वाशिंगटन (प्रेट्र)। दुनियाभर के वैज्ञानिक इन दिनों आर्टिफीशियल इंटेलिजेंस (कृत्रिम बुद्धिमता (एआइ)) तकनीक पर काम कर रहे हैं। इसके जरिए आधुनिक रोबोट, कंप्यूटर प्रोग्राम और मोबाइल विकसित किए जा रहे हैं। इनमें से कुछ मानव जीवन का हिस्सा भी बन चुके हैं तो कुछ भविष्य में मनुष्यों के काम आसान करने में प्रयोग में आएंगे। इसी कड़ी में अमेरिकी वैज्ञानिकों को एक और बड़ी सफलता हाथ लगी है। उन्होंने ऐसी एआइ तकनीक विकसित कर ली है, जिसके जरिए रोबोट और कंप्यूटर प्रोग्राम मानव प्रशिक्षकों से बातचीत करने में सक्षम होंगे और इन रोबोट को सेना के लिए तैयार किया जा सकेगा। यानी वैज्ञानिकों की खोज से अब वो दिन दूर नहीं रह गया है, जब सीमाओं पर इंसानों के साथ रोबोट भी दुश्मनों से लोहा लेते हुए दिखाई देंगे। 

इनका है संयुक्त प्रयास

यूएस आर्मी रिसर्च लैबोरटरी और ऑस्टिन स्थित द यूनिवर्सिटी ऑफ टेक्सास के शोधकर्ताओं ने एक विशिष्ट मामले पर विचार किया था, जिसमें एक व्यक्ति (प्रशिक्षक) रीयल टाइम में रोबोट तक अपनी प्रतिक्रिया पहुंचाने में सक्षम हो। इसके लिए शोधकर्ताओं ने ट्रेनिंग एन एजेंट मैनुअली विआ इवैलुएटिव रीइनफोर्समेंट (टीएएमईआर) तैयार किया और फिर दल द्वारा एक नया एल्गोरिदम डीप टीएएमईआर तैयार की गई।

तैयार की खास एल्गोरिदम

ये एल्गोरिदम टीएएमईआर का विस्तृत रूप है, जिसमें एक मशीन को एल्गोरिदम के जरिए प्रशिक्षित किया जाता है। इसके जरिए उसके मस्तिष्क को मानव प्रशिक्षक द्वारा विभिन्न वीडियो और बातचीत के लिए विशेष कार्य के लिए ट्रेनिंग दी जाती है। सबसे अहम चीज ये है कि ये सब रीयल टाइम में होता है। यानी यदि रोबोट युद्ध के मैदान पर हो तो मानव प्रशिक्षक उसे उसी समय किसी खास टास्क के लिए तैयार कर सकता है।

सही-गलत समझ सकेगा

टीम ने ऐसी बहुत सी परिस्थितियों का अध्ययन किया, जिसके लिए इंसान मशीन को तैयार कर सकता है। उदाहरण के तौर पर अच्छी जॉब या बुरी जॉब। ये बिल्कुल उसी तरह है, जैसे एक प्रशिक्षक किसी कार्य के लिए कुत्ते को प्रशिक्षण देता है। शोधकर्ताओं के मुताबिक, वर्तमान में ऐसी बहुत सी कृत्रिम बुद्धिमता तकनीक मौजूद हैं, जिनके जरिए रोबोट अपने आस-पास के माहौल से कुछ सीख सकता है। उसके अनुसार खुद को ढाल सकता है और किसी खास टास्क को कर सकता है। हालांकि इस प्रक्रिया में उसके द्वारा उठाया गया कदम गलत भी हो सकता है।

उदाहरण स्वरूप रोबोट एक दीवार पर तो चल सकता है और इसके लिए उसे तैयार भी किया जा सकता है, लेकिन इसी क्रम में यदि रोबोट किसी चट्टान के किनारे चले तो ये घातक भी साबित हो सकता है। ऐसी स्थिति में मानव प्रशिक्षक उसे सही रास्ता दिखाएगा। उसकी गति को नियंत्रित करने के साथ कोई गलत कदम उठाने से भी रोकेगा। 

 

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