पाकिस्तान दिन-ब-दिन भारत की कूटनीति से घिरता जा रहा है। भारत की वर्तमान सरकार शुरुआती दिनों से ही प्रयासरत है कि दुनिया के बड़े देश पाकिस्तान की मदद करना बंद कर दें। उसे विश्व बिरादरी से अलग-थलग कर दिया जाए। पाकिस्तान आतंकवाद का पोषण करने वाला देश बन गया है। वह दुनिया से विकास के नाम पर आर्थिक मदद प्राप्त करता है, जबकि उस पैसे से आतंकवाद को पालता-पोषता है। जब तक पाकिस्तान की आर्थिक कमर नहीं तोड़ी जाएगी, उसकी नकेल कसना मुश्किल होगा। भारत के निरंतर प्रयासों के बाद अब यह होता हुआ दिखाई दे रहा है। पिछले सप्ताह पैरिस में फाइनेंशियल एक्शन टास्क फोर्स (एफएटीएफ) की बैठक में पाकिस्तान को 'ग्रे लिस्टÓ वाले देशों में शामिल करने का फैसला लिया गया। एफएटीएफ अंतरराष्ट्रीय स्तर पर टेरर फंडिंग और मनी लॉन्ड्रिंग पर नजर रखने वाली संस्था है। इस फैसले से दुनिया में एक बड़ा संदेश भी गया है कि कुछेक राष्ट्रों में कूटनीतिक दृष्टिकोण से ज्यादातर मुद्दों पर सहमति न हो तब भी आतंकवाद के खिलाफ वे एक साथ आ सकते हैं। एफएटीएफ के 39 सदस्य देशों में से तुर्की को छोड़कर बाकी सभी ने अमेरिका की ओर से पाकिस्तान के खिलाफ पेश किए गए प्रस्ताव का समर्थन किया। पाकिस्तान को निगरानी सूची में डालने के लिए फ्रांस, ब्रिटेन और भारत सहित तमाम इसके सह प्रस्तावक थे। निगरानी सूची में शामिल होने के बाद पाकिस्तान से होने वाली हर अंतरराष्ट्रीय वित्तीय लेन-देन पर कड़ी निगरानी रखी जाएगी, जिससे उसकी अर्थव्यवस्था और बिगड़ सकती है। दुनिया भर की बड़ी कंपनियां पाकिस्तान में निवेश करने से बचेंगी। आईएमएफ और वल्र्ड बैंक भी उसे ऋण देने से बचना चाहेंगे। पाकिस्तान के कारोबारियों पर भी इसका असर पड़ेगा और वे अपने राजनेताओं पर रवैया बदलने के लिए दबाव डाल सकते हैं। पिछले महीने ही अमेरिका ने उसे दी जाने वाली करोड़ों डॉलर की सैन्य सहायता रोक दी। दबाव पडऩे पर वह अफगानिस्तान में सक्रिय आतंकी संगठनों के खिलाफ सख्त रुख अपनाता है, लेकिन भारत को निशाना बनाना जारी रखता है। यह रवैया बदलने तक उस पर दबाव बनाए रखना चाहिए। फिलहाल, पाकिस्तान को निगरानी सूची में डाला जाना भारत की बड़ी कूटनीतिक सफलता है। इसका कितना लाभ मिलेगा, यह तो आने वाला समय ही बताएगा। क्योंकि, इससे पूर्व भी पाकिस्तान को निगरानी सूची में डाला जा चुका है। किंतु, इस बार दुनिया का दृष्टिकोण पाकिस्तान के प्रति पूरी तरह अलग है। यह भारत के प्रयासों से संभव हुआ है। अमेरिका भी अब पाकिस्तान के विरुद्ध खुलकर निर्णय कर रहा है। इसलिए माना जा रहा है कि इस बार पाकिस्तान के लिए अधिक मुश्किल होने वाली है। पाकिस्तान को सबक सिखाने और उसे सही रास्ते पर लाने के लिए भारत को यथासंभव प्रयास करने ही चाहिए। यह तय है कि यदि पाकिस्तान को लंबे समय तक आर्थिक मदद नहीं मिली, तो वहाँ घरेलु राजनीति में बड़ा भारी फेरबदल हो सकता है। जनता भी आतंकवादियों के विरुद्ध कार्रवाई करने के लिए दबाव बना सकती है। बहरहाल, भारत यह संदेश देने में कामयाब रहा कि उसकी कूटनीति काम कर रही है। यह भी बताने में उसे सफलता मिली है कि पाकिस्तान ही विश्व में फैल रहे आतंकवाद के लिए प्रमुख अपराधी है। 

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