतालों में भर्ती कराया गया। इनके अतिरिक्त मेडिविजऩ और जिज्ञासा आयामों में लगे कार्यकर्ता नि:शुल्क चिकित्सकीय परामर्श देने का कार्य प्रारंभ से ही करते आ रहे हैं। पूरे प्रान्तभर में कार्यकर्ता स्वस्फूर्त रूप से टीकाकरण के संबंध में लोगों में व्याप्त भ्रान्तियों को दूर करते हुए उन्हे टीका लगवाने के लिए प्रेरित भी कर रहे हैं। इतना ही नहीं, आगे चलकर रोगियों के लिए रक्त की उपलब्धता कम न हो इस विचार से कार्यकर्ताओं ने टीकाकरण से पूर्व रक्तदान करने हेतु युवाओं का आह्वान भी किया है। कोरोना संक्रमण की महामारी के विरुद्ध जारी वैश्विक संघर्ष में अपने अध्ययन के साथ सामंजस्य बैठाते हुए लगभग एक वर्ष से विभिन्न तरह के सेवाकार्यों के माध्यम से अपना योगदान दे रहे अभाविप मध्यभारत प्रान्त के कार्यकर्ताओं ने – ‘सेवा है संस्कार हमाराÓ – इस पंक्ति को ही चरितार्थ किया है। उन्होंने यह दिखलाया है कि विद्यार्थी परिषद् केवल परिसरों में छात्रहितों से सरोकार रखने वाला संगठन नहीं है अपितु यह तो समाज जीवन के प्रत्येक क्षेत्र से सरोकार रखते हुए विद्यार्थियों को समाजजीवन के विस्तृत कार्यक्षेत्र में भूमिका प्रदान करने वाला संगठन है। मध्यभारत प्रान्त के सभी कार्यकर्ताओं को साधुवाद ।
(लेखक अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद के राष्ट्रीय मंत्री हैं। )

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