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भोज विश्वविद्यालय ने प्रशासन अकादमी में दो दिवसीय राष्ट्रीय सम्मेलन का किया आयोजन, राज्यपाल ने किया शुभारंभ

दूरस्थ शिक्षा प्रणाली के विस्तार के लिए जरूरी है कि ज्ञान और कौशल के विकास में भाषा बाधा नहीं बनने पाए, इसके लिए क्षेत्रीय भाषाओं में दूरस्थ शिक्षा में स्मार्ट लर्निंग टूल्स विकसित करने होंगे। मध्यप्रदेश जैसे विशाल भू-भाग वाले राज्य में शिक्षा की पहुंच बढ़ाने और उसे विद्यार्थी परक बनाने के प्रयासों में दूरवर्ती शिक्षा प्रभावी साधन बन सकती है। सुदूर, ग्रामीण अंचलों, वंचित वर्गों, अनुसूचित जाति, जनजाति, महिला और अन्य पिछड़े वर्ग को मुख्यधारा में शामिल करने में दूरस्थ शिक्षा निर्णायक हो सकती है। यह बात राज्यपाल मंगुभाई पटेल ने भोज विश्वविद्यालय के दो दिवसीय राष्ट्रीय सम्मेलन के शुभारंभ अवसर पर कही।

राजधानी स्थित मप्र भोज मुक्त विश्वविद्यालय द्वारा राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 (एनईपी) और मुक्त व दूरस्थ शिक्षा संस्थाओं की चुनौतियों और अवसरों  (ओडीएल) पर दो दिवसीय राष्ट्रीय सम्मेलन का आयोजन किया जा रहा है। आरसीवीपी नरोन्हा प्रशासन एवं प्रबंधकीय अकादमी में आयोजित इस सम्मेलन का शुभारंभ राज्यपाल मंगुभाई पटेल और उच्च शिक्षा मंत्री डॉ मोहन यादव ने शनिवार को किया। इस संगोष्ठी में देश भर से ओपन और डिस्टेंस लर्निंग के शिक्षाविद और शोधार्थी शामिल हो रहे हैं। सम्मेलन में मप्र भोज मुक्त विश्वविद्यालय भोपाल के कुलपति संजय तिवारी ने स्वागत उद्भोधन दिया एवं रजिस्ट्रार अनिल कुमार शर्मा ने आभार माना। प्रारंभ में राज्यपाल को अभिनंदन-पत्र भेंट कर सम्मानित किया गया।

दूरस्थ शिक्षा स्वावलंबन का माध्यम बने :

राज्यपाल पटेल ने कहा कि दूरस्थ शिक्षा स्वावलंबन का माध्यम बने। व्यावसायिक, रोजगार परक पाठ्यक्रमों के विद्यार्थियों के प्लेसमेंट में भी शिक्षण, प्रशिक्षण संस्थान द्वारा आवश्यक सहयोग किया जाए। शिक्षण, प्रशिक्षण पाठ्यक्रमों का आधार रोजगार, व्यवसाय और इन्डस्ट्री की जरूरतों के अनुसार होना चाहिए। ज्ञान विज्ञान, टेक्नोलॉजी,  अकादमिक क्षेत्र में कुशल, दक्ष बनाने और कौशल उन्नयन के लिए गुणवत्तापूर्ण शिक्षा डिस्टेंस लर्निंग में उपलब्ध होनी चाहिए। पाठ्यक्रमों का संयोजन भी संबंधित क्षेत्र के ख्यातनाम, विषय और डिस्टेंस लर्निंग प्रणाली के विशेषज्ञों की सहभागिता से किया जाना आवश्यक है। शिक्षा को व्यक्ति परक बनाने में दूरस्थ शिक्षा-प्रणाली के विस्तार की अपार संभावनाएं हैं। आवश्यकता, प्रणाली को छात्र हितकारी बनाए जाने की है। व्यवस्थाएँ इस प्रकार की होनी चाहिए जो वंचित वर्गोंं, महिलाओं, सुदूर क्षेत्र के रहवासियों और गरीबों की आवश्यकताओं के अनुरूप हों। विद्यार्थी की जरूरत के मुताबिक आर्टिफि शियल इंटेलिजेंस के द्वारा शिक्षण सामग्री उपलब्ध करायी जाना भी जरूरी है। 

मुक्त विश्वविद्यालय का इतिहास पांच हजार साल पुराना : उच्च शिक्षा मंत्री

इस अवसर पर उच्च शिक्षा मंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि मुक्त विश्वविद्यालय का इतिहास पांच हजार साल पुराना है। उस समय मुक्त विश्वविद्यालय के छात्र कितने प्रतिभावान थे। इसका अंदाजा हम एकलव्य के नाम से ही लगा सकते हैं। इसके अलावा भगवान कृष्ण और सुदामा की बात करें तो वह केवल 64 दिन पढऩे गए थे। वह एक आदर्श विद्यार्थी थे और बाद में एक आचार्य और गुरू की पदवी पर चले गए। उन्होने कहा कि भोज मुक्त विश्वविद्यालय भी  इंदिरा गांधी राष्ट्रीय मुक्त विश्वविद्यालय के समान चेनल प्रारंभ करे। ज्ञान की गंगा के प्रवाह को बढ़ाने और विस्तारित करने के लिए दूरस्थ शिक्षा प्रणाली में गुणवत्ता पूर्ण शिक्षा की व्यवस्था की जाना चाहिए। यह सुनिश्चित किया जाए कि पारंपरिक शिक्षा और दूरस्थ शिक्षा की गुणवत्ता का स्तर समान हो।  

पारंपरिक शिक्षा और दूरस्थ शिक्षा की उपाधियां समतुल्य : प्रो. नागेश्वर राव

इंदिरा गांधी राष्ट्रीय मुक्त विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. नागेश्वर राव ने कहा कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए डिस्टेंस लर्निंग एजूकेशन में अपार अवसर उपलब्ध हुए हैं। नैक द्वारा मुक्त विश्वविद्यालयों का भी ग्रेडेशन किया जाने लगा है। इग्नू और बाबा साहब मुक्त विश्वविद्यालय अहमदाबाद को नैक द्वारा ए डबल प्लस  की ग्रेडिंग दी गई है। राष्ट्रीय शिक्षा नीति में पारंपरिक, दूरस्थ शिक्षा और छात्र केन्द्रित व्यवस्थाएं की गई हैं। विश्वविद्यालय अनुदान आयोग ने वर्ष 2020 के नियमन के द्वारा पारंपरिक शिक्षा और दूरस्थ शिक्षा की उपाधियों को समतुल्य माने जाने की व्यवस्था भी कर दी है। 

मुुक्त विवि डिस्टेंस लर्निंग की व्यवस्थाएं स्कूल स्तर पर उपलब्ध कराएं : रविन्द्र कन्हारे

प्रवेश एवं शुल्क नियामक समिति के अध्यक्ष रविन्द्र कन्हारे ने कहा कि डिस्टेंस लर्निंग उच्च शिक्षा के ‘रीच- टू-अनरीचÓ के लक्ष्य की प्राप्ति का प्रभावी साधन है। आवश्यकता है कि मुक्त विश्वविद्यालय डिस्टेंस लर्निंग की व्यवस्थाएं हायर सेकेन्ड्री विद्यालयों के स्तर पर उपलब्ध कराएं। कृष्णकांत हांडीकी गोवाहाटी के कुलपति राजेन्द्र प्रसाद दास ने कहा कि दूरस्थ शिक्षा की पहुंच और क्षेत्र असीमित है, जबकि पारंपरिक शिक्षा की सीमाएं हैं।

5 तकनीकी सत्र, 42 से अधिक शोध पत्र :

राष्ट्रीय सम्मेलन में कुल 5 तकनीकी सत्र होंगे। लगभग 42 से अधिक शोध पत्र प्रस्तुत किए जाएंगे। दूरस्थ शिक्षा से संबंधित विभिन्न विद्वान अपने शोध पत्र प्रस्तुत करेंगे एवं उनपर विचार विमर्श करेंगे। राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 को दूरस्थ और मुक्त शिक्षा संस्थानों में लागू किए जाने एवं इस दिशा में आ रही चुनौतियों और उन्हें दूर करने के लिए प्रयासों पर चर्चा की जाएगी। संगोष्ठी में दूरस्थ और मुक्त शिक्षा के पाठ्यक्रमों, शैक्षणिक विधियों और मूल्यांकन संबंधी विभिन्न विषयों पर मंथन किया जाएगा। दूरस्थ और मुक्त शिक्षा में तकनीक के माध्यम से गुणवत्ता बढ़ाने पर भी गहन विचार-विमर्श किया जाएगा।  

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