वाशिंगटन। वाशिंगटन डीसी में एक बार फिर मुक्त कराची कैंपन शुरू हो गया है। यह कैंपेन का दूसरा चरण है। अभियान की शुरूआत डॉ. मार्टीन लूथर किंग के जन्मदिन पर की गई थी। कैंपेन के तहत मुक्त कराची के बैनर के साथ 100 टैक्सी अमेरिका की राजधानी की सड़कों पर घूमती नजर आएंगी। यह टैक्सियां शहर के महत्वपूर्ण स्थानों जैसे व्हाइट हाउस, कैपिटल हिल, राज्य विभाग और सांसदों के कार्यालय तक भी जाएंगी। यह लोग पाकिस्तान के सिंध प्रांत में रह रहे लोगों के अधिकारों के लिए लड़ रहे हैं। अमेरिका के लीडिंग अखबार वाशिंगटन पोस्ट ने इस कैंपेन के तहत 4 पेज का रैप भी छापा था। इसमें कैंपेन के उद्देश्य बताए गए थे। यह कैंपेन पूरी दुनिया का ध्यान अपनी ओर अाकर्षित कर रहा है। कराची में मानवाधिकारों के दुरुपयोग पर अमेरिकी सांसद भी अपनी आवाज उठा रहे हैं। 

कैंपेन का उद्देश्य सिंध के लोगों की दुर्दशा के बारे में जागरूकता पैदा करना

कराची के प्रवक्ता नदीम नुसरत ने कहा की मुक्त कराची अभियान का कोई राजनीतिक उद्देश्य नहीं है। इसका उद्देश्य दुनिया भर में कराची के लोक-धर्म, धर्मनिरपेक्ष लोगों और सिंध के अन्य शहरी क्षेत्रों की दुर्दशा के बारे में जागरुकता पैदा करना है, जो पाकिस्तान की सेनाओं के हाथों में एक के बाद एक दमन का सामना कर रहे हैं।

अमेरिका और पूरे विश्व को ध्यान देने की आवश्यकता

नदीम नुसरत ने आगे कहा कि इस अभियान का उद्देश्य अमेरिकी प्रशासन तक इस संदेश को पहुंचाना है कि आतंकवाद और आतंकवाद के खिलाफ युद्ध में लगभग 70 मिलियन मोहाजिर अमेरिकी सहयोगियों पर भरोसा करते हैं। कराची को तालिबान, आईएसआईएस और समान विचारधारा वाली चरमपंथी ताकतों से खतरा है। अमेरिका और विश्व समुदाय को तुरंत इस पर ध्यान देने की आवश्यकता है।

हजारों मोहाजिरों की हत्या

1992 से पाकिस्तानी सुरक्षा बलों द्वारा शहरी सिंध में 22,000 से अधिक उर्दू बोलने वाले मोहाजिरों की हत्या कर दी गई। 2013 के बाद से ही सैकड़ों मोहाजिर गायब हो गए हैं और इन मोहाजिरों को मार कर शवों को कराची के बाहरी इलाके में फेंक दिया गया। कराची शहर जो अकेले पाकिस्तान के राष्ट्रीय राजकोष के लिए लगभग 70 प्रतिशत और सिंध प्रांत के लिए 90 प्रतिशत से अधिक कमाता है, का राष्ट्रीय और प्रांतीय सरकारों में कोई प्रतिनिधित्व नहीं है। शहर की आबादी सिंध प्रांत के शेष हिस्सों की आबादी से अधिक है। 

कराची के एक अन्य प्रमुख मुद्दा शहर की कानून प्रवर्तन एजेंसियों में इसकी पूर्ण अनुपस्थिति है। यहां के लोगों को शहर के पुलिस और अर्धसैनिक बलों द्वारा स्वीकार नहीं किया जाता है। गैर-स्थानीय कानून प्रवर्तन एजेंसियों द्वारा इन कराचियों को 'कब्जे वाले इलाके के लोगों' की तरह बर्ताव किया जाता है। नागरिकों का अपहरण कर लिया जाता है और अवैध राशि का भुगतान करने के बाद ही उन्हें छोड़ा जाता है। जो लोग भुगतान करने से मना कर देते हैं या भुगतान नहीं कर सकते हैं, उन्हें या तो फर्जी आरोपों में फंसा दिया जाता है या उन्हें मार दिया जाता है।

कौन हैं मोहाजिर

मुहाजिर उन लोगों को कहा जाता है जो भारत और पाकिस्तान के बंटवारे के बाद 1947 में भारत को छोड़कर पाकिस्तान चले गए थे। इन लोगों में काफी संख्या में ज्यादातर लोग सिंध प्रांत में रहने लगे थे।

 

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