मॉस्को (एएनआई)। रूस की राजधानी मॉस्को में फरवरी माह में भी ठंड का कहर लगातार जारी है। भारी बर्फबारी और बर्फीले तूफान के कारण शहर की हालत खराब हो रही है। बताया जाता है कि बर्फीले जानलेवा तूफान में एक की मौत हो गई है वहीं पांच अन्य घायल हो गए हैं। शनिवार से ही बर्फीली हवाओं और तूफान के कारण मॉस्को के पूरे इलाके में ठंडी लहर ने लोगों का जीना मुहाल कर रखा है।

43 सेंटीमीटर की बर्फ... 

 

मेयर सर्गेई सोब्यानीन ने रविवार को मृतक की पुष्टि करते हुए कहा कि तेज हवा से एक पेड़ गिर जाने के कारण एक व्यक्ति की मौत हो गई। तास एजेंसी की रिपोर्ट के मुताबिक, बर्फीले तूफान के कारण 3,000 निवासियों वाले एक इलाके में बिजली बाधित हो जाने के कारण लोगों को काफी परेशानियों का सामना करना पड़ा। मौसम विभाग के अनुसार, बर्फ की गहराई 43 सेंटीमीटर में दर्ज की गई है। 

इलाके में आपातकालीन घोषणा

 

रूस के राज्य मौसम विभाग सेवा ने सोमवार के लिए भी तेज बर्फीले हवाओं और गिरते तापमान के मद्देनजर लोगों को कड़ी चेतावनी जारी कर दी है। इसके साथ ही गवर्नर एंड्रेई वोरोबियु ने राज्य में आपात की घोषणा कर दी है। साथ ही इलाके के सभी यातायात व्यवस्था सेवा को आपात मोड में सेवा देने का आदेश जारी कर दिया है। इसके साथ ही किसी भी अनहोनी और दुर्घटना को रोकने के लिए सड़कों पर से बर्फबारी को हटाने का आदेश दे दिया है।  खतरनाक मौसम शहर में अभी थमने का नाम नहीं ले रहा है जिसके कारण मॉस्को के अलग-अलग हवाई अड्डों से लगभग 217 उड़ानें देरी से चल रही हैं वहीं 17 अन्य उड़ानों को रद कर दिया है। मौसम विभाग के अनुसार, हवा का तापमान मॉस्को के अलग-अलग इलाके में अलग-अलग दर्ज किया जा रहा है।

पिछले दिनों ठंड से जम गईं थी पलकें 

पिछले दिनों रूस के साइबेरियाई गांव ओइमयाकन में तापमान शून्य से 62 डिग्री सेल्सियस नीचे पहुंच गया था। जिसके साथ ही इसे धरती का सबसे सर्द बसावट वाला स्थान कहा जाने लगा था। हालात इतने खराब हैं कि यहां तापमान मापने के लिए लगाया गया थर्मामीटर भी ठंड के कारण टूट गया। लोगों को दावा है कि उनके निजी थर्मामीटरों में तापमान -67 डिग्री सेल्सियस तक रिकॉर्ड हुआ है। इतनी ठंड में लोगों के सिर के बाल और पलकें तक जम गई। लोगों ने अपनी तस्वीरें सोशल मीडिया पर डाली थीं।

अत्यधिक ठंड में टूट गया थर्मामीटर

जनवरी महीने में आमतौर पर यहां औसत तापमान शून्य से 50 डिग्री सेल्सियस नीचे होता है। सभी स्थान बर्फ से जमे हुए थे। इससे पहले गांव में 1933 में तापमान -68 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया था। पर्यटकों को आकर्षित करने के लिए बड़ा थर्मामीटर लगाया गया था लेकिन अत्यधिक ठंड में वह भी टूट गया। गांव के सभी घर बर्फ की मोटी परत से ढके हैं। लोगों को पेन की इंक जमने से लेकर बैटरी बंद होने जैसी स्थितियों से जूझना पड़ा। यहां वाहनों को दिनभर चालू रखना पड़ता है।

 

 

 

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