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दमोह के गंगा-जमुना विद्यालय में प्राचार्य सहित 3 महिला शिक्षकों का धर्मांतरण, बाल आयोग के कई अहम खुलासे

दमोह के गंगा जमुना स्कूल का मामला थमने का नाम नहीं ले रहा है। इस मामले में एक और बड़ा खुलाशा हुआ है। जिसमें विद्यालय की प्रार्चाय समेत 3 महिला शिक्षका के धर्मातंरण की बात सामने आ रही है। इसके अलावा प्रबंधक के पास हजारों एकड़ जमीन भी होने का दावा किया जा रहा है। गौरतलब है कि माध्यमिक शिक्षा बोर्ड के परिणाम घोषित होने के बाद गंगा जमुना विद्यालय से हिन्दू बच्चियों के हिजाब में फोटों पोस्टर में लगाई थी, पोस्टर के वायरल होने के बाद इस पर जांच शुरु हुई। अभी तक स्कूल की मान्यता रद्द कर दिया गया है।

प्राचार्य ने मानी सरनेम बदलने की बात
राज्य बाल आयोग की टीम ने शुक्रवार को दमोह के गंगा-जमना स्कूल का निरीक्षण किया था। जिसमें ये बात सामने आई कि महिला प्रिंसिपल और दो महिला शिक्षिक जॉइनिंग के बाद कन्वर्ट हुईं। आयोग से बातचीत के दौरान प्रिंसिपल अफसा शेख ने स्वीकार किया कि स्कूल में आने से पहले नाम के साथ ‘श्रीवास्तव’ सरनेम लगाती थी। शिक्षिका अनीता खान ने बताया कि वो पहले अनीता यादव थी। एक और शिक्षिका तबस्सुम बानो का नाम रिकॉर्ड में मिला, जिनके बारे में प्रिंसिपल ने आयोग को बताया कि वो पहले ‘जैन’ सरनेम लिखती थी। हालांकि प्रिंसिपल और शिक्षिका ने यह स्पष्ट नहीं किया कि वो धर्मांतरित क्यों हुईं।
आयोग के सदस्यों ने संचालक मोहम्मद इदरिस से जब इस बारे में पूछा तो उसने भी गोलमोल जवाब दिया। सूत्रों के मुताबिक स्कूल की ओर से शिक्षिकाओं को जॉइनिंग के बाद परमानेंट करने के लिए धर्मांतरित होने का लालच दिया जाता है। 1208 बच्चों वाले इस स्कूल पर आरोप है कि वहां हिन्दू लड़कियों को हिजाब पहनने पर मजबूर किया जाता है। आयोग के सदस्य ओंकार सिंह ने कहा कि 2012 में शुरू हुए इस स्कूल में शुरू से ही हिजाब पहनाया जा रहा है। 2018 में स्कूल की बैठक में ड्रेस कोड को मान्यता दी थी। इसके अलावा आज तक बैठक नहीं हुई। स्कूल संचालक हिजाब को जांच के दौरान स्कार्फ बताता रहा।

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मां का नाम साहिल श्रीवास्तव तो पति शेख
बाल कल्याण समिति के सदस्य दीपक तिवारी भी राज्य बाल आयोग की टीम के साथ जांच करने के लिए गंगा जमुना स्कूल गए थे। उन्होंने बताया, ‘जब स्कूल प्रबंधन से स्टाफ की सूची मांगी, तो उसमें प्राचार्य का नाम अफसा शेख लिखा था। उनके पति का नाम शेख इकबाल जबकि मां का नाम साहिल श्रीवास्तव लिखा था। मां श्रीवास्तव सरनेम लिख रही है और बेटी शेख तो यह धर्म परिवर्तन का मामला ही है। टीचर अनीता खान के पति का नाम फिरोज खान, लेकिन मां का निर्मला यादव लिखा मिला। इसी प्रकार एक और शिक्षिका तबस्सुम बानो के पति का नाम साबिर अली और मां का नाम चंद्रकांता जैन है। इससे पूरी तरह स्पष्ट है कि इन तीनों महिलाओं का धर्मांतरण हुआ है।’
तिवारी ने कहा, ‘स्कूल में बच्चों को दीनी तालीम देना शुरू कर दिया गया था। कोई भी बच्चा वहां श्लोक नहीं बता पा रहा था। उन्हें हिंदू धर्म से जुड़ीं अन्य चीजों के बारे में भी पता नहीं था जबकि आयतें कंठस्थ थीं। इससे साफ है कि ये ब्रेनवाश करके बच्चों को अपने धर्म की तरफ जोड़ने का षड्यंत्र है।’

विद्यालय में होती हैं 4 तरह से इसलामिक प्रार्थनाएं

आयोग की दूसरी सदस्य मेघा पवार ने कहा कि स्टूडेंट्स ने बताया कि स्कूल में चार तरह की इस्लामिक प्रार्थनाएं रोज होती थीं। बच्चियों ने बताया कि हिजाब न पहनने पर स्कूल का स्टाफ नाराज होता था। छठी से ग्यारहवीं की हर छात्रा को हिजाब पहनना जरूरी था।

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