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परछाई का रहस्य

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जिस दिन आप अपनी परछाई को जान लेंगे उस दिन आप भी उसी अग्नि के समान हो जायेंगे जिसकी अपनी परछाई नहीं अपितु जो आपकी परछाई से आपको मिलाने में मदद करती है।अग्नि की परछाई क्यों नहीं होती? परछाई हमारे साथ-साथ चलती है,तो फिर अग्नि में ऐसा क्या है जो उसकी परछाई ही नहीं बनती। परछाई है क्या ? परछाई अर्थात छाया से परे। हमारी छाया से परे कौन है? हम तो नहीं हो सकते,और अगर यदि हम ही है तो हमारे होने का तात्पर्य क्या है- ये भी एक महत्वपूर्ण विषय है। यहाँ एक पहलू और भी है कि छाया का प्रतिबिंब हमेशा प्रकाश में ही दिखाई देता है। इन दोनों का भी गहरा संबंध है।

कैसे? छाया से परे और प्रकाश(अग्नि से उत्पन्न) ये दोनों ही ऐसे तत्व हैं जिन्हें देखने अथवा अनुभव करने हेतु हमें अपनी बुद्धि से परे जाना पड़ता है,क्योंकि परे को जानने हेतु हमें भी तो परे होना पड़ेगा। और ये जनाने का काम करता है प्रकाश जिसमें हम अनुभूति करते हैं अपनी छाया में छिपे हमारे वास्तविक स्वरूप की।

एक सरल सा उदाहरण है इसका-ट्यूबलाइट के प्रकाश में जितनी भी चीज़ें सामने आतीं हैं उन सभी की परछाई दिखती है पर उस ट्यूबलाइट के प्रकाश की नहींअर्थात स्पष्ट है कि परछाई किसी भी तत्व की वो छाया है जिसे देखने के लिये प्रकाश की आवश्यकता पड़ती है, परंतु जो प्रकाश है वो तो स्वयं में ही वो शक्ति है जो परछाई को जन्म दे, तो उसकी अनुभूति भी तो प्रकाश के रूप में ही होगी । तो अग्नि(प्रकाश) की परछाई इसी कारण से नहीं होती क्योंकि वो अपने आप में पूर्णत: पवित्र है और मार्ग को प्रकाशित करने का माध्यम भी।

तो जिस दिन आप अपनी परछाई को जान लेंगे उस दिन आप भी उसी अग्नि के समान हो जाएँगे जिसकी अपनी परछाई नहीं अपितु जो आपकी परछाई से आपको मिलाने में मदद करती है। मनन अवश्य कीजिएगा।

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