Home अमृत कलश मानव अधिकार के प्रवक्ता

मानव अधिकार के प्रवक्ता

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अजीगर्त नाम का एक दरिद्र ब्राह्मण था। शुन:शेप इसका मंझला बेटा था। सत्यवादी राजा हरिशचन्द्र ने वरुण की [ पुत्र- बलि की] मनौती की थी। लेकिन अपने बेटे रोहित के स्थान पर उसने बलि के लिये शुन:शेप को [ क्रीतपुत्र ]खरीद लिया। शुन:शेप को जब यूप से बांधा गया, तब उसने जो क्रन्दन किया था-कस्यनूनं कतमस्यामृतानांमनामहे चारुदेवस्यनाम। इस सूक्त में मानो स्वयं करुणा ही उतर आयी है। मरते समय वह रक्षा के लिये मां-बाप को न पुकारे तो किसे पुकारे? पर जब किसी की हिम्मत नहीं हुई, तो स्वयं अजीगर्त ही कुठार लेकर खड़ा हो गया।

उस समय विश्वामित्र ने आकर मानव-अधिकार का जो स्वर उठाया, उसने विश्वामित्र को भारत के शीर्ष-मनीषियों में अन्यतम बना दिया। मानव-अधिकार के सर्वप्रथम उद्घोषक विश्वामित्र थे। जिन्होंने नरबलि के लिये यूप से बंधे हुए शुन: शेप को मुक्त कराकर उसे पुत्र रूप में स्वीकार किया और सबके सामने राजा और राजपुरोहित की भत्र्सना की। ऐतरेय में शुन:शेप की कथा है।
-राजेन्द्र रंजन चतुर्वेदी

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