Home अमृत कलश इच्छाएं दु:ख की जननी

इच्छाएं दु:ख की जननी

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हमारी सामथ्र्य से बाहर तथा अनावश्यक अपेक्षाएं ही हमें रुलाती हैं। सुखी जीवन जीने का सिर्फ एक ही रास्ता है वह है अभाव की तरफ दृष्टि न डालना। आज हमारी स्थिति यह है जो हमें प्राप्त है उसका आनंद तो लेते नहीं, वरन जो प्राप्त नहीं है उसका चिन्तन करके जीवन को शोकमय कर लेते हैं।

दु:ख का मूल कारण हमारी आवश्यकताएं नहीं, हमारी इच्छाएं हैं। हमारी आवश्यकताएं तो कभी पूर्ण भी हो सकती हैं मगर इच्छाएं नहीं। इच्छाएं कभी पूरी नहीं हो सकतीं और न ही किसी की हुईं आज तक। एक इच्छा पूरी होती है तभी दूसरी खड़ी हो जाती है। इसलिए शास्त्रकारों ने लिख दिया-‘आशा हि परमं दुखं नैराश्यं परमं सुखं।

हमें संसार में कोई दु:खी नहीं कर सकता, हमारी अपेक्षाएं ही हमें रुलाती हैं। अति इच्छा रखने वाले और असंतोषी हमेशा दु:खी ही रहते हैं। आशैव राक्षसी पुंसामाशैव विषमञ्जरी। आशैव जीर्णमदिरा नैराश्यं परमं सुखम्॥ इन्सान के लिए आशा ही राक्षसी, विष लता, और जीर्ण मदिरा है । आशारहितता परम् सुख है। ध्यायतो विषयान् पुंस: संगस्तेषूपजायते। संगात् संजायते काम: कामात् क्रोधोऽभिजायते ॥ (भगवद्गीता 2762) विषयों का ध्यान करने से उनके प्रति आसक्ति हो जाती है यह आसक्ति ही कामना को जन्म देती है और कामना ही क्रोध को जन्म देती है। दिनयामिन्यौ सायं प्रात:,शिशिरवसन्तौ पुनरायात:। काल: क्रीड़ति गच्छत्यायुस्तदपि न मुन्च्त्याशावायु:॥

दिन और रात, शाम और सुबह, सर्दी और बसंत बार-बार आते-जाते रहते है काल की इस क्रीड़ा के साथ जीवन नष्ट होता रहता है पर इच्छाओं का अंत कभी नहीं होता है। क्षुध्र तृट् आशा: कुटुम्बिन्यों मयि जीवति नान्यगा: । तासामाशा महासाध्वी कदाचिन्मां न मुञ्चति ।। भूख ,प्यास और इच्छा मनुष्य की तीन पत्नियों की तरह है जो कि उसे कभी छोड़कर नहीं जाती । उसमें भी आशा महासाध्वी है क्योंकि वह उसे कभी भी नहीं छोड़ती । भूख और प्यास तो थोड़े समय के लिए साथ छोड़ भी देते हैं ,लेकिन आशा मनुष्य के मन से निकलती ही नहीं ।

आपूर्यमाणमचलप्रातिष्ठं समुद्रमाप: प्राविशन्ति यद्वत् । तद्वत्कामा यं प्राविशन्ति सर्वे स शान्तिमाप्नोति न कामकामी॥ (श्रीमद्भगवद्गीता 2770)। जो व्यक्ति समय समय पर मन में उत्पन्न हुई आशाओं से उस तरह अविचलित रहता है जैसे अनेक नदियां सागर में मिलने पर भी सागर का जल नहीं बढ़ता, वह शांत ही रहता है ऐसे ही व्यक्ति सुखी हो सकते हैं।

  • एसएन मिश्रा
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