नई दिल्‍ली, पीटीआइ। भारत ने मालदीव की अदालत के उस फैसले पर 'गहरी निराशा' जातई है, जिसमें पूर्व राष्‍ट्रपति मौमून अब्‍दुल गयूम और सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस को 'फेयर ट्रायल' के बिना लंबी सजा सुनाइ्र है। विदेश मंत्रालय ने कहा कि इस फैसले से मौजूदा मालदीव सरकार की कानून के शासन को बनाए रखने के लिए प्रतिबद्धता पर संदेह पैदा करता है। साथ ही सितंबर में होने जा रहे राष्ट्रपति चुनावों की विश्वसनीयता पर भी सवाल उठाता है।

बयान में कहा गया, 'यह अंतरराष्ट्रीय समुदाय की भी बड़ी मांग रही है। इसलिए यह सुनकर गहरी निराशा हुई कि मालदीव के पूर्व राष्‍ट्रपति और सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश को बिना निष्पक्ष परीक्षण के लंबी सजा सुनाई गई है। यह फैसला कानून के शासन को बनाए रखने के लिए मालदीव सरकार की प्रतिबद्धता पर संदेह पैदा करता है और इस साल सितंबर में राष्ट्रपति चुनाव की पूरी प्रक्रिया की विश्वसनीयता पर भी सवाल उठाएगा।'

भारत का मानना ​​है कि लोकतांत्रिक, स्थिर और समृद्ध मालदीव हिंद महासागर में अपने सभी पड़ोसियों के हित में है। बता दें कि मालदीव की एक अदालत ने पूर्व राष्ट्रपति ममून अब्दुल गयूम को पुलिस की जांच में सहयोग नहीं करने पर 19 महीने जेल की सजा सुनायी है। उन पर सरकार का तख्तापलट करने की साजिश रचने के आरोप है। राष्ट्रपति यामीन अब्दुल गयूम के शासनकाल में गयूम (80) जेल की सजा पाने वाले दूसरे पूर्व राष्ट्रपति हो गए हैं। उन्होंने वर्ष 1978 से 2008 तक हिंद महासागर के इस द्वीपीय देश पर शासन किया था। अपना मोबाइल फोन जांच अधिकारियों को नहीं सौंपने पर एक अदालत ने उन्हें एक साल, सात महीने और छह दिन जेल की सजा सुनायी।

 

मालदीव में चुनाव का एलान, राष्ट्रपति अब्‍दुल्‍ला यामीन की स्थिति मजबूत

यह भी पढ़ें

 

गयूम के साथ गिरफ्तार किये गए देश के प्रधान न्यायाधीश अब्दुल्ला सईद को भी उसी अपराध के लिए समान सजा दी गयी। निचली अदालत के फैसले को कथित तौर पर प्रभावित करने के लिए सईद को पूर्व में इसी तरह की जेल की सजा सुनाई गयी थी। गयूम के 30 साल के शासन के खात्मे के साथ मालदीव 2008 में बहुदलीय लोकतंत्र बन गया था। हालांकि, 2013 में चुने गए यामीन ने कई फैसले को पलट दिया था।

 

By Tilak Raj

विदेश