Home अमृत कलश भगवान को किसने बनाया

भगवान को किसने बनाया

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यदि प्रत्येक वस्तु को कोई बनाने वाला है तो भगवान को बनाने वाला कौन है? इसका उत्तर है कि जगत के बनाने वाले का बनाने वाला कोई नहीं होता। वह बनाने वाला तो स्वत: सिद्ध होता है। क्योंकि वह जड़ वस्तु नहीं है, स्वयंप्रकाश, सर्वशक्तिमान है। इसलिए भगवान है। जिस तत्व को हम जानना चाहते हैं उसके जानकारों की बात पर विश्वास करके पहले मानते हैं, तभी उसे जानते हैं। उसी प्रकार, ईश्वर तत्व को समझने के लिए पहले उसे जानने वाले महापुरुषों और उसे जानने की प्रक्रिया पर विश्वास करना उचित है।

बिना विश्वास के मनुष्य का छोटे से छोटा कोई भी काम नहीं चलता। इसलिए भी विश्वास करना ही जानने का उपाय है, यह बात सिद्ध होती है। भगवान है- यह विश्वास मनुष्य को इसलिए भी करना चाहिए कि उसको स्वयं अपने होने का प्रत्यक्ष बोध है? कोई भी प्राणी यह नहीं समझता कि मैं नहीं हूं अत: उसे विचार करना चाहिए कि मैं कौन हूं?

विचार करने पर पता लगेगा कि शरीर तो मैं नहीं हो सकता क्योंकि यह बदलता रहता है? और मैं नहीं बदलता। फिर भी फिर विचार करना चाहिए कि मैं शरीर नहीं, तो क्या मैं मन और बुद्धि हूं? विचार करने पर पता चलेगा कि मैं मन, बुद्धि भी नहीं हो सकता क्योंकि उनको मैं जानता हूं और जान लेने में आने वाली वस्तु से जानने वाला सदैव भिन्न होता है। फिर विचार करना चाहिए कि मैं कौन हूं? किसके आश्रित हूं और मेरा आधार क्या है?

विचार करने पर पता लगेगा कि जो मेरे ज्ञान का विषय है, जिसको मैं जान सकता हूं वह न तो मेरा आधार हो सकता है और न वह मैं ही हो सकता हूं। क्योंकि जानने में आने वाली सभी वस्तुएं परिवर्तनशील और नाशवान है एवं मैं सदा एकरस और अविनाशी हूं। अत: मेरा आधार, संचालक और प्रेरक कोई चेतन अविनाशी ही हो सकता है। और वही भगवान है।
-जयदयाल गोयनका

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