भोजन, पत्तल और आपका स्वास्थ्य

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दीप्ति अंगरीश
सब कितना बदल गया है। विकास ने दिया तो बहुत हमें, पर कितना कुछ छीन लिया है हमसे। इसका आभास तब जब हाथ में सिर्फ सिफर ही रहता है। विकास के खिलाफ नहीं हैं हम, पर जेहन में याद पड़ता है कि कब आखिरी बार खुलकर हंसे थे, कब पन्नों की खुशबू से रोम-रोम महक गया था, कब पेन खरीदा था, बुक शेल्फ में चुनिंदा साहित्य रहता था, किताबों में छिपा गुलाब का फूल कभी सूंधना, पुराना लव कार्ड सालों बाद पढ़ा….ऐसे बहुत-सी क्रम हैं, जो विकास की दौड़ में पीछे छूट गए हैं।
छिपा-छिपी में बहुत सी चीजें विलुप्त होती जा रही हैं। इसी क्रम में पत्तल को कैसे भूल जाएं ? कुछ दिन पहले ही एक रेस्तरां गईं, हरे भरे पत्तल में भोजन मिला। मन अंदर से वाह कर उठा। क्या आपके साथ भी ऐसा हुआ है ?
पत्तल, जिस पर न जाने कितनी भोज खाई है हमनें। अपनों के साथ। कुछ वर्षों तक समारोह का मतलब होता था मौज-मस्ती और हरे-हरे पत्तों में भोज। देखिए विकास ने यह भी तो छीन लिया हमसे। सबकुछ डिजिटल हो गया है। जहां यह संभव नहीं, तो उसे रेडी टू यूज कर दिया है। अब ऐसे लुभावनी चीजों के प्रति आकर्षण होना स्वाभाविक है। हरे-हरे पत्तों के साथ भी ऐसा ही हुआ है। विकास ने इसका हमें विकल्प दिया है डिस्पोस्बेल। इसमें लगी प्लास्टिक की कोटिंग हमारी सेहत के लिए घातक है। साथ ही वातावरण के लिए दूषित ब्यार से दम घोंट रही है। और तो और इन डिस्पोस्बेल बर्तनों ने कितने रोजगार छीन लिए हैं। पर हम संकल्प लें, तो अपने स्तर पर पुरानी विरासत को फिर से अपना सकते हैं। यह हर किसी के लिए सकारात्मक बयार लाएगी।
बीते साल से आम लोग भी साइंस पर बात करने लगे हैं। उनकी रोजमर्रा की बातों में साइंस आ गया है। यह देन है कोरोना का। कोरोना ने साइंस की बात छेड दी है। तो हम भी पत्तल का साइंस आपको बताते हैं। बोटैनिकल साइंस के अनुसार, देश में 2000 से अधिक वनस्पतियों की पत्तियों से पत्तल तैयार किए जाते रहे हैं। अब विज्ञान भी मानता है कि इनके असंख्य चिकित्सकीय लाभ हैं। जिस विकास ने सिंगल यूज बर्तन में प्लास्टिक, थर्माकोल के ऑप्शन में उतरा है, वह आरामदायक भले हों पर जहरीले हैं। इनके बार-बार प्रयोग से शरीर का कौन-सा लील लेंगे पता नहीं चलेगा। क्योंकि थर्माकोल व प्लास्टिक के उपयोग से स्वास्थ्य को बहुत हानी भी पहुंच रही है।
अब लोग भी धोने के झंझट से बचने के लिए भंडारों, चाय के खोमचों, बढ़ी दावतों में इन रेडी टू यूज और सिंगल यूज बर्तनों का धड़ल्ले से प्रयोग करते है। कभी सोचा है आपने इस फायदे के चक्कर में आप कितना नुकसान कर रहे हैं। अपना और देश का। और तो और इसने कितनों का रोजगार लील लिया है। खैर, बहुतेरों को इतने विकराल नुकसान की चोट जेहन पर लगी है। यही वजह अब बंद हो चुका पत्तलों का कारोबार फिर से फल-फूल रहा है। माना कि ये कृत्रिम तरीके से बर्तनों के मुकाबले ये महंगे हैं। पर सबकी फिटनेस के आगे ये कीमत आपको खलेगी नहीं। बोटैनिकल साइंस और पत्तल के कारोबारियों के अनुसार सुपारी के पत्तों की पत्तल केरला में बनाई जा रही हैं। इनकी कीमत भी ज्यादा नही है। तकरीबन 1.5, 2, रुपये में साइज और क्वांटिटी के हिसाब से पत्तल लिए जा सकते हैं। केले के पत्ते में ऐसे कई सारे गुण होते है जो ग्रीन टी में पाए जाते है। इसमे मौजूद पॉलीफिनॉल एक प्राकृतिक एंटीऑक्सीडेंट और इसके फायदे सीधे आपके स्वास्थ्य पर होते हैं। केले के पत्ते पर रोजाना खाना खाने से आप बीमारी मुक्त तो होते ही साथ ही स्वस्थ भी रहते है। केले का पत्ता एंटी बैक्टीरिया किटाणुओं को मारता है। जिस वजह से आप कम बीमार होते है। केले के पत्ते पर खाना खाने पर आपकी स्किन भी साफ होती है क्योंकि केले के पत्तों में प्रचुर मात्रा में एपिगालोकेटचीन गलेट और इजीसीजी जैसे पॉलीफिनॉल्स पाये जाते हैं और शायद यही वजह है कि साऊथ इंडिया के लोग इस पर भोजन करना सही समझते है। (लेखिका वरिष्ठ पत्रकार हैं।)

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