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तंबाकू जैसे जानलेवा जहर के प्रति अधिक जागरूकता की आवश्यकता

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योगेश कुमार गोयल
तंबाकू, बीड़ी, सिगार, हुक्का, क्रेटेक्स, जर्दा, पान मसाला, खर्रा, चिलम, खैनी, गुटखा, ई-सिगरेट और न जाने कितने ही प्रकार से इस जानलेवा पदार्थ का सेवन हमारे समाज में बडे पैमाने पर किया जाता हैं। बड़ी विडम्बना यह है कि तम्बाकू हमें बहुत ही आसानी से उपलब्ध हो जाता है और बच्चे से लेकर जवान, बुजुर्ग तक इस घातक नशीले पदार्थ के आदी नजर आते हैं। ग्रामीण और दूरदराज के इलाकों में बच्चे बड़ी मात्रा में तंबाकू के आदी हैं। स्कूल और कॉलेज के छात्र भी इसका सेवन करते हैं। महाराष्ट्र के चंद्रपुर जिले के ग्रामीण इलाके में एक प्रसंग में जाने के दौरान मैंने वहां लोगों की भीड़ में एक पांच साल के बच्चे को तंबाकू का सेवन करते देखा था, यह वाकया देखकर मैं दंग रह गया कि इतना छोटा बच्चा कैसे घातक जहर का आदी हो गया और जैसे ही मैंने बच्चे को पुकारा, वह भाग गया, जब वहां के लोगों से मैंने इस विषय पर बात की, तो उन्होंने कहा कि यहां तो यह आम बात है, नशा न करने वाले लोगों को सिर्फ तंबाकू की गंध से चक्कर, मितली आने लगती है, फिर न जाने कैसे छोटे-छोटे बच्चे भी इस जानलेवा नशे के चंगुल में फंस जाते हैं, यह एक बहुत ही गंभीर विषय है।
नशे जैसी कई समस्याएं हमारे समाज में तेजी से बढ़ रही हैं, लेकिन लोगों में जागरूकता ही नहीं है। हमारे समाज में दो लोगों का वर्ग है जो इस तरह की गंभीर समस्याओं को अच्छी तरह समझते हैं। प्रथम वर्ग वे हैं जो सामाजिक समस्याओं की गहराई के बारे में जानकर, विश्लेषण करके, निष्कर्ष निकालकर सामाजिक उत्तरदायित्व को बखूबी निभाते हैं और दूसरा वर्ग, जो उस समस्या से पीडि़त हैं या उस समस्या से गुजर चुके हैं, वे ऐसी समस्याओं को समझते हैं इनके अलावा सभी लोग अपने-अपने स्वार्थ के अनुसार जीते हैं और कहते है कि इस समस्या से हमारा क्या संबंध? अर्थात जब तक उस समस्या से हमारा खुद का नुकसान होता नही, हम जागेंगे नही। यह बहुत ही दुखद है कि हमारे समाज में ऐसी सामाजिक बुराइयों को दूर करने का जज्बा बहुत कम लोगों में देखने को मिलता है। जबकि प्रत्येक नागरिक का समाज के प्रति नैतिक दायित्व होता है कि समाज में फैली समस्याओं को दूर करने के लिए हमेशा तत्पर रहें।
तंबाकू उत्पादों में हजारों जहरीले पदार्थ होते हैं। इसमें मुख्य रूप से निकोटीन, कार्बन मोनोऑक्साइड, टार होता है। निकोटीन ज्यादातर पूरे शरीर में, हड्डियों, मांसपेशियों में फैलता है। कार्बन मोनोऑक्साइड रक्त में ले जाने वाली ऑक्सीजन की मात्रा को कम करता है। जिससे सांस लेने में दिक्कत होती है। टार एक चिपचिपा पदार्थ है, जिसमें बेंज़ोपाइरीन होता है, जो घातक कैंसर के लिए सहायक के रूप में कार्य करता है। अन्य घातक पदार्थों में कार्बन डाइऑक्साइड, नाइट्रोजन ऑक्साइड, अमोनिया, वाष्पशील नाइट्रोसमाइन, हाइड्रोजन साइनाइड, वाष्पशील सल्फर युक्त यौगिक, वाष्पशील हाइड्रोकार्बन, अल्कोहल, एल्डिहाइड और कीटोन शामिल हैं और इनमें से कुछ यौगिक शरीर के विभिन्न हिस्सों में कैंसर पैदा करने के लिए जाने जाते हैं। चबाने वाले तंबाकू उत्पादों का सेवन करने के बाद सार्वजनिक स्थानों पर थूकने से भी कोरोना, तपेदिक, स्वाइन फ्लू, इंसेफेलाइटिस जैसे कई संक्रामक रोग फैलने की संभावना है।
तंबाकू अपने आधे उपयोगकर्ताओं की जान ले लेता है। तंबाकू से हर साल 80 लाख से ज्यादा लोगों की मौत होती है। उन मौतों में से 70 लाख से अधिक प्रत्यक्ष तंबाकू के उपयोग का परिणाम हैं, जबकि लगभग 10-12 लाख मौत धूम्रपान न करने वाले परंतु दुसरे के धूम्रपान द्वारा निर्मित धुएं के संपर्क में आने का परिणाम है, इसे निष्क्रिय धूम्रपान अथवा या सेकेंड हैंड धुएं के संपर्क में आना कहते है। लगभग आधे बच्चे नियमित रूप से सार्वजनिक स्थानों पर तंबाकू के धुएं से प्रदूषित हवा में सांस लेते हैं, और 65000 हर साल इस धुएं के कारण होने वाली बीमारियों से मर जाते हैं। विश्व के 130 करोड तंबाकू उपयोगकर्ताओं में से 80 प्रतिशत से अधिक निम्न और मध्यम आय वाले देशों में रहते हैं। तंबाकू दुनिया के अब तक के सबसे बड़े सार्वजनिक स्वास्थ्य खतरों में से एक है।

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