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विद्यार्थियों में श्रद्धा

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मैं गहरे दुख की भावना से स्वीकार करता हूं कि विद्यार्थी जगत से श्रद्धा धीरे-धीरे उठती जा रही है। जब मैं किसी हिंदू लड़के को राम नाम का आश्रय लेने का सुझाव देता हूं तो वह मेरे मुंह की ओर देखने लगता है और आश्चर्य में पड़ जाता है कि राम कौन हैं। जब मैं किसी मुसलमान लड़के से कुरान पढऩे और खुदा से डरने को कहता हूं तो मैं स्वीकार करता है कि वह कुरान नहीं पढ़ सकता और अल्लाह तो केवल कहने की बात है।

ऐसे लड़कों को मैं विश्वास दिला सकता हूं कि सच्ची शिक्षा की पहली सीढ़ी शुद्ध हृदय है। अगर आपको मिलने वाली शिक्षा आपको ईश्वर से विमुख करती है तो मैं नहीं जानता कि उससे आपको कैसे सहायता मिलेगी और आप संसार की कैसे मदद करेंगे। आपने अपने अभिनंदन पत्र में ठीक कहा है कि मैं मानव जाति की सेवा द्वारा ईश्वर दर्शन का प्रयत्न कर रहा हूं।

क्योंकि मुझे मालूम है कि ईश्वर न तो आकाश में है और न पाताल में है परंतु प्रत्येक में है। भले ही वह हिंदू हो, ब्राह्मण, क्षत्रिय, वैश्य, शूद्र या इतर हो, मुसलमान हो,पारसी हो, ईसाई हो, पुरुष हो या स्त्री हो।

  • महात्मा गांधी
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