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पृथ्वी दिवस: विद्यार्थियों ने जाने मौसम परिवर्तन से लेकर पृथ्वी संरक्षण तक के तथ्य

हमने पृथ्वी का दोहन ना करके शोषण किया है और अब हमें पृथ्वी को पोषण प्रदान करने की आवश्यकता है। हम देख रहे हैं कि आजकल मौसम में तेजी से बदलाव हो रहा है। हम अपने स्तर पर पौधे लगाकर, सिंगल यूज़ प्लास्टिक का उपयोग ना करके, पानी को बचाकर, बिजली को बचाकर भी अपना योगदान दे सकते हैं। विद्यार्थी पृथ्वी को बचाने के लिए संकल्प लें। यह बात मप्र विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी परिषद के वैज्ञानिक विकास शेन्डे ने कही।

मप्र विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी परिषद भोपाल द्वारा कन्या शिक्षा परिसर, रायसेन में पृथ्वी दिवस का आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम में मुख्य वक्ता के रूप में मौसम विज्ञान विभाग के वैज्ञानिक डॉ. वेद प्रकाश सिंह, मप्र विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी परिषद के वैज्ञानिक विकास शेन्डे उपस्थित रहे।  इस अवसर पर वैज्ञानिक विकास शेन्डे ने पृथ्वी दिवस पर अपने विचार व्यक्त किए। उन्होंने पृथ्वी दिवस मनाने के उद्देश्य को विस्तार पूर्वक बताया। उन्होंने बताया कि कैसे हम पृथ्वी के संरक्षण के लिए कार्य कर सकते हैं। पृथ्वी दिवस पर संस्था में आमंत्रित वैज्ञानिकों एवं अतिथियों द्वारा पौधारोपण भी किया गया। इस अवसर पर संस्था की छात्राओं समेत पूरा स्टाफ  उपस्थित रहा । 

प्रकृति में संतुलन बनाना आवश्यक : डॉ. वेद प्रकाश

डॉ. वेद प्रकाश सिंह ने कहा कि पृथ्वी के शोषण के कारण प्राकृतिक असंतुलन की स्थिति बन रही है, अतएव प्रकृति में संतुलन बनाना आवश्यक है। आजकल पृथ्वी का तापमान बढ़ रहा है। सामान्यत: यह 40 डिग्री के नीचे रहता था, किंतु अब 50 के आसपास पहुंच रहा है। 52 डिग्री से ऊपर का तापमान बायोलॉजिकल सेल्स को नष्ट करता है, इससे पृथ्वी के जीव जंतु एवं वनस्पति के जीवन में समस्या उत्पन्न हो सकती है। डॉ. सिंह ने बच्चों की जिज्ञासाओं उत्तर देकर उनका ज्ञानार्जन किया।

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